BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
National

महादेव ऐप के फाउंडर सौरभ चंद्राकर ओमान में हिरासत में

अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट के किंगपिन सौरभ चंद्राकर को ओमान में पकड़ा गया। भारत प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहा है।

Jul 9
2 मिनट में पढ़ें
महादेव ऐप के फाउंडर सौरभ चंद्राकर ओमान में हिरासत में

ओमान में महादेव ऐप के फाउंडर की गिरफ्तारी

महादेव सट्टेबाजी ऐप सिंडिकेट के मुख्य आरोपी और फाउंडर सौरभ चंद्राकर को ओमान में हिरासत में ले लिया गया है। यह गिरफ्तारी कई हफ्तों से फरार चल रहे चंद्राकर के लिए एक बड़ा झटका है। भारतीय एजेंसियां उसे भारत लाने की पुरजोर कोशिश कर रही हैं ताकि उस पर मुकदमा चलाया जा सके।

इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस का असर

रॉयल ओमान पुलिस ने भारतीय जांच एजेंसियों द्वारा जारी किए गए इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर चंद्राकर को पकड़ा है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले सट्टेबाजी रैकेट के खिलाफ भारत की कार्रवाई को मजबूती देता है।

जांच का दायरा और पिछली घटनाएं

प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य पुलिस महादेव ऐप की जांच कर रहे हैं, जिस पर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट को चलाने का आरोप है। पहले की रिपोर्टों के अनुसार, चंद्राकर दुबई में था, जहां उसे 2024 में हिरासत में लिया गया था लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया था। उसके सह-संस्थापक रवि उपल के वानुअतु भाग जाने की खबर है।

धनाढ्य सट्टेबाजी रैकेट का खुलासा

महादेव ऐप पर भारत भर में फ्रैंचाइजी-आधारित नेटवर्क के जरिए कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डोमेन नामों से अवैध सट्टेबाजी की सुविधा देने का आरोप है। इस रैकेट से कथित तौर पर 6,000 करोड़ रुपये की अपराध आय अर्जित की गई है। मार्च में, ED ने 1,700 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की थी, जिनमें से कई दुबई में थीं और बुर्ज खलीफा में प्रॉपर्टी भी शामिल थी, जिनका संबंध चंद्राकर और उससे जुड़ी कंपनियों से था।

भारत-ओमान संबंधों का लाभ

भारतीय अधिकारी भारत और ओमान के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के कारण चंद्राकर को वापस लाने को लेकर आश्वस्त हैं। हालिया आर्थिक समझौते, जिनमें 1 जून को लागू हुआ मुक्त व्यापार समझौता शामिल है, ने इन संबंधों को और मजबूत किया है। इन मजबूत आर्थिक संबंधों से कानूनी मामलों में सहयोग मिलने की उम्मीद है।

आगे क्या देखें

अब सबकी नजरें भारत के प्रत्यर्पण या निर्वासन के प्रयासों की सफलता पर टिकी हैं। आगे की जांच से इस सिंडिकेट के संचालन और कथित तौर पर इसमें शामिल बड़े नामों के बारे में और अधिक खुलासे होने की उम्मीद है।