भोपाल में मतदाता सूची की बड़ी छंटनी: हर चौथा नाम हटाया गया, सियासी हलकों में बढ़ी हलचल
मध्य प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी मतदाता सूची कटौती के मामलों में से एक सामने आया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन—SIR)...

मध्य प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी मतदाता सूची कटौती के मामलों में से एक सामने आया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन—SIR) के पहले चरण के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में भोपाल मध्य और भोपाल दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों के लगभग हर चौथे मतदाता का नाम हटा दिया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल मध्य में 27.56% और भोपाल दक्षिण-पश्चिम में 27.09% मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं, जो भोपाल जिले की सात विधानसभा सीटों में सबसे अधिक है।
जिलेभर में 20% से ज्यादा मतदाता कम
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा मंगलवार को जारी ड्राफ्ट रोल के अनुसार, पूरे भोपाल जिले में कुल 4.38 लाख नाम हटाए गए हैं। यह जिले के कुल मतदाताओं का 20.64% हिस्सा है। अक्टूबर 27, 2025 तक जहां जिले में 21.25 लाख पंजीकृत मतदाता थे, वहीं 23 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर 16.87 लाख रह गई।
क्यों हुई इतनी बड़ी कटौती?
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया SIR के तहत किए गए घर-घर सत्यापन का नतीजा है। इसमें मृत मतदाता, स्थायी रूप से स्थानांतरित लोग, सत्यापन के दौरान अनुपस्थित पाए गए व्यक्ति, डुप्लिकेट प्रविष्टियां और अन्य अपात्र मामले चिह्नित किए गए।
आंकड़ों के मुताबिक, सबसे अधिक नाम स्थायी रूप से स्थान बदल चुके मतदाताओं के पाए गए हैं—इनकी संख्या 2.86 लाख से अधिक है। इसके अलावा 33,791 मृत मतदाता, एक लाख से ज्यादा अनुपस्थित मतदाता और 14,000 से अधिक डुप्लिकेट एंट्री चिन्हित की गईं।
कौन-से इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित
संख्या के लिहाज से गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 97,052 नाम हटाए गए, इसके बाद नरेला (81,235) और भोपाल मध्य (67,304) का स्थान रहा। प्रतिशत के आधार पर भी नरेला (22.89%), गोविंदपुरा (24.15%) और भोपाल उत्तर (20.45%) में बड़ी छंटनी हुई। इसके उलट, बेरसिया विधानसभा क्षेत्र में केवल 5.08% नाम हटाए गए, जो जिले में सबसे कम है।
शहरी पलायन बना बड़ी वजह
भोपाल मध्य के निर्वाचन पंजीयन अधिकारी (ERO) दीपक पांडेय ने एक राष्ट्रीय अखबार से बातचीत में बताया कि प्रतिशत के लिहाज से भोपाल मध्य में सबसे अधिक नाम हटाए जाना असामान्य जरूर है, लेकिन इसके पीछे ठोस कारण हैं। उनके अनुसार, हटाए गए नामों में करीब 22% ऐसे मतदाताओं के हैं जो स्थायी रूप से शहर या क्षेत्र छोड़ चुके हैं।
उन्होंने बताया कि पुराने शहर के इलाकों में किराये के मकानों में रहने वाले लोगों का लगातार स्थान बदलना, शिवाजी नगर जैसे क्षेत्रों में सरकारी क्वार्टरों से कर्मचारियों के तबादले या सेवानिवृत्ति, और कुछ झुग्गी बस्तियों का स्थानांतरण—ये सभी कारण मतदाता सूची में भारी बदलाव की वजह बने।
‘नो-मैपिंग’ मतदाताओं को मिलेगा मौका
चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं का विवरण ‘सेल्फ या फैमिली मैपिंग’ के जरिए सत्यापित नहीं हो सका है, उन्हें बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के माध्यम से नोटिस भेजे जाएंगे। ऐसे मतदाताओं को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर अपने नाम वापस जोड़ने का अवसर मिलेगा।
आगे की प्रक्रिया और सियासी असर
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता सूची से जुड़े दावे और आपत्तियां 14 फरवरी 2026 तक स्वीकार की जाएंगी। इसके बाद 21 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
हालांकि अधिकारी इस पूरी कवायद को मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता के लिए जरूरी बता रहे हैं, लेकिन भोपाल के शहरी और मुख्य विधानसभा क्षेत्रों में इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने से राजनीतिक दल सतर्क हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता आधार में आई इस तेज गिरावट का आगामी चुनावों में मतदान प्रतिशत और चुनावी समीकरणों पर गहरा असर पड़ सकता है।
