भोपाल और अशोकनगर में कथित पुलिस बर्बरता से दो मौतें, मानवाधिकार आयोग ने ली स्वत: संज्ञान
मध्य प्रदेश में पुलिस की कथित बर्बरता के दो अलग-अलग मामलों में एक बी.टेक छात्र और एक 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत के बाद राष्ट्रीय...

मध्य प्रदेश में पुलिस की कथित बर्बरता के दो अलग-अलग मामलों में एक बी.टेक छात्र और एक 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
⚖️ NHRC की कार्रवाई
आयोग ने गुरुवार को कहा कि इन घटनाओं में पुलिस के आचरण को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। नोटिस में आयोग ने विस्तृत जांच रिपोर्ट, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अब तक की कार्रवाई की जानकारी तलब की है। आयोग का कहना है कि ऐसे मामलों में यदि पुलिस की लापरवाही या अत्याचार साबित होता है तो यह नागरिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
💔 भोपाल में छात्र की पिटाई से मौत
पहला मामला 11 अक्टूबर का है, जब भोपाल में 22 वर्षीय बी.टेक के अंतिम वर्ष के छात्र की दो पुलिसकर्मियों की पिटाई से मौत हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, छात्र देर रात अपने दोस्तों के साथ पार्टी से लौट रहा था। रास्ते में उन्होंने बोतल तोड़ी, जिस पर पुलिस ने उन्हें रोककर पूछताछ की।
बताया गया कि जब उसके दो साथी भाग निकले, तो पुलिस ने छात्र को पकड़ लिया और कथित रूप से बेरहमी से पीटा। बाद में उसकी हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
🚨 अशोकनगर में ग्रामीण की मौत
दूसरा मामला 9 अक्टूबर को अशोकनगर जिले के शाड़ौरा थाना क्षेत्र के बमुरिया गांव का है। यहां 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत कथित तौर पर पुलिस पिटाई के बाद हुई। जानकारी के अनुसार, पुलिस अवैध शराब की तलाशी के लिए गांव पहुंची थी। इसी दौरान झड़प हुई और ग्रामीण को गंभीर चोटें आईं। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
🗣️ अधिकारियों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
राज्य पुलिस मुख्यालय ने कहा है कि दोनों मामलों में विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। वहीं मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाएं बताती हैं कि निचले स्तर पर पुलिस सुधार और जवाबदेही प्रणाली को और सख्त बनाने की जरूरत है।
⚠️ बढ़ती चिंता: पुलिस अत्याचार के मामले
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश में हिरासत में मौत और पुलिस हिंसा के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि हर थाने में CCTV निगरानी को अनिवार्य किया जाए और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए।
