कंधे पर गेहूं की बोरी, मांग में ‘भाव’ — शिवराज के घर पहुंचकर जीतू पटवारी का अनोखा विरोध प्रदर्शन
बिना अनुमति पहुंचे चौहान के घर, प्रशासन हुआ हैरान गुरुवार सुबह भोपाल में उस समय अफरातफरी मच गई जब मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी एक...

बिना अनुमति पहुंचे चौहान के घर, प्रशासन हुआ हैरान
गुरुवार सुबह भोपाल में उस समय अफरातफरी मच गई जब मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी एक बोरी गेहूं अपने कंधे पर रखे हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सरकारी निवास पर पहुंच गए। यह प्रदर्शन बिना किसी पूर्व अनुमति के किया गया, जिससे पुलिस और प्रशासन दोनों सकते में आ गए।
करीब चार किलोमीटर लंबा यह पैदल मार्च प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से चौहान के घर तक चला। इस दौरान पटवारी के साथ करीब 50 कांग्रेस कार्यकर्ता और किसान मौजूद रहे। पुलिस ने उन्हें मंत्री आवास के मुख्य द्वार पर रोक लिया, लेकिन बाद में केवल पटवारी और कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों को अंदर जाने की अनुमति दी गई।
"भव नहीं, भाव चाहिए" — पटवारी
केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में जीतू पटवारी ने कहा,
“प्रधानमंत्री ने वादा किया था कि धान का MSP ₹3,100 प्रति क्विंटल, गेहूं का ₹2,700 और सोयाबीन का ₹6,000 प्रति क्विंटल दिया जाएगा। अब सरकार कह रही है ‘भावांतर’ देगी। शिवराज जी, हमें भावांतर नहीं, भाव चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 में शुरू की गई भावांतर योजना का लाभ आज तक किसानों को नहीं मिला।
“न बीमा का पैसा मिला, न सर्वे हुआ, न मुआवजा दिया गया,” पटवारी ने कहा।
किसानों की आत्महत्याओं और प्याज संकट पर सवाल
पटवारी ने राज्य में बढ़ती किसानों की आत्महत्याओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि
“आज आठ किसानों ने आत्महत्या की है — दो खंडवा में, दो महिदपुर में, एक तराना में और दो उज्जैन में। यह सब मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में हो रहा है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री से अपील की कि किसानों की दुर्दशा पर तुरंत कदम उठाए जाएँ।
“दस साल पहले सरकार ने प्याज ₹8 किलो खरीदने का वादा किया था, आज वही प्याज ₹6 किलो बिक रही है। कौन जिम्मेदार है? किसानों के खाते में कम से कम ₹20,000 प्रति बीघा भेजे जाएं,” उन्होंने कहा।
बीजेपी ने कहा – “प्रचार के लिए किया गया नाटक”
कांग्रेस के इस अचानक विरोध से भाजपा ने कड़ी नाराजगी जताई।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा,
“आज कांग्रेस अध्यक्ष ने जो किया, वह किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल के नेता को शोभा नहीं देता। बिना अनुमति के केंद्रीय मंत्री के घर जाकर प्रदर्शन करना अनुचित है। मैं हमारे मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सराहना करता हूँ जिन्होंने संयम रखकर प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की।”
खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि यह प्रदर्शन केवल “जनता का ध्यान खींचने के लिए किया गया स्टंट” था और इसे “किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता।”
राजनीतिक और सामाजिक अर्थ
राज्य की राजनीति में यह घटना इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि हाल के महीनों में किसानों की फसलों के दाम और MSP भुगतान को लेकर असंतोष बढ़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को राहत देने के लिए भावांतर योजना शुरू की गई थी, परंतु प्रक्रिया की जटिलताओं और देरी ने किसानों का भरोसा कमजोर किया है।
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. संदीप चौबे का कहना है,
“यह विरोध केवल प्रतीकात्मक नहीं था। यह संकेत है कि ग्रामीण मतदाता वर्ग में भाजपा के प्रति असंतोष पनप रहा है और कांग्रेस उसे भुनाने की कोशिश कर रही है।”
निष्कर्ष
जीतू पटवारी का यह “गेहूं कंधे पर” विरोध न केवल राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक था बल्कि राज्य में किसानों की आवाज़ और उनके हक की मांगों को एक बार फिर सुर्खियों में ले आया। अब नजर इस बात पर है कि केंद्र और राज्य सरकारें किसानों की MSP और मुआवजा संबंधित मांगों पर क्या ठोस कदम उठाती हैं।
