दमोह में बाढ़: उफ़नती नदियों ने ग्रामीण जीवन किया पंगु
मध्य प्रदेश के दमोह जिले में रिकॉर्ड मॉनसून बारिश से गंभीर बाढ़ आई है। कई ग्रामीण इलाके मुख्य सड़कों से कट गए हैं।

मुख्य सारांश
क्या हुआ: रिकॉर्ड मॉनसून बारिश ने मध्य प्रदेश के दमोह जिले में गंभीर बाढ़ ला दी है और कई ग्रामीण इलाकों का संपर्क मुख्य सड़कों से कट गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है: स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी आवश्यक सेवाएं दुर्गम हो गई हैं, जिससे ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।
क्या बदला: मुख्य सड़कों तक पहुंच बंद हो गई है, जिससे दैनिक जीवन, रोजगार और आपातकालीन चिकित्सा परिवहन बाधित हो रहा है।
कौन प्रभावित: हजारों ग्रामीण, जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शामिल हैं, दैनिक आवागमन और आपातकालीन स्थितियों से जूझ रहे हैं।
दमोह में मॉनसून का कहर
मध्य प्रदेश का दमोह जिला मॉनसून की पहली मार झेल रहा है, जिसने रिकॉर्ड तोड़ बारिश कराई है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, नदियां और नाले उफान पर हैं। निचले इलाके और कई शहरी कॉलोनियां जलमग्न हो गई हैं। सबसे गंभीर असर ग्रामीण इलाकों में देखा जा रहा है, जहां मुख्य सड़कों से संपर्क कट गया है। जनपद जबेरा की बनवार-घटगेरा मुख्य मार्ग पर स्थित घुटकुआं पुलिया ग्रामीणों के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है।
जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे ग्रामीण
लगातार बारिश के कारण घुटकुआं पुलिया पूरी तरह डूब गई है, जिसके चलते तेज बहाव के कारण वाहनों का आवागमन लंबे समय से बंद है। इससे आसपास के गांवों के लोगों को अपने दैनिक जीवन, रोजगार, शिक्षा और चिकित्सा संबंधी जरूरतों के लिए आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है। स्थानीय निवासी पुलिया को पार करने के लिए जान जोखिम में डालकर तेज पानी के बहाव से जूझने को मजबूर हैं। एक निवासी रामलाल गोंड ने बताया कि घुटकुआं पुलिया हर साल डूबती है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। उन्होंने ऐसे समय में मरीजों या गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने की गंभीर समस्या पर प्रकाश डाला।
आपातकालीन सेवाओं के लिए आवागमन बेहद सीमित
सुरक्षित रास्ते की कमी के कारण आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। गंभीर परिस्थितियों में, लोगों को लंबे वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ता है, जिसमें कभी-कभी दमोह जिला मुख्यालय तक ट्रेन यात्रा भी शामिल होती है। इस साल लगातार दो दिनों की बारिश के कारण पुलिया पर पानी बहने लगा, जिससे ग्रामीणों का आवागमन लगभग पूरी तरह से थम गया। यह समस्या सिर्फ स्थानीय ग्रामीणों तक ही सीमित नहीं है। घटगेरा रेलवे स्टेशन पर पहुंचने वाले यात्रियों को भी अपने गांवों तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्टेशन से गांव तक का रास्ता उसी पुलिया से होकर गुजरता है, जहां लगभग तीन फीट की ऊंचाई से पानी बह रहा है।
स्थायी समाधान की मांगें अनसुनी
यात्री अपने सामान को उठाकर तेज बहाव के बीच पैदल चलने को मजबूर हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी इस खतरनाक रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना का लगातार डर बना रहता है। ग्रामीण अफसोस जताते हैं कि मॉनसून में यह स्थिति हर साल आती है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान लागू नहीं किया गया है। इस स्थान पर पुल के निर्माण की मांगें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कई बार उठाई जा चुकी हैं, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। इस जगह पर एक ऊंचा और स्थायी पुल हजारों ग्रामीणों की वार्षिक पीड़ा को कम कर सकता है।
व्यापक असर और प्रशासन की चेतावनी
दमोह जिले में लगातार हो रही बारिश का असर अन्य इलाकों में भी पड़ रहा है, घरों में पानी भर गया है और सड़कों पर जलभराव के कारण सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासन ने जनता से आग्रह किया है कि उफनती हुई नालियों, पुलों और पुलियों को पार करने का प्रयास न करें और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करें। बारिश जारी है, और मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में भारी बारिश की भविष्यवाणी की है। इसका मतलब है कि घुटकुआं पुलिया और जिले के अन्य संवेदनशील इलाकों में खतरा बना हुआ है। निवासियों को उम्मीद है कि मॉनसून में हर बार उनकी जान जोखिम में न पड़े, इसके लिए शीघ्र वैकल्पिक व्यवस्थाएं और बहुप्रतीक्षित पुल निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
