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अधूरा इलाज बन रहा जानलेवा: शहर में ‘डबल निमोनिया’ के मामलों में तेज़ उछाल, अस्पतालों पर बढ़ा दबाव

डॉक्टरों ने निमोनिया के इलाज को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं का पूरा कोर्स न करने से बीमारी...

Dec 28
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अधूरा इलाज बन रहा जानलेवा: शहर में ‘डबल निमोनिया’ के मामलों में तेज़ उछाल, अस्पतालों पर बढ़ा दबाव

डॉक्टरों ने निमोनिया के इलाज को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं का पूरा कोर्स न करने से बीमारी दोबारा उभर रही है और कई मामलों में यह द्विपक्षीय निमोनिया (बाइलेटरल या डबल निमोनिया) का रूप ले रही है, जो जानलेवा साबित हो सकता है—even उन मरीजों में भी जिनका पहले कोई गंभीर मेडिकल इतिहास नहीं रहा है।

क्या है डबल निमोनिया और क्यों है ज्यादा खतरनाक

सामान्य निमोनिया में जहां संक्रमण एक फेफड़े को प्रभावित करता है, वहीं डबल निमोनिया में दोनों फेफड़े एक साथ सूज जाते हैं। इससे फेफड़ों की एयर सैक्स में तरल या मवाद भर जाता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होती है।
डॉक्टरों के अनुसार कई मरीजों में ऑक्सीजन सैचुरेशन 80 प्रतिशत से नीचे तक गिर रहा है, जिससे उन्हें कृत्रिम ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ रहा है। इसका सीधा असर अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत और आईसीयू संसाधनों पर पड़ रहा है।

मौसम और प्रदूषण ने बढ़ाई परेशानी

शहर में तेज़ ठंड, लगातार कोहरा और बढ़ता वायु प्रदूषण श्वसन रोगों के मामलों को और बढ़ा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों—खासतौर पर हमीदिया अस्पताल—में ओपीडी में करीब 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
टीबी अस्पताल से लेकर एम्स भोपाल तक के पल्मोनरी वार्ड मरीजों से भरे हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि ओपीडी के अनुपात में भर्ती मरीजों की संख्या बढ़ने से बिस्तरों की कमी महसूस की जा रही है।

विशेषज्ञों की राय

गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) के टीबी एवं चेस्ट मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. निशांत श्रीवास्तव ने बताया कि सर्दियों में श्वसन संक्रमण आम बात है, लेकिन इस बार संक्रमण की तीव्रता ज्यादा गंभीर देखी जा रही है।
उनके मुताबिक, दमा (अस्थमा), सीओपीडी या अन्य पुरानी बीमारियों से जूझ रहे मरीज तो जोखिम में हैं ही, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ लोगों में भी गंभीर निमोनिया के मामले सामने आ रहे हैं।

इलाज अधूरा छोड़ना सबसे बड़ी वजह

डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि मरीजों द्वारा दवाओं का पूरा कोर्स न करना इस गंभीर स्थिति की एक प्रमुख वजह है। शुरुआती सुधार दिखते ही दवा बंद कर देना संक्रमण को पूरी तरह खत्म नहीं करता, जिससे बीमारी दोबारा और अधिक खतरनाक रूप में लौट आती है।

क्या करें, क्या न करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि:

  • निमोनिया या किसी भी श्वसन संक्रमण में डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं पूरी अवधि तक लें

  • ठंड और प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क का उपयोग करें

  • सांस लेने में दिक्कत, लगातार बुखार या ऑक्सीजन स्तर गिरने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें

क्यों अहम है यह चेतावनी

शहर के स्वास्थ्य ढांचे पर बढ़ता दबाव और गंभीर मामलों की संख्या यह संकेत देती है कि लापरवाही भारी पड़ सकती है। समय पर इलाज और मेडिकल सलाह का पालन न सिर्फ व्यक्तिगत जीवन बचाता है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर बोझ को भी कम करता है।