पाकिस्तान से आ रहे ड्रोन अब 'बैक-टू-होम' मोड में, पंजाब पुलिस के लिए नई चुनौती
पंजाब सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम संभाल रही सुरक्षा एजेंसियों ने हाल के हफ्तों में एक नई प्रवृत्ति देखी है — पाकिस्तान से उड़ान भरने वाले...

पंजाब सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम संभाल रही सुरक्षा एजेंसियों ने हाल के हफ्तों में एक नई प्रवृत्ति देखी है — पाकिस्तान से उड़ान भरने वाले कई ड्रोन अब भारतीय क्षेत्र में दाखिल होने के बाद वापस लौट जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आईएसआई समर्थित तस्कर इन ड्रोन के जरिए हथियार (जैसे AK-47, ग्रेनेड) और नशा तस्करी की कोशिश करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद कुछ समय के लिए यह गतिविधि थमी थी, लेकिन हाल ही में इसमें फिर तेजी आई है।
एक वरिष्ठ पंजाब पुलिस अधिकारी ने बताया, “अब पाकिस्तान से भेजे जा रहे ड्रोन ‘फेल-सेफ’ मैकेनिज्म के साथ आते हैं। जैसे ही हमारा जामिंग या लॉकिंग सिस्टम ड्रोन का सिग्नल बाधित करता है, वे ऑटोमैटिक अपने बेस स्टेशन पर लौट जाते हैं। यह हमारे लिए एक टेक्नोलॉजिकल चुनौती है।”
अधिकारी ने कहा कि भारत के एंटी-ड्रोन सिस्टम पूरी तरह सक्रिय हैं और अधिकांश प्रयास विफल कर दिए जाते हैं। “दैनिक आधार पर 8 से 15 ड्रोन तक का पता लगाया जाता है। हमें कम-से-कम 100 एंटी-ड्रोन सिस्टम की जरूरत है ताकि पूरे बॉर्डर को कवर किया जा सके,” उन्होंने कहा।
पंजाब सरकार ने अपने अभियान ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ के तहत तीन वाहन-आधारित एंटी-ड्रोन सिस्टम (ADS) तैनात किए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 9 अगस्त को तरन तारन में इनका उद्घाटन किया था।
राज्य सरकार अब कुल नौ ऐसे सिस्टम लगाने की योजना पर काम कर रही है, जिसकी लागत करीब ₹51 करोड़ है।
तरन तारन पुलिस के मुताबिक, ADS की मदद से अब तक 12 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और कई तस्कर गिरफ्तार किए गए हैं। बरामद सामग्री में चार पिस्तौल, 75 गोलियां, पांच मैगजीन, तीन किलो से ज्यादा हेरोइन, 492 ग्राम ICE और 506 ग्राम अफीम शामिल है।
भिखीविंड डीएसपी प्रीतिंदर सिंह ने बताया, “पहले हमें ड्रोन की आवाज से अंदाजा लगाना पड़ता था, अब तकनीक सटीक लोकेशन, ऊंचाई और स्पीड बताती है। जामिंग कुछ दूरी तक असरदार होती है, लेकिन कभी-कभी ड्रोन इतनी दूर होता है कि उसे गिराना संभव नहीं हो पाता। फिर भी, डिटेक्शन से हमें कई बरामदगियां और गिरफ्तारियां करने में मदद मिली है।”
