मानसून अलर्ट: आईएमडी ने घटाया पूर्वानुमान, भारत पर सूखे का खतरा
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मानसून का पूर्वानुमान घटाया। कमजोर मानसून से कृषि क्षेत्र, जल भंडार और अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
मुख्य बातें
क्या हुआ: आईएमडी ने मानसून के पूर्वानुमान को घटा दिया है, जिससे अपर्याप्त वर्षा (सूखे) की 60% संभावना है।
महत्व क्यों: कमजोर मानसून से कृषि क्षेत्र, जल भंडार, भूजल पुनर्भरण और जलविद्युत क्षमता को खतरा है।
क्या बदलाव: किसानों को सूखा-सहिष्णु फसलों का विकल्प चुनना पड़ सकता है; कई राज्यों के लिए लू की चेतावनी जारी की गई है।
कौन प्रभावित: किसान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, मानसून वर्षा पर निर्भर राज्य और समग्र भारतीय अर्थव्यवस्था।
मानसून में गिरावट: सूखे का खतरा मंडरा रहा है
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अपने मानसून पूर्वानुमान को कम कर दिया है। अब अपर्याप्त वर्षा की 60% संभावना है, जो संभावित सूखे के वर्ष का संकेत देता है। जून-सितंबर के मौसम के दौरान वर्षा लंबी अवधि के औसत (एलपीए) का 90% होने की संभावना है। अप्रैल में अनुमानित 92% से यह कमी है। यह स्थिति कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा है और जल संसाधनों और बिजली उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
अल नीनो का प्रभाव
आईएमडी ने पूर्वानुमान में गिरावट का कारण मजबूत अल नीनो स्थितियों के विकास की संभावना को बताया है। अल नीनो एक जलवायु संबंधी घटना है जिसकी विशेषता मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में गर्म पानी का होना है। आईएमडी प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि इस स्थिति के जून में कमजोर से जुलाई-अगस्त में मध्यम और सितंबर में मजबूत होने की उम्मीद है। यह पूरे बरसात के मौसम को प्रभावित करेगा।
"नवीनतम जलवायु मॉडल पूर्वानुमान बताते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम के दौरान अल नीनो की स्थिति विकसित होने की संभावना है।"
लू की चेतावनी और बुवाई में देरी
आईएमडी ने भारत के कई हिस्सों में जून में 'सामान्य से ऊपर' लू के दिनों की भी भविष्यवाणी की है। इसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी लू की स्थिति का अनुभव हो सकता है। हालांकि, राजस्थान और झारखंड में महीने के दौरान 'सामान्य से कम' लू के दिन का अनुभव हो सकता है। केरल में मानसून की संभावित देरी, अल नीनो प्रभाव के साथ मिलकर, बुवाई कार्यों में देरी कर सकती है। भारत के आधे से अधिक कृषि क्षेत्र वर्षा पर निर्भर है।
सरकार की तैयारी
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। सूखा-सहिष्णु फसलों को बढ़ावा देने और पर्याप्त इनपुट उपलब्धता सुनिश्चित करने सहित आकस्मिक उपाय किए गए हैं।
आकस्मिक उपायों में शामिल हैं:
- सूखा-सहिष्णु फसल किस्मों को बढ़ावा देना
- मौसम आधारित कृषि-सलाह सेवाएं
- कुशल जल प्रबंधन
- स्थान-विशिष्ट अनुकूलन रणनीतियाँ
चौहान ने राज्य सरकारों से चुनौतीपूर्ण मौसम की स्थिति के लिए तैयार रहने का आग्रह किया और उन्हें केंद्र सरकार के समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने बीज और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता की पुष्टि की।
"देश किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है और आकस्मिक उपायों के साथ तैयार है"
मानसून कोर जोन खतरे में
'मानसून कोर जोन', जिसमें मध्य और पश्चिमी भारत का अधिकांश भाग शामिल है, में 'सामान्य से कम' वर्षा होने की भविष्यवाणी की गई है। यह क्षेत्र कृषि कार्यों के लिए बारिश पर बहुत अधिक निर्भर है। इससे खरीफ फसलों के समग्र रकबे और उनके अंतिम उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना है।
पश्चिम एशिया संकट से मुश्किलें बढ़ीं
पश्चिम एशिया में संकट कृषि क्षेत्र पर और दबाव डालता है। यह डीजल और उर्वरक जैसे आवश्यक आदानों की उपलब्धता और लागत को प्रभावित करता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर और परिणामस्वरूप, भारत की समग्र अर्थव्यवस्था पर छाया पड़ती है।
आगे क्या देखें
अगले सात दिनों के भीतर केरल में वास्तविक मानसून की शुरुआत की तारीख पर नज़र रखें। साथ ही, राज्य सरकारों द्वारा आकस्मिक योजनाओं के कार्यान्वयन और मौसम बढ़ने के साथ फसल की पैदावार पर उनके प्रभाव पर भी नज़र रखें।
