भारत और नेपाल ने यूपीआई लिंक और पुनर्निर्माण परियोजनाओं के साथ द्विपक्षीय संबंधों को दी मजबूती
भारत और नेपाल ने वित्तीय एकीकरण को बढ़ावा देते हुए यूपीआई-एनपीआई रेमिटेंस लिंक लॉन्च किया और 84 पुनर्निर्माण परियोजनाएं सौंपी हैं।
मुख्य सारांश
- क्या हुआ: भारत और नेपाल ने यूपीआई-एनपीआई (UPI-NPI) रेमिटेंस लिंक लॉन्च किया, एक डिजिटल अनुवाद प्लेटफॉर्म समझौते पर हस्ताक्षर किए और 84 पुनर्निर्माण परियोजनाएं सौंपीं।
- यह क्यों महत्वपूर्ण है: यह सहयोग वित्तीय एकीकरण को गहरा करता है, भूकंप के बाद के पुनर्निर्माण में मदद करता है और द्विपक्षीय सीमाओं को सुरक्षित बनाता है।
- क्या बदलाव आएगा: नागरिक अब आसानी से सीमा पार पैसे भेज सकेंगे, जबकि डिजिटल बुनियादी ढांचा स्थानीय वॉयस ट्रांसलेशन सिस्टम बनाने में मदद करेगा।
- कौन प्रभावित होगा: भारत और नेपाल दोनों देशों के लोग, स्टार्टअप, यात्री और व्यवसायी।
डिजिटल और वित्तीय कनेक्टिविटी का विस्तार
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा के लिए नई दिल्ली में अपने नेपाली समकक्ष शिशिर खनाल से मुलाकात की।
दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से भारत के यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) और नेपाल के नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस (NPI) के बीच लिंक लॉन्च किया। यह महत्वपूर्ण डिजिटल मील का पत्थर सीमा पार व्यक्तिगत रेमिटेंस (पैसे भेजने) को तेज और सुरक्षित बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इसके अलावा, दोनों नेताओं की उपस्थिति में डिजिटल इंडिया भाषिणी और काठमांडू विश्वविद्यालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान हुआ। यह सहयोग नेपाल के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए 'वॉयस फर्स्ट' भाषा अनुवाद प्लेटफॉर्म के लिए राष्ट्रीय डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार करेगा। इसका उद्देश्य स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल क्षमता निर्माण जैसे नए क्षेत्रों को लक्षित करना है।
भूकंप के बाद पुनर्निर्माण और विकास सहयोग
बैठक के दौरान, डॉ. जयशंकर ने वर्चुअल माध्यम से नेपाल को 72 स्वास्थ्य सुविधाएं और 12 सांस्कृतिक विरासत परियोजनाएं सौंपीं। ये पहल 2015 के भूकंप के बाद के पुनर्निर्माण कार्यक्रम के तहत बनाई गई थीं, जो भारत के विकासात्मक सहयोग का प्रतीक हैं।
विदेश मंत्री ने दोनों देशों के नागरिकों की आपसी प्रगति, समृद्धि और भलाई के लिए नेपाल के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने नेपाल सरकार के लक्ष्यों और भारत की पड़ोसी देशों से जुड़ी पहलों के बीच मजबूत समानता पर प्रकाश डाला।
डॉ. जयशंकर के अनुसार, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध कई क्षेत्रों में लगातार विकसित हुए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- व्यापार और वाणिज्य
- निवेश और ऊर्जा, विशेष रूप से जलविद्युत विकास
- विकास सहयोग और क्षमता निर्माण
- शिक्षा, आपदा प्रबंधन और संस्कृति
- खेल
साझा विरासत और सीमा सुरक्षा
अपने संबोधन में विदेश मंत्री जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और नेपाल अपनी लंबी और अनोखी खुली सीमा पर सुरक्षा बनाए रखने के लिए मिलकर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि जीवंत जन-जन के संबंधों और साझा सांस्कृतिक व धार्मिक परंपराओं के बल पर दोनों देश जरूरत के समय हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं।
नेपाली मंत्री खनाल ने भी इसी गर्मजोशी का जवाब देते हुए कहा कि भारत नेपाल का सबसे महत्वपूर्ण भागीदार है और नेपाल भारत के साथ अपने संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
"नेपाल और भारत केवल दो देश नहीं हैं, बल्कि एक गौरवशाली प्राचीन सभ्यता के हितधारक हैं।"
नेपाल के विदेश मंत्री ने चल रहे पश्चिम एशिया संकट के बीच ईंधन और उर्वरकों की महत्वपूर्ण आपूर्ति के लिए भारत का आभार भी व्यक्त किया, जो मजबूत रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित करता है।
आगे क्या उम्मीद करें
आगे बढ़ते हुए, यूपीआई-एनपीआई लिंक के लागू होने से दोनों देशों के बीच रेमिटेंस (पैसों के लेन-देन) का प्रवाह काफी आसान होने की उम्मीद है। विश्लेषकों की नजरें 'वॉयस फर्स्ट' ट्रांसलेशन प्लेटफॉर्म के विकास और जलविद्युत, स्टार्टअप तथा नवीकरणीय ऊर्जा में भविष्य के सहयोग पर भी रहेंगी।
