कटनी में ईओडब्ल्यू की बड़ी कार्रवाई: कृषि सहकारी समिति के सहायक प्रबंधक के घर करोड़ों की संपत्ति का खुलासा
3 जगहों पर एकसाथ छापा, भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच में बड़ा खुलासा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने मंगलवार को कटनी जिले में प्राथमिक कृषि...

3 जगहों पर एकसाथ छापा, भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच में बड़ा खुलासा
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने मंगलवार को कटनी जिले में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (PACS) के सहायक प्रबंधक सुशील कुमार गुप्ता के तीन ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी की।
जांच के दौरान गुप्ता के पास चल-अचल संपत्ति, वाहन और कृषि उपकरणों सहित करोड़ों रुपये की संपत्ति का पता चला है।
सूत्रों के मुताबिक, गुप्ता पर भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने के बाद ईओडब्ल्यू ने जांच शुरू की थी। आरोपों की पुष्टि होने पर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(b) और 13(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
15 साल की नौकरी, ₹50 लाख वेतन — लेकिन संपत्ति ₹4 करोड़ से ज़्यादा
जांच में सामने आया कि सुशील कुमार गुप्ता को अब तक लगभग ₹50 लाख वेतन मिला है, जबकि उनके पास ₹4 करोड़ से अधिक की संपत्ति पाई गई।
ये संपत्तियां उन्होंने पिछले 10 वर्षों में अपने और परिजनों के नाम पर खरीदीं।
ईओडब्ल्यू अधिकारियों ने बताया कि तीन टीमों ने एकसाथ छापा मारते हुए —
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बसदी और बनहेरी गांव में उनके घरों व मिलों,
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बसदी में बने फार्महाउस और गोदाम,
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तथा तेल, चावल और आटा मिलों की तलाशी ली।
इसके साथ ही कई बैंक खातों, लॉकरों और कृषि भूमि की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
बरामद संपत्तियों की सूची
छापेमारी के दौरान ईओडब्ल्यू ने सुशील गुप्ता और उनके परिवार के नाम पर निम्न संपत्तियाँ जब्त कीं:
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वेयरहाउस (बसदी गांव) — ₹2.20 करोड़
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फार्महाउस (बसदी) — ₹29.56 लाख
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राइस मिल और ऑयल मिल (बनहेरी) — ₹8.39 लाख
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घर में लग्जरी फर्नीचर व उपकरण — ₹11.18 लाख
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वाहन — दो मोटरसाइकिल, एक ट्रैक्टर, एक पिकअप वाहन और कृषि उपकरण (कुल मूल्य लाखों रुपये)
ईओडब्ल्यू की जांच जारी
ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार, यह मामला “आय से अधिक संपत्ति” का है। फिलहाल टीम बैंक खातों, लॉकरों और निवेशों के दस्तावेज़ खंगाल रही है।
प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि संपत्ति का बड़ा हिस्सा फर्जी नामों और परिजनों के माध्यम से खरीदा गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया —
“आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग कर कृषि सहकारी समितियों के माध्यम से आर्थिक लाभ अर्जित किया है। विस्तृत वित्तीय जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।”
निष्कर्ष
कटनी का यह मामला मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के भ्रष्टाचार पर बढ़ते फोकस को एक बार फिर रेखांकित करता है।
ईओडब्ल्यू की टीम का कहना है कि वे आयकर और पंजीयन विभाग से समन्वय कर रही है ताकि सभी लेन-देन की कानूनी और वित्तीय जांच पूरी की जा सके।
