“मेरी मंज़ूरी के बिना उनके पास कुछ नहीं” यूक्रेन शांति योजना पर ट्रंप का सख़्त संदेश, ज़ेलेंस्की से मुलाक़ात से पहले बढ़ा दबाव
वॉशिंगटन/नई दिल्ली:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को लेकर प्रस्तावित शांति पहल पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका की स्वीकृति के...

वॉशिंगटन/नई दिल्ली:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को लेकर प्रस्तावित शांति पहल पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका की स्वीकृति के बिना यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की योजनाओं का कोई वास्तविक प्रभाव नहीं होगा। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब ज़ेलेंस्की अमेरिका दौरे के दौरान ट्रंप से मुलाक़ात कर एक नया शांति फ्रेमवर्क पेश करने की तैयारी में हैं।
ट्रंप का बयान: समर्थन ही असली ताक़त
शुक्रवार को प्रकाशित Politico को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन की किसी भी शांति पहल की सफलता वॉशिंगटन के समर्थन पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि जब तक वे किसी प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं देते, तब तक ज़ेलेंस्की के पास आगे बढ़ने के लिए ठोस आधार नहीं है।
हालांकि, ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि बातचीत के दरवाज़े बंद नहीं हैं और चर्चा से संभावनाएं निकल सकती हैं।
ज़ेलेंस्की का 20-सूत्रीय शांति प्लान
यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के रविवार को फ्लोरिडा में ट्रंप से मिलने की उम्मीद है। उनके प्रस्तावित 20-पॉइंट शांति प्लान में संघर्ष क्षेत्रों में डी-मिलिटराइज़्ड ज़ोन और युद्धविराम की रूपरेखा शामिल बताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, इस बातचीत का मुख्य फोकस यूक्रेन के लिए अमेरिकी सुरक्षा गारंटी और भविष्य के सैन्य-सहयोग पर रहेगा।
ट्रंप की सतर्कता, कोई त्वरित समर्थन नहीं
ट्रंप ने संकेत दिया कि वे कीव के नए प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पूरी जानकारी और विवरण देखे बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी।
राजनयिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रुख ट्रंप की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वे अमेरिका की सौदेबाज़ी की स्थिति मज़बूत रखना चाहते हैं।
रूस और पुतिन पर भी संकेत
इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी कहा कि प्रस्तावित बातचीत रूस के लिए भी लाभकारी हो सकती है। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से जल्द बातचीत की संभावना जताई और कहा कि संतुलित समझौता सभी पक्षों के हित में हो सकता है।
बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियां
यह बयान ज़ेलेंस्की की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के साथ सकारात्मक बातचीत की बात कही थी। इससे संकेत मिलता है कि पर्दे के पीछे कूटनीतिक प्रयास तेज़ हो चुके हैं।
इसी बीच, ट्रंप ने नाइजीरिया में ISIS ठिकानों पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों का भी ज़िक्र किया और कहा कि ये हमले चरमपंथी हिंसा के जवाब में किए गए। उन्होंने बताया कि प्रतीकात्मक कारणों से उन्होंने इन हमलों में एक दिन की देरी का फैसला खुद लिया।
नेतन्याहू की भी संभावित मौजूदगी
ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस वीकेंड ज़ेलेंस्की के साथ उनसे मुलाक़ात कर सकते हैं। इससे मध्य-पूर्व और यूरोप—दोनों मोर्चों पर अमेरिकी कूटनीति के एक साथ सक्रिय होने के संकेत मिलते हैं।
क्यों अहम है यह बयान
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का यह बयान यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की निर्णायक भूमिका को फिर से रेखांकित करता है। इससे यह भी साफ़ होता है कि भविष्य की शांति वार्ताएं केवल कीव और मॉस्को के बीच नहीं, बल्कि वॉशिंगटन की शर्तों के इर्द-गिर्द आकार लेंगी। इसका असर वैश्विक सुरक्षा संतुलन और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ सकता है।
