स्वास्थ्य विभाग में मची हलचल: छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड और आयकर छापों के बाद अफसरों में कुर्सी की खींचतान तेज
विभाग पर संकट, अफसरों के लिए अवसर स्वास्थ्य विभाग इन दिनों लगातार विवादों के घेरे में है। आयकर विभाग की छापेमारी और छिंदवाड़ा में जहरीली...

विभाग पर संकट, अफसरों के लिए अवसर
स्वास्थ्य विभाग इन दिनों लगातार विवादों के घेरे में है। आयकर विभाग की छापेमारी और छिंदवाड़ा में जहरीली कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद विभाग पर सरकार का शिकंजा कस गया है। शीर्ष स्तर पर नाराज़गी के चलते कई अधिकारियों की कुर्सियां डगमगा रही हैं।
इसी उथल-पुथल के बीच कुछ अफसर इसे अपने लिए अवसर के रूप में देख रहे हैं। मंत्रालय के गलियारों में चर्चा है कि कुछ अफसर विभाग के प्रमुख पद पर अपनी नियुक्ति के लिए सक्रिय हो गए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी, जो फिलहाल "लूप लाइन" में हैं, हर संभव कोशिश में जुटे हैं कि उन्हें विभाग की कमान मिल जाए। उनके करीबी लगातार ऊपरी स्तर पर पैरवी कर रहे हैं।
वहीं कुछ अन्य अफसर भी स्वास्थ्य विभाग का प्रभार पाने की दौड़ में हैं। सूत्र बताते हैं कि छिंदवाड़ा घटना के बाद जब राज्य प्रमुख वहां के दौरे पर जा रहे थे, तब विभागीय फेरबदल की चर्चा तेज थी, लेकिन एक अफसर की सत्ता से नजदीकी के कारण तत्काल कोई बदलाव संभव नहीं हो पाया।
केंद्र में डेपुटेशन की दौड़
राज्य की अफसरशाही में इन दिनों केंद्र सरकार में डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर जाने की होड़ मची है। एक ही बैच के बारह आईएएस अफसरों में से अब तक तीन केंद्र में तैनात थे, और हाल ही में दो महिला अधिकारी भी केंद्र में शामिल हो गई हैं।
अब दो और अधिकारी केंद्र में जाने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें से एक अधिकारी भोपाल में ही किसी केंद्रीय कार्यालय में पोस्टिंग चाहते हैं। लंबे समय से राज्य शासन में अपनी वर्तमान भूमिका से असंतुष्ट यह अधिकारी अब केंद्र में नई पारी शुरू करने की कोशिश में हैं।
दूसरे अधिकारी, जिन्होंने अब तक राज्य में कई अहम पद संभाले हैं, केंद्र में जाकर "एम्पैनलमेंट" हासिल करने के उद्देश्य से आवेदन की तैयारी में हैं। नौकरशाही में यह चर्चा है कि आने वाले दो महीनों में कई अधिकारी केंद्र की ओर रुख कर सकते हैं।
तबादले की चिंता में अफसर
एक अन्य आईएएस अधिकारी, जो वर्तमान में एक महत्वपूर्ण विभाग में पदस्थ हैं, अपने स्थानांतरण को लेकर चिंतित हैं। वे विभाग बदलने के लिए राजनेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह अधिकारी पहले एक निगम में पदस्थ थे, जहां वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे। उसके बाद इन्हें वर्तमान विभाग में भेजा गया। हालांकि विभाग में काम तो है, लेकिन "कमाई" और निर्णय-निर्माण की गुंजाइश न के बराबर है। यही कारण है कि अधिकारी हरसंभव रास्ता खोज रहे हैं कि उन्हें कहीं और भेजा जाए।
हाल ही में इस अधिकारी के व्यवहार को लेकर विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) को भी उच्च स्तर पर फटकार झेलनी पड़ी। बावजूद इसके, सरकार ने फिलहाल उनके तबादले पर रोक लगा दी है।
चौथे जिले के कलेक्टर बने बिहार कैडर के अफसर
राज्य में हाल ही में एक अफसर का छोटा जिला छोड़कर बड़े जिले में कलेक्टर बनना चर्चा का विषय बना हुआ है। यह अफसर न तो राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माने जाते हैं और न ही मीडिया में चर्चित चेहरा हैं, फिर भी उन्हें एक बड़े जिले की कमान मिलना कई अफसरों के लिए चौंकाने वाला है।
यह अफसर पहले बिहार कैडर में थे और वहां दो जिलों में कलेक्टर रह चुके हैं। राज्य में आने के बाद यह उनका चौथा जिला है जहाँ वे बतौर कलेक्टर कार्यभार संभाल रहे हैं। मंत्रालय में कई वरिष्ठ अफसरों की नजर इस जिले पर थी, इसलिए यह पोस्टिंग कई लोगों के लिए अप्रत्याशित रही।
विवाद में फंसे अधिकारी की मुश्किलें बढ़ीं
एक विभाग से ट्रांसफर के बाद भी एक अधिकारी की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। एक पुराने विवाद के न्यायालय में जाने के बाद सरकार ने उनका तबादला किया था, ताकि विवाद शांत हो जाए, लेकिन मामला अब केंद्र सरकार तक पहुंच गया है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में मंत्रालय स्तर पर बनी समिति ने इस प्रकरण की सुनवाई की और संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया। समिति ने उस अधिकारी के साथ-साथ एक अन्य अफसर को भी फटकार लगाई है। यदि मामला जल्द सुलझा नहीं, तो दोनों अधिकारियों के लिए संकट और गहराने की आशंका है।
अधूरी डील और अफसर की परेशानी
एक अन्य अधिकारी हाल ही में एक "शिकायती डील" में भारी नुकसान झेल चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, इस अधिकारी ने एक बिल्डर से जमीन से जुड़ा सौदा किया था और एडवांस रकम भी ली थी। उन्होंने वादा किया था कि जैसे ही संबंधित अधिकारी का तबादला होगा, काम हो जाएगा।
लेकिन जब वह अधिकारी हटाया गया, तो यह अधिकारी भी साथ में ट्रांसफर हो गया। नतीजतन, डील अधूरी रह गई और बिल्डर ने अपने पैसे की मांग शुरू कर दी। अब "साहब" के पास रकम लौटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
निष्कर्ष
राज्य की नौकरशाही इन दिनों अस्थिरता और सत्ता-समीकरणों के बीच झूल रही है। स्वास्थ्य विभाग के हालिया विवाद ने जहां अफसरों में चिंता बढ़ाई है, वहीं कई के लिए यह नए अवसरों का दरवाज़ा भी खोल रहा है। आने वाले महीनों में तबादलों और डेपुटेशन की यह रफ्तार प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है।
