राहुल गांधी का आरोप: “संविधान को खत्म करने की सोच में भाजपा”, लोकतंत्र की रक्षा के लिए संगठित प्रतिरोध का दावा
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर संविधान के मूल विचारों को कमजोर करने का गंभीर आरोप...

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर संविधान के मूल विचारों को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। जर्मनी के बर्लिन स्थित हर्टी स्कूल में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति समानता, संघीय ढांचे और नागरिकों के समान अधिकारों की भावना को खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विपक्ष इस चुनौती का सामना करने के लिए एक प्रभावी और संगठित प्रतिरोध प्रणाली तैयार करेगा।
“संविधान की आत्मा पर हमला”
कांग्रेस द्वारा सोमवार (22 दिसंबर 2025) को जारी लगभग एक घंटे के वीडियो में राहुल गांधी ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान महत्व देता है, चाहे वह राज्य हो, भाषा हो या धर्म। उनके मुताबिक, भाजपा की नीतियां इसी मूल भावना को कमजोर कर रही हैं।
उन्होंने छात्रों से बातचीत में कहा कि भारत जैसी दुनिया की सबसे बड़ी और जटिल लोकतांत्रिक व्यवस्था केवल राष्ट्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक महत्व की संपत्ति है। ऐसे में, भारतीय लोकतंत्र पर किसी भी तरह का आघात वैश्विक लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी चोट है।
संस्थानों पर “पूर्ण पैमाने पर कब्जे” का आरोप
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने देश की संस्थागत संरचना—जैसे चुनावी तंत्र और जांच एजेंसियों—को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास किया है।
उनका कहना था कि विपक्ष केवल चुनावों पर सवाल उठाकर नहीं रुकेगा, बल्कि लोकतांत्रिक ढांचे की रक्षा के लिए नए तरीके और रणनीतियां विकसित करेगा। उन्होंने इसे “भाजपा से नहीं, बल्कि संस्थानों पर उसके नियंत्रण से लड़ाई” बताया।
चुनावी निष्पक्षता पर सवाल
छात्रों के सवालों के जवाब में राहुल गांधी ने दावा किया कि कांग्रेस ने हरियाणा चुनाव “स्पष्ट रूप से जीता”, जबकि महाराष्ट्र के चुनावों को लेकर उन्होंने निष्पक्षता पर संदेह जताया।
उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया और संस्थागत कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंताएं हैं, जिन पर सार्वजनिक बहस जरूरी है।
जांच एजेंसियों के “राजनीतिक इस्तेमाल” का आरोप
राहुल गांधी ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इन संस्थानों का उपयोग विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस ने इन संस्थाओं को देश की सेवा के लिए खड़ा किया था, न कि किसी एक दल की संपत्ति के रूप में। उनके अनुसार, मामलों के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई कहीं अधिक है।
आर्थिक मॉडल और INDIA गठबंधन पर टिप्पणी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा मॉडल आगे बढ़ने की क्षमता खो चुका है।
INDIA गठबंधन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि गठबंधन के सभी दल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की वैचारिक सोच से सहमत नहीं हैं और इसी मुद्दे पर उनकी एकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि सहयोगी दलों के बीच रणनीतिक मतभेद होते हैं, लेकिन संसद में लोकतांत्रिक मूल्यों और विवादित कानूनों के विरोध में वे एकजुट रहते हैं।
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनावी पारदर्शिता और जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बहस तेज है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह की टिप्पणियां भारत की आंतरिक राजनीति को वैश्विक विमर्श से जोड़ती हैं और यह दर्शाती हैं कि देश की लोकतांत्रिक सेहत केवल घरेलू मुद्दा नहीं रह गई है।
निष्कर्ष:
जर्मनी दौरे के दौरान राहुल गांधी के बयान कांग्रेस की उस रणनीति की ओर इशारा करते हैं, जिसमें वह लोकतंत्र, संविधान और संस्थागत स्वतंत्रता को केंद्र में रखकर भाजपा को चुनौती देना चाहती है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह “प्रतिरोध की प्रणाली” राजनीतिक जमीन पर किस रूप में सामने आती है और इसका चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
