मुगल बादशाह बाबर को समर्पित मस्जिदों के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने मुगल बादशाह बाबर को समर्पित मस्जिदों के निर्माण को रोकने की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता को बरकरार रखा।

मुख्य बातें:
क्या हुआ: सुप्रीम कोर्ट ने मुगल बादशाह बाबर को समर्पित मस्जिदों के निर्माण को प्रतिबंधित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।
क्यों महत्वपूर्ण: याचिका में तर्क दिया गया था कि बाबर एक हिंदू विरोधी आक्रमणकारी था, और उसके नाम पर मस्जिदें नहीं बननी चाहिए। इस खारिज करने से भारत में धार्मिक स्वतंत्रता बरकरार है।
लोगों के लिए क्या बदलाव: इस फैसले से मस्जिदों का निर्माण जारी रहेगा, जिसमें मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद भी शामिल है।
कौन प्रभावित: जन उन्नयन पार्टी, हुमायूं कबीर और मुर्शिदाबाद का मुस्लिम समुदाय सीधे तौर पर प्रभावित है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मुगल बादशाह बाबर को समर्पित किसी भी मस्जिद के निर्माण को रोकने के उद्देश्य से दायर याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील की संक्षिप्त प्रस्तुति के बाद मामले की सुनवाई की और इसे खारिज कर दिया।
निर्माण के खिलाफ तर्क
याचिका में तर्क दिया गया था कि बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम पर कोई मस्जिद नहीं बनाई जानी चाहिए क्योंकि मुगल शासक कथित तौर पर एक हिंदू विरोधी आक्रमणकारी था। याचिकाकर्ता के वकील ने इन दावों के बावजूद मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर एक मस्जिद के निर्माण पर प्रकाश डाला।
मस्जिद निर्माण पर कबीर का रुख
हुमायूं कबीर, जन उन्नयन पार्टी के प्रमुख और पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक, ने 6 दिसंबर, 2025 को मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखी। उन्होंने पूजा स्थलों के निर्माण के अधिकार पर जोर देते हुए कहा, "जैसे कोई मंदिर या चर्च बना सकता है, वैसे ही मैं भी बना सकता हूं।"
कबीर ने यह भी कहा कि बंगाल की 37 प्रतिशत मुस्लिम आबादी इसका निर्माण सुनिश्चित करेगी।
कानूनी चुनौतियों की अवहेलना
कबीर ने संभावित कानूनी बाधाओं को खारिज करते हुए कहा, "मेरे खिलाफ पांच मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन कोई भी उस व्यक्ति को नहीं रोक सकता जिसके साथ अल्लाह है। अदालत ने यह भी स्पष्ट रूप से कहा है कि यह भारत के संविधान में लिखा है कि कोई भी मस्जिद बना सकता है; यह एक अधिकार है।" उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने वाले संवैधानिक अधिकारों का उल्लेख किया।
व्यापक विकास योजनाएं
2 जनवरी को कबीर ने बाबरी मस्जिद के साथ एक अस्पताल और विश्वविद्यालय की योजनाओं की घोषणा की।
कबीर ने कहा, "यहां एक बाबरी मस्जिद बनेगी, एक अस्पताल बनेगा, एक विश्वविद्यालय बनेगा और लोगों के लाभ के लिए सुविधाएं बनाई जाएंगी।"
आगे क्या देखना है
भविष्य के घटनाक्रमों में मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का चल रहा निर्माण, साथ ही नियोजित अस्पताल और विश्वविद्यालय शामिल हैं। कानूनी चुनौतियां अभी भी उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे संभावित रूप से आगे की अदालती कार्यवाही और परियोजना के आसपास सार्वजनिक चर्चा हो सकती है।
