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राजगढ़ कुआं हादसा: कांग्रेस नेता की मां, पत्नी की मौत; नया खोदा गया ढांचा धंसा

राजगढ़ के बामनगांव में 17 जून को एक नवनिर्मित कुआं अचानक धंस गया, जिसमें कांग्रेस नेता मुकेश डांगी की मां और पत्नी फंसकर मर गईं।

Jun 20
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राजगढ़ कुआं हादसा: कांग्रेस नेता की मां, पत्नी की मौत; नया खोदा गया ढांचा धंसा

मुख्य सारांश

  • क्या हुआ: राजगढ़ के बामनगांव में 17 जून को एक नवनिर्मित कुआं अचानक धंस गया, जिसमें कांग्रेस नेता मुकेश डांगी की मां और पत्नी फंसकर मर गईं।
  • यह क्यों मायने रखता है: यह दुखद दुर्घटना निर्माण से जुड़े जोखिमों को उजागर करती है, जिसने एक प्रमुख स्थानीय परिवार को तबाह कर दिया और तीन छोटे बच्चों को मांविहीन कर दिया।
  • क्या बदला: बामनगांव गांव गहरे शोक में डूबा हुआ है, समुदाय में सन्नाटा पसरा हुआ है क्योंकि वे दो प्रिय महिलाओं के अचानक हुए नुकसान से जूझ रहे हैं।
  • कौन प्रभावित है: कांग्रेस नेता मुकेश डांगी, उनके तीन छोटे बच्चे और पूरा बामनगांव समुदाय इस दोहरी त्रासदी से बहुत प्रभावित हुए हैं।

बामनगांव में त्रासदी

17 जून को एक विनाशकारी घटना में, राजगढ़ के बामनगांव में एक नवनिर्मित कुआं धंस गया, जिसमें दो महिलाओं की जान चली गई। मृतकों में स्थानीय कांग्रेस नेता और जनपद सदस्य मुकेश डांगी की मां रूपा बाई डांगी (52) और उनकी पत्नी प्रियंका उर्फ पिंकी डांगी (30) शामिल थीं। बताया गया है कि कुएं के निर्माण के बाद दोनों उसके आसपास सफाई कर रही थीं, तभी ढांचा अचानक धंस गया और वे टन मिट्टी के नीचे दब गईं। इस दुर्घटना ने पूरे गांव को गहरे सदमे और दुख में डुबो दिया है।

एक दिल दहला देने वाली खोज

मुकेश डांगी ने उन भयावह पलों को याद करते हुए बताया कि कैसे उनकी चाची द्वारा सूचित किए जाने के बाद उन्होंने अपनी मां और पत्नी को ढूंढने के लिए frantic search किया। उन्होंने भावुक होकर कहा,

"जब मैं कुएं पर पहुंचा, तो ऐसा लगा जैसे वहां कभी कुआं था ही नहीं।"
वह उन्हें लगातार आवाज लगाते रहे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। धंसे हुए कुएं का दृश्य, जिसने उसे जमीन में एक मात्र indent (गड्ढे) में बदल दिया था, ने परिवार को तोड़ दिया।

छह घंटे का बचाव अभियान

व्यापक बचाव अभियान दोपहर 1:30 बजे के आसपास शुरू हुआ, जिसमें चार जेसीबी और तीन पोकलेन मशीनों का उपयोग किया गया। प्रशासन, पुलिस और राजस्व विभाग की टीमों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर लगभग छह घंटे तक अथक प्रयास किया। खुदाई का काम शाम 7 बजे तक जारी रहा। मिट्टी के हर ढेर के हटने के साथ उन्हें जीवित पाने की शुरुआती उम्मीदों के बावजूद, शाम होते-होते grim reality सामने आ गई। रूपा बाई का शव सबसे पहले शाम 5:30 बजे लगभग 12 फीट की गहराई से निकाला गया। बाद में, प्रियंका का शव शाम 6:45 बजे 20 फीट की गहराई पर दबा हुआ पाया गया।

अंतिम बातचीत और अनछुए भोजन

मुकेश डांगी ने अपनी मां के साथ अपनी अंतिम बातचीत की दुखद याद साझा की। उन्होंने उस सुबह उनसे मजदूरों और कारीगरों के लिए खेत में खाना लाने को कहा था। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी। महिलाएं सुबह 11 बजे के आसपास दो टिफिन और आम लेकर खेत पहुंचीं। मुकेश, मजदूरों और एक कारीगर के साथ, लगभग 300 मीटर दूर एक खेजड़ी के पेड़ के नीचे खाने चले गए, जबकि उनकी मां और पत्नी कुएं के पास रहीं। दुखद रूप से, उनकी मां और पत्नी के लिए पैक किए गए टिफिन, साथ ही रूपा बाई ने अपने बेटे के लिए सावधानी से लपेटे हुए आम भी बाद में बिना छुए पाए गए। साझा भोजन के लिए रखे गए भोजन को तीन दिनों तक सूख गया था, जो अचानक हुई इस क्षति का एक मार्मिक प्रतीक था।

नवनिर्मित कुआं

जो कुआं धंसा था, वह एक पुरानी संरचना थी जिसका लगभग 15 दिनों से reconstruction (पुनर्निर्माण) किया जा रहा था ताकि उसे स्थायी बनाया जा सके। इसमें महत्वपूर्ण संसाधन लगाए गए थे, जिसमें लगभग 5 क्विंटल सरिया, 100 बोरी सीमेंट, साथ ही रेत और बजरी शामिल थी। मंगलवार तक निर्माण लगभग पूरा हो चुका था, जिसमें नारंगी के पेड़ों की सिंचाई के लिए नए कुएं को भरने के लिए रातोंरात एक channel (नाली) खोदी गई थी और पाइप बिछाए गए थे। बताया गया है कि महिलाएं इस नए मजबूत ढांचे के आसपास की सफाई कर रही थीं, तभी वह धंस गया।

मां-बेटी जैसा रिश्ता

ग्राम सरपंच पूनम डांगी ने मृतकाओं के बीच के असाधारण बंधन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा,

"रूपा बाई और प्रियंका सास-बहू से ज्यादा मां-बेटी जैसा रिश्ता साझा करती थीं। दोनों घर के और खेत के अधिकांश काम एक साथ करती थीं।"
ग्रामीणों का अनुमान है कि प्रियंका, कुएं के करीब होने के कारण, शायद पहले धंसना शुरू हुई होंगी, जिससे रूपा बाई उनकी मदद के लिए दौड़ पड़ी होंगी, और अंततः उनके साथ ही दब गईं।

तीन बच्चे मांविहीन हुए

इस त्रासदी ने मुकेश डांगी के परिवार को तोड़ दिया है। उन्होंने एक ही दिन अपनी मां और पत्नी दोनों को खो दिया। उनके तीन छोटे बच्चे— 11 साल की बेटी सपना, 4 साल की शारदा और 2 साल का बेटा मितंश—अब मां के बिना हैं। मुकेश अपने छोटे बेटे मितंश को अपनी मां की तस्वीरें दिखाते हुए देखे गए, जो अभी भी अपनी मां के लौटने की उम्मीद करता है। बामनगांव में धंसा हुआ कुआं मलबे के नीचे दबी खुशियों की एक स्पष्ट याद दिलाता है।

आगे क्या देखें

बामनगांव समुदाय इस गहरे नुकसान का शोक मना रहा है, ग्रामीण रूपा बाई और प्रियंका द्वारा छोड़ी गई अचानक खाली जगह से जूझ रहे हैं। आगामी महीनों में मुकेश डांगी और उनके तीन छोटे बच्चों को इस अकल्पनीय त्रासदी से उबरने में सहायता करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि उन्हें आवश्यक देखभाल और सहायता मिल सके।