मोदी मेलबर्न कार्यक्रम पर भारत की राजनीति में उबाल: आयोजकों की माफी की मांग
मेलबर्न में 'मीट्स मोदी' कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस नेताओं से सार्वजनिक माफी की मांग की है।

मुख्य सारांश
क्या हुआ: 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम के आयोजकों ने भारतीय कांग्रेस नेताओं से सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए एक खुला पत्र लिखा है।
क्यों मायने रखता है: आयोजकों द्वारा कांग्रेस पार्टी के 'पेड क्राउड' के आरोपों को भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के प्रयासों का अपमान माना जा रहा है।
क्या बदलता है: यह घटना विदेशों में प्रवासी जुड़ाव और कार्यक्रम लॉजिस्टिक्स को लेकर भारत में राजनीतिक बहस को और तेज करती है।
कौन प्रभावित है: इस विवाद के केंद्र में भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक हैं।
'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम पर राजनीतिक तूफान
ऑस्ट्रेलिया में हाल ही में आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम को लेकर भारत में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस सभा के भारतीय आयोजकों और स्वयंसेवकों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक खुला पत्र लिखा है।
सार्वजनिक माफी की मांग
आयोजक औपचारिक रूप से कांग्रेस नेताओं से अपने बयानों को वापस लेने और सार्वजनिक माफी जारी करने का अनुरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि ये आरोप प्रवासियों के वास्तविक उत्साह और स्वैच्छिक भागीदारी को कमतर आंकते हैं।
30,000 उपस्थित लोगों पर विवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान 9 जुलाई को आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों की भारी भीड़ देखी गई थी। आयोजकों का अनुमान है कि सामुदायिक सभा में लगभग 30,000 लोग शामिल हुए थे। कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो ऑनलाइन प्रसारित होने के बाद राजनीतिक बहस छिड़ गई। कांग्रेस पार्टी ने दावा किया कि भीड़ स्वतःस्फूर्त नहीं थी, बल्कि कथित तौर पर एक संरचित तरीके से लाई गई थी, जिसे अब कार्यक्रम के आयोजकों ने दृढ़ता से खारिज कर दिया है।
आयोजकों ने आरोपों का खंडन किया
अपने खुले पत्र में, आयोजकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम के उपस्थित लोग अपनी मर्जी और उत्साह से आए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी को भी शामिल होने के लिए भुगतान करने का आरोप पूरी तरह से निराधार है। कार्यक्रम के समन्वय में शामिल स्वयंसेवकों, जिनमें चार्टर्ड 'मोदी एक्सप्रेस' उड़ानों का प्रबंधन करने वाले भी शामिल थे, ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय ने प्रधानमंत्री से मिलने और उनका स्वागत करने के लिए व्यक्तिगत प्रयास किए थे। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि समुदाय के सदस्यों ने यात्रा, कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और अन्य लॉजिस्टिक्स का स्वयं वित्तपोषण किया था।
प्रवासियों ने नाराजगी व्यक्त की
पत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि विदेश में रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्य लोकतांत्रिक मूल्यों और अपनी व्यक्तिगत पसंद के आधार पर सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए स्वतंत्र हैं। आयोजकों को लगता है कि कांग्रेस नेताओं के बयान प्रवासियों की स्वतंत्र इच्छा और कड़ी मेहनत पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से अपने बयानों पर पुनर्विचार करने और समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने वाली सार्वजनिक माफी जारी करने की अपील की।
राजनीतिक आरोप तेज
इस पूरे प्रकरण ने भारत में राजनीतिक आरोपों को और हवा दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थकों ने कांग्रेस के आरोपों को प्रवासी भारतीयों का अपमान बताया है। हालांकि, आयोजकों द्वारा भेजे गए खुले पत्र पर कांग्रेस पार्टी की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। प्रधानमंत्री मोदी के विदेश कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति हमेशा चर्चा का विषय रही है। समर्थक इसे प्रवासी जुड़ाव और प्रधानमंत्री के समर्थन का संकेत मानते हैं, जबकि विपक्ष अक्सर ऐसी सभाओं की व्यवस्थाओं और राजनीतिक उपयोगिता पर सवाल उठाता है। मेलबर्न कार्यक्रम को लेकर विवाद बना हुआ है। अब सभी की निगाहें आयोजकों द्वारा भेजे गए खुले पत्र के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं।
