जम्मू-कश्मीर पर टिप्पणी को लेकर संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ा
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने पर पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है और इसे अपना आंतरिक मामला बताया है।

मुख्य बिंदु (Top Summary)
- क्या हुआ: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान जम्मू और कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है।
- यह क्यों महत्वपूर्ण है: भारत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता एक बड़ी जिम्मेदारी है, न कि दूसरों के खिलाफ झूठा और मनगढ़ंत प्रचार करने का कोई मंच।
- क्या बदलाव आएगा: यह घटनाक्रम वैश्विक मंच पर अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता को लेकर भारत के कड़े और स्पष्ट राजनयिक रुख को फिर से दर्शाता है।
- कौन प्रभावित है: इससे भारत और पाकिस्तान के राजनयिक प्रतिनिधिमंडलों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्य देश प्रभावित होंगे।
यूएनएससी में भारत ने पाकिस्तान के बयानों को खारिज किया
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर का अनुचित संदर्भ देने पर पाकिस्तान की तीखी आलोचना की है। 5 जून 2026 को सुरक्षा परिषद की बैठक में बोलते हुए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने वर्तमान गैर-स्थायी सदस्य पाकिस्तान को करारा जवाब दिया।
झूठे बयानों के लिए नहीं है सुरक्षा परिषद का मंच
भारत ने जोर देकर कहा कि इस वैश्विक संस्था में सीट हासिल करना एक बड़ी जिम्मेदारी के साथ आता है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए। भारतीय प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि इस परिषद का दुरुपयोग राजनीतिक बयानबाजी के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भारत के अनुसार, यह मंच अन्य संप्रभु राष्ट्रों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण और झूठे एजेंडे फैलाने के लिए नहीं है।
जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला
राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने इस मुद्दे पर भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि जम्मू और कश्मीर पूरी तरह से भारत का आंतरिक हिस्सा है।
"भारत के आंतरिक मामले, यानी केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर का पाकिस्तान द्वारा अनुचित उल्लेख किए जाने के कारण मुझे इसका जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा है।"
इस तीखी प्रतिक्रिया से अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों पड़ोसी देशों के बीच चल रहे राजनयिक तनाव का पता चलता है।
आगे क्या होगा?
अब विश्लेषक इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या पाकिस्तान अपने गैर-स्थायी सदस्य के मौजूदा कार्यकाल के दौरान यूएनएससी में ऐसे द्विपक्षीय मुद्दों को उठाना जारी रखता है। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि वैश्विक चर्चाओं में देश के आंतरिक मामलों को घसीटने की किसी भी कोशिश का भारत आगे कैसे मुकाबला करता है।
