फेसबुक पर पुलिस कमिश्नर बनकर ठगी! राजस्थान के मेवाती गैंग का पर्दाफाश, भोपाल पुलिस ने गिराया साइबर जाल
भोपाल में साइबर ठगी का नया तरीका — पुलिस अधिकारियों के नाम पर फेसबुक पर जालसाजी भोपाल पुलिस ने हाल ही में एक चौंकाने वाले...

भोपाल में साइबर ठगी का नया तरीका — पुलिस अधिकारियों के नाम पर फेसबुक पर जालसाजी
भोपाल पुलिस ने हाल ही में एक चौंकाने वाले साइबर अपराध का खुलासा किया है, जिसमें ठगों ने पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा के नाम और फोटो का इस्तेमाल करते हुए 70 फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाए। इन खातों से ठग सस्ते फर्नीचर और घरेलू सामान बेचने का झांसा देकर लोगों से पैसे ऐंठ रहे थे।
पुलिस ने अब तक 68 फर्जी अकाउंट ब्लॉक करवा दिए हैं, जबकि दो और पर कार्रवाई जारी है।
ठगी का तरीका: ‘₹1 लाख का फर्नीचर, बस ₹10,000 में’
जांच में सामने आया कि ठग फेसबुक पर आकर्षक पोस्ट डालते थे — “₹1 लाख का फर्नीचर सिर्फ ₹10,000 में।” ऐसे ऑफ़र देखकर कई यूज़र उनसे संपर्क करते और ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर देते। भुगतान मिलते ही ठग पीड़ित को ब्लॉक कर देते।
पुलिस कमिश्नर मिश्रा ने बताया कि पहला सुराग तब मिला जब जबलपुर के एक व्यक्ति ने शिकायत की कि वह एक फेसबुक प्रोफ़ाइल के माध्यम से फर्नीचर खरीदते समय ठगा गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों तक पहुंच बनाई।
राजस्थान से चला था ठगी का नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ कि यह पूरा नेटवर्क राजस्थान के मेवाती गैंग द्वारा संचालित था। पुलिस ने अब तक गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके बाकी साथी उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा में सक्रिय हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, अकाउंट ब्लॉक होने के बाद भी ये ठग नई प्रोफाइल बनाकर फिर सक्रिय हो जाते हैं। पुलिस की कई टीमें अब गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हैं।
पुलिस की चेतावनी: “सरकारी अधिकारी कभी ऑनलाइन सामान नहीं बेचते”
कमिश्नर मिश्रा ने नागरिकों से अपील की कि किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट या प्रोफ़ाइल की सत्यता की पुष्टि किए बिना भुगतान न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पुलिस या सरकारी अधिकारी इस तरह की बिक्री या ऑफर फेसबुक पर नहीं करते।
उन्होंने कहा,
“सस्ते सौदों के लालच में न पड़ें। किसी संदिग्ध पोस्ट की जानकारी तुरंत साइबर पुलिस को दें। जागरूकता ही ठगी से बचाव का सबसे सशक्त उपाय है।”
साइबर अपराध में बढ़ती जालसाजी — नागरिकों के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में सोशल मीडिया-आधारित ठगी के मामलों में तेज़ वृद्धि हुई है। ठग अक्सर भरोसेमंद नामों — जैसे पुलिस, सेना या सरकारी विभागों — का इस्तेमाल करके लोगों का विश्वास जीतते हैं।
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से बचने के लिए नागरिकों को निम्न सावधानियाँ अपनानी चाहिए:
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किसी भी “सस्ते ऑफ़र” पर तुरंत विश्वास न करें।
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अकाउंट के ‘ब्लू टिक’ या फॉलोअर्स लिस्ट की जांच करें।
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किसी अनजान व्यक्ति को ऑनलाइन भुगतान करने से पहले उसकी पहचान सत्यापित करें।
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संदिग्ध मामलों में तुरंत cybercrime.gov.in या नजदीकी साइबर थाने से संपर्क करें।
निष्कर्ष:
भोपाल पुलिस की यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधी अब पहले से कहीं अधिक चालाक हो गए हैं। समाज में डिजिटल जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह की ऑनलाइन ठगी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
