रुद्रा बेटिंग ऐप केस में नया खुलासा — दुबई से संचालित होता था नेटवर्क, ‘मार्को’ ने व्हाट्सएप वेब के ज़रिए रचा था पूरा खेल
दुबई से कंट्रोल होता था पूरा नेटवर्क रुद्रा बेटिंग ऐप मामले में पुलिस को बड़ा सुराग मिला है — दुबई में बैठे मास्टरमाइंड मार्को उर्फ...

दुबई से कंट्रोल होता था पूरा नेटवर्क
रुद्रा बेटिंग ऐप मामले में पुलिस को बड़ा सुराग मिला है — दुबई में बैठे मास्टरमाइंड मार्को उर्फ मुकेश मोटवानी ने पूरे नेटवर्क को व्हाट्सएप वेब लॉगिन के माध्यम से नियंत्रित किया।
जांच में सामने आया कि मार्को अपने भारतीय साथियों को लॉगिन कोड भेजता था और खुद के पास “मास्टर एक्सेस” रखता था, ताकि पुलिस रेड या किसी आपात स्थिति में वह तुरंत सभी सिस्टम से लॉगआउट कर सके।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 30 सितंबर को एशिया कप के दौरान अयोध्या नगर पुलिस ने एक ऑनलाइन बेटिंग कॉल सेंटर पर छापा मारा था। छापे की भनक लगते ही मार्को ने तीन व्हाट्सएप अकाउंट्स को सेकंडों में लॉगआउट कर दिया, जिससे महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत नष्ट हो गए।
अरुण वर्मा से एन्क्रिप्टेड चैट और वीडियो कॉल्स के ज़रिए संपर्क
पुलिस के अनुसार, मार्को लगातार भोपाल के मुख्य आरोपी अरुण वर्मा और उसके सहयोगियों से एन्क्रिप्टेड चैट्स और वीडियो कॉल्स के ज़रिए संपर्क में था।
जब भी नेटवर्क में कोई तकनीकी बाधा आती, मार्को सीधे दुबई से वीडियो कॉल कर आदेश देता।
जांच में यह भी सामने आया कि रुद्रा ऐप शुरू में एक सीमित स्तर का ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म प्रतीत होता था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट साबित हुआ।
रेलवे एसी कोच अटेंडेंट बने ‘कोरियर’
गैंग ने जांच एजेंसियों की नज़र से बचने के लिए रेलवे एसी कोच अटेंडेंट्स को ‘संदेशवाहक’ की तरह इस्तेमाल किया।
ये अटेंडेंट्स हर ट्रिप के बदले ₹500 लेकर फर्जी सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और बैंक डॉक्यूमेंट्स शहरों के बीच पहुंचाते थे।
अब तक की पूछताछ में पता चला है कि लगभग 200 फर्जी बैंक खातों का उपयोग सट्टे की रकम को देशभर में घुमाने के लिए किया जा रहा था।
अधिकांश खाते अमरावती और झांसी जिलों में खोले गए थे, जहां स्थानीय एजेंट लोगों को झांसा देकर उनके दस्तावेज़ लेकर खाते और सिम कार्ड बनवाते थे।
महादेव ऐप से रुद्र तक — वही नेटवर्क, नया नाम
पुलिस की जांच में यह भी पुष्टि हुई है कि रुद्रा ऐप की उत्पत्ति महादेव ऐप पर हुई कार्रवाई के बाद हुई।
जब ईडी ने महादेव ऐप पर शिकंजा कसा, तो उसी नेटवर्क के संचालक दुबई भाग गए और वहीं से मार्को के नेतृत्व में रुद्रा ऐप शुरू किया गया।
भोपाल का अरुण वर्मा, जो कभी खुद बेटर था, मार्को से जुड़ा और 65% कमीशन पर स्थानीय पैनल चलाने लगा।
“किंगपिन” खुद बना शिकार — साइबर ठगों ने ठगा ऑपरेटर
दिलचस्प बात यह रही कि अरुण वर्मा, जो इस नेटवर्क का स्थानीय संचालक था, खुद दो बार साइबर ठगी का शिकार हुआ।
उसने पुलिस को बताया कि शुरू में कुछ लोगों ने उसे “बेटिंग लॉगिन” दिलाने का वादा किया और उससे बड़ी रकम ऐंठ ली। बाद में तीसरे प्रयास में उसकी मुलाकात मार्को से हुई, जिसने उसे अपने नेटवर्क में शामिल कर लिया।
हवाला नेटवर्क पर पुलिस की निगाह
पुलिस अब उन हवाला कारोबारियों पर नज़र रख रही है जिन्होंने बेटिंग से अर्जित रकम दुबई तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।
अधिकारियों के मुताबिक, ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य की कमी के कारण अभी गिरफ्तारी नहीं की गई है, लेकिन ट्रांज़ेक्शन रूट और नेटवर्क ट्रेल की जाँच जारी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया —
“रुद्रा ऐप के ज़रिए भारत में जुटाई गई रकम हवाला चैनलों से दुबई भेजी गई। यही कड़ी अभी सबसे बड़ा रहस्य है जिसे सुलझाना बाकी है।”
निष्कर्ष
रुद्रा बेटिंग ऐप मामला अब एक साइबर–क्राइम से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय मनी नेटवर्क की जाँच में तब्दील हो गया है।
पुलिस टीमों को उम्मीद है कि दुबई से मिले डिजिटल ट्रेल और हवाला लेनदेन की कड़ियों से इस गिरोह का पूरा चेहरा सामने आएगा।
