अल नीनो के खतरे से निपटने के लिए भारत की तैयारी: सूखा प्रबंधन योजना तैयार
भारत सरकार ने अल नीनो के संभावित प्रभावों से निपटने के लिए 197 संवेदनशील जिलों की पहचान की है और आपातकालीन कार्य योजना बनाई है।

अल नीनो की तैयारी: एक राष्ट्रीय प्राथमिकता
क्या हुआ: भारतीय सरकार ने अल नीनो के संभावित प्रभावों से निपटने के लिए 197 संवेदनशील जिलों की पहचान की है और एक व्यापक आपातकालीन कार्य योजना विकसित की है। इसका मुख्य ध्यान कम बारिश और सूखे के असर को कम करने पर है।
क्यों महत्वपूर्ण है: अल नीनो के कारण मानसून की बारिश सामान्य से कम हो सकती है, जिससे भारत भर में कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका पर खतरा मंडराता है। इस सक्रिय दृष्टिकोण का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक व्यवधान को कम करना है।
क्या बदलाव होंगे: किसानों को कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, साथ ही बीजों की उपलब्धता और तकनीकी सलाह बढ़ाई जाएगी। जल संरक्षण उपाय और पशुधन सहायता भी योजना के प्रमुख घटक हैं।
कौन प्रभावित होगा: इस तैयारी योजना का मुख्य ध्यान उन 197 चिन्हित संवेदनशील जिलों के किसान, कृषि समुदाय और कृषि क्षेत्र पर निर्भर व्यापक आबादी पर है।
केंद्र ने व्यापक कार्य योजना लागू की
भारतीय सरकार इस साल अल नीनो के संभावित प्रभावों को लेकर हाई अलर्ट पर है। कृषि पर कम बारिश और संभावित सूखे की स्थिति के प्रभावों को कम करने के लिए, देश भर के 197 संवेदनशील जिलों के लिए एक व्यापक आपातकालीन कार्य योजना तैयार की गई है। इसका प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मानसून कमजोर होने या बारिश में कमी का किसानों और कृषि क्षेत्र पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय इन तैयारियों की सक्रिय रूप से निगरानी कर रहा है।
नियमित समीक्षा और राज्य समन्वय
कृषि मंत्री की अध्यक्षता में सप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों में राज्यों की तैयारियों, बारिश की स्थिति, फसल की प्रगति और संसाधनों की उपलब्धता का आकलन किया जाता है। राज्यों को संभावित सूखे की स्थितियों के लिए तैयार रहने और तुरंत राहत उपाय लागू करने का आग्रह किया गया है। चिन्हित जिलों में कृषि, मौसम विज्ञान, जल संसाधन विभागों और स्थानीय प्रशासनों के बीच मजबूत समन्वय पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह सुनिश्चित करता है कि आने वाली चुनौतियों का समय पर समाधान करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
जल-कुशल कृषि को बढ़ावा
राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि मानसून प्रभावित होता है तो किसानों को पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर सोचने के लिए प्रोत्साहित करें। कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देना एक प्रमुख रणनीति है। इसमें पर्याप्त वैकल्पिक बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और सक्रिय बीज वितरण केंद्रों को बनाए रखना शामिल है। किसानों को बदलती परिस्थितियों के अनुकूल होने के लिए समय पर तकनीकी सलाह मिलेगी। सरकार किसानों को जरूरत पड़ने पर प्रमाणित बीज आसानी से उपलब्ध कराने के लिए बीज भंडारण और वितरण प्रणालियों को मजबूत करने को प्राथमिकता दे रही है।
जल संरक्षण और आधुनिक तकनीकें
जल संरक्षण कार्य योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्यों को तालाबों, जलाशयों और अन्य जल स्रोतों के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देने की सलाह दी जाती है। न्यूनतम जल उपयोग के साथ अधिकतम उपज सुनिश्चित करने के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को वर्षा जल संचयन और मृदा नमी संरक्षण तकनीकों को लागू करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इस समग्र दृष्टिकोण का उद्देश्य जल की कमी के खिलाफ लचीलापन बनाना है।
संबद्ध क्षेत्रों के लिए समर्थन
योजना में पशुपालन क्षेत्र को भी शामिल किया गया है, जिसमें चारे की उपलब्धता, पेयजल और पशु स्वास्थ्य तैयारियों की समीक्षा शामिल है। यदि सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो पशुधन की सुरक्षा के लिए चारे के भंडारण और आपूर्ति की विशेष व्यवस्था की जाएगी। सरकार ने कहा है कि मौसम के पूर्वानुमानों की लगातार निगरानी की जा रही है, और भारत मौसम विज्ञान विभाग से मिली जानकारी के आधार पर राज्यों को समय पर सलाह दी जाएगी। यदि किसी क्षेत्र में सामान्य से काफी कम बारिश होती है, तो नुकसान को कम करने के लिए तत्काल आकस्मिक कृषि योजना लागू की जाएगी। विशेषज्ञों का जोर है कि समय पर तैयारी, जिसमें बीज, वैकल्पिक फसलें, जल प्रबंधन और प्रशासनिक समन्वय शामिल हैं, अल नीनो के कारण होने वाले महत्वपूर्ण नुकसान से कृषि क्षेत्र की रक्षा करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
आगे क्या देखें
सरकार मौसम के पैटर्न की निगरानी करना जारी रखेगी और राज्यों को सलाह जारी करती रहेगी। 197 जिलों में लागू की गई आकस्मिक योजनाओं की प्रभावशीलता पर बारीकी से नजर रखी जाएगी, खासकर जैसे-जैसे मानसून का मौसम आगे बढ़ेगा।
