राम मंदिर दान घोटाला: जांच के बीच ट्रस्ट पदाधिकारियों का इस्तीफा
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अहम पदाधिकारियों ने मंदिर दान से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद इस्तीफा दिया है।

राम मंदिर दान घोटाला: जांच के बीच ट्रस्ट पदाधिकारियों का इस्तीफा
क्या हुआ: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों ने मंदिर में मिले दान से जुड़ी वित्तीय कुप्रबंधन और सुरक्षा खामियों के आरोपों के बाद इस्तीफा दे दिया है।
क्यों महत्वपूर्ण है: इस घोटाले ने भारत के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक पर वित्तीय लेन-देन की ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
क्या बदल रहा है: एक जारी एसआईटी (SIT) जांच वित्तीय प्रक्रियाओं और नियुक्तियों की पड़ताल कर रही है, जिसमें संभावित कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
कौन प्रभावित है: इस्तीफों से राम मंदिर का प्रबंधन करने वाले ट्रस्ट के नेतृत्व पर असर पड़ा है, और जांच में पूर्व सदस्य और बैंक अधिकारी भी शामिल हैं।
राम मंदिर दान मामले में जांच तेज
श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान की कथित चोरी और गबन के मामले ने एक महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया है, जिसमें पूर्व ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा अब जांच के घेरे में हैं। एक विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट में डॉ. मिश्रा को वित्तीय और सुरक्षा प्रबंधन में खामियों का दोषी पाया गया है।
वित्तीय अनियमितताएं और सुरक्षा चूक का जिक्र
एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. मिश्रा ने दान राशि के प्रबंधन, नकदी संग्रह और सुरक्षा प्रोटोकॉल से संबंधित निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जांच में बायोमेट्रिक जांच, तलाशी और अन्य सुरक्षा प्रक्रियाओं में ढिलाई उजागर हुई। यह आरोप है कि इन अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद समय पर सुधारात्मक उपाय नहीं किए गए।
भर्ती प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
एजेंसियां कर्मचारी नियुक्तियों की भी पड़ताल कर रही हैं, जिसमें मंदिर से संबंधित कई पदों के लिए डॉ. अनिल मिश्रा की कथित सिफारिशों पर गौर किया जा रहा है। नौकरी दिलाने के बदले कमीशन लेने के आरोपों की भी जांच चल रही है। डॉ. अनिल मिश्रा ने 27 जून को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया। इसी बैठक में पूर्व महासचिव चंपत राय का इस्तीफा भी स्वीकार किया गया।
चंपत राय ने एसबीआई और डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर उठाए सवाल
अपने मौन को तोड़ते हुए, चंपत राय ने एसआईटी को लिखे एक पत्र में दान राशि के लेखा-जोखा और सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई है। उनका यह पत्र, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, कथित तौर पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) और डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाता है। उन्होंने 6 फरवरी, 2025 को जारी किए गए गणना प्रक्रिया दिशानिर्देशों पर आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि वे ट्रस्ट और बैंक की संयुक्त सहमति से तैयार किए गए थे, जिन पर डॉ. मिश्रा और बैंक अधिकारियों के हस्ताक्षर थे, लेकिन उनके नहीं। उन्होंने ट्रस्ट और बैंक के बीच 9 फरवरी, 2024 को हुए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का भी जिक्र किया, जिसमें दान राशि की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे और मजबूत दरवाजे जैसे सुरक्षा उपायों का उल्लेख था। हालांकि, वायरल पत्र पर ट्रस्ट या एसआईटी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आरोपी 40 घंटे की रिमांड पर
अदालत ने मंदिर दान चोरी और गबन के मामले में गिरफ्तार आरोपियों लवकुश मिश्रा, अंकल्प मिश्रा और करुणेश पांडे को 40 घंटे की पुलिस रिमांड पर भेजा है। जांच अधिकारी ने सात दिन की रिमांड मांगी थी। जांच के दौरान, आरोपियों के मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का दायरा अब बुलियन व्यापारियों और ट्रस्ट से जुड़े कुछ भूमि सौदों को भी शामिल करने के लिए बढ़ा दिया गया है।
कोषाध्यक्ष ने किया आरोपों से इनकार, इस्तीफे से किया इनकार
अपनी भूमिका के बारे में पूछे जाने पर, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि दान पेटी से प्राप्त दान के प्रबंधन की जिम्मेदारी महासचिव के दायरे में आती थी। उनकी जिम्मेदारी केवल बैंक खातों में जमा राशि का हिसाब रखना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि चंपत राय ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया और वह निर्दोष हैं। स्वामी गोविंद देव गिरी ने स्पष्ट किया कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे। एसआईटी की आगे की जांच कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी की सीमा तय करेगी और आगे की कानूनी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करेगी।
