BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
National

आवधपुरी में अधूरी सड़क बनी आफ़त: धूल, अंधेरा और हादसों के बीच फंसे रहवासी

कभी बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधा की उम्मीद जगाने वाला आवधपुरी क्षेत्र का सड़क निर्माण प्रोजेक्ट अब स्थानीय लोगों के लिए रोज़मर्रा की परेशानी और खतरे...

Dec 22
4 मिनट में पढ़ें
आवधपुरी में अधूरी सड़क बनी आफ़त: धूल, अंधेरा और हादसों के बीच फंसे रहवासी

कभी बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधा की उम्मीद जगाने वाला आवधपुरी क्षेत्र का सड़क निर्माण प्रोजेक्ट अब स्थानीय लोगों के लिए रोज़मर्रा की परेशानी और खतरे का कारण बन गया है। एसओएस से आवधपुरी त्रिसेक्शन तक प्रस्तावित सड़क का काम शुरू तो हुआ, लेकिन बीच में ही रुक जाने से इलाका धूल, असुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बनता जा रहा है।


काम शुरू, लेकिन पूरा होने का अता-पता नहीं

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, करीब एक महीने पहले सड़क निर्माण की शुरुआती प्रक्रिया शुरू की गई थी। पुरानी सड़क खोदकर नई परत के लिए गिट्टी बिछाई गई, लेकिन इसके बाद काम लगभग ठप पड़ गया। अधूरी सड़क पूरे इलाके में फैली हुई है, जिससे वाहन चालकों और पैदल चलने वालों—दोनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


धूल से बिगड़ती सेहत, बढ़ता प्रदूषण

अधूरी सड़क पर बिखरी गिट्टी और मिट्टी ने पूरे इलाके को धूल के गुबार में बदल दिया है। स्थानीय निवासी विनय गुप्ता का कहना है कि हर गुजरती गाड़ी के साथ धूल के बादल उठते हैं, जो घरों और दुकानों तक पहुंच रहे हैं।
उनके अनुसार, “लगातार धूल की वजह से लोगों को खांसी, आंखों में जलन और सांस से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं। यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला बन चुका है।”

विशेषज्ञों का भी मानना है कि लंबे समय तक धूल प्रदूषण से बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर गंभीर असर पड़ सकता है।


हादसों का खतरा, रात में हालात और बदतर

सड़क की ऊबड़-खाबड़ सतह और ढीली गिट्टी के कारण दोपहिया वाहन चालकों के लिए फिसलने का खतरा लगातार बना हुआ है। स्कूल जाने वाले बच्चों और पैदल यात्रियों के लिए भी यह रास्ता असुरक्षित हो गया है।
स्थानीय निवासी मयंक शर्मा के अनुसार, शाम ढलते ही स्थिति और गंभीर हो जाती है। “स्ट्रीटलाइट न होने के कारण अंधेरे में सड़क दिखती ही नहीं। वाहन चालकों को अंदाज़े से चलना पड़ता है, जिससे छोटी टक्कर और दुर्घटनाएं आम हो गई हैं,” उन्होंने बताया।


प्रशासनिक आश्वासन, लेकिन ज़मीन पर सन्नाटा

रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम और ठेकेदारों की ओर से कई बार काम जल्द शुरू होने के आश्वासन दिए गए, लेकिन पिछले कई दिनों से साइट पर कोई मजदूर या मशीन नहीं दिखी। इससे लोगों में यह आशंका बढ़ रही है कि परियोजना अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई है।


शिकायतों का रास्ता अपनाने को मजबूर लोग

लगातार अनदेखी से नाराज़ होकर अब स्थानीय निवासियों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और अन्य संबंधित विभागों में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया है। उनका कहना है कि यदि जल्द काम दोबारा शुरू नहीं हुआ, तो वे सामूहिक विरोध और अन्य वैधानिक कदम उठाने को मजबूर होंगे।


जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल

इस सड़क का भूमिपूजन राज्य मंत्री कृष्णा गौर ने किया था, लेकिन इस मुद्दे पर उनसे संपर्क करने की कोशिशें सफल नहीं हो सकीं। वहीं, क्षेत्र की पार्षद मधु शिवनानी ने भी टिप्पणी करने से इनकार किया। जनप्रतिनिधियों की यह चुप्पी स्थानीय लोगों के असंतोष को और बढ़ा रही है।


क्यों अहम है यह मामला

यह सिर्फ एक अधूरी सड़क का मामला नहीं है, बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा सवाल है। सड़कें किसी भी शहर की जीवनरेखा होती हैं—इनका अधूरा या खराब होना न केवल यातायात बल्कि आर्थिक गतिविधियों और नागरिक सुरक्षा को भी प्रभावित करता है।


निष्कर्ष:
आवधपुरी के निवासी जिस सड़क को विकास का प्रतीक मान रहे थे, वही अब उनके लिए धूल, खतरे और उपेक्षा का पर्याय बन गई है। लोगों की मांग साफ है—या तो काम तुरंत पूरा किया जाए, या प्रशासन खुले तौर पर देरी की वजह बताए। फिलहाल, इलाके के लोग सिर्फ एक सुरक्षित, साफ और चलने लायक सड़क की उम्मीद लगाए बैठे हैं।