सुप्रीम कोर्ट में वकील ने मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर फेंका जूता, हिंदू देवता पर टिप्पणी से भड़का विवाद
दिल्ली में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान एक चौंकाने वाली घटना घटी, जब वकील राकेश किशोर ने मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर...

दिल्ली में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान एक चौंकाने वाली घटना घटी, जब वकील राकेश किशोर ने मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर जूता फेंक दिया। यह घटना उस समय हुई जब अदालत में सुनवाई जारी थी, और इसे भारत की न्यायपालिका की मर्यादा पर गंभीर हमला माना जा रहा है।
कोर्टरूम में हड़कंप, सुरक्षा में चूक पर सवाल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जूता न्यायमूर्ति गवई और उनके साथ बैठे दूसरे न्यायाधीश को हल्के से छूता हुआ पीछे गिरा। अदालत में मौजूद तीन वकीलों ने घटना की पुष्टि की और बताया कि सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत किशोर को पकड़ लिया।
घटना के समय किशोर को यह कहते सुना गया—“सनातन धर्म का अपमान भारत सहन नहीं करेगा।” उसे तुरंत कोर्ट से बाहर ले जाया गया और बाद में बार काउंसिल ने उसके वकालत करने के अधिकार को निलंबित कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश शांत रहे, सुनवाई जारी रखी
अदालत में मौजूद वकील रवि शंकर झा ने बताया कि किशोर ने जूता फेंकने के बाद हाथ उठाकर स्वीकार किया कि उसने यह किया है। इसके बाद सुरक्षा अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया।
झा ने कहा, “मुख्य न्यायाधीश ने बेहद संयम दिखाया और कहा कि बहस जारी रखें, ध्यान न भटकाएं।”
एक अन्य अधिवक्ता, अनस तनवीर ने बताया कि गवई पूरे समय शांत बने रहे और कार्यवाही बाधित नहीं हुई।
विवाद की जड़: विष्णु भगवान पर टिप्पणी
यह घटना हाल ही में मध्य प्रदेश के एक मंदिर में भगवान विष्णु की सात फुट ऊँची मूर्ति के पुनर्निर्माण से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संबंधित है।
मुख्य न्यायाधीश गवई ने पिछले महीने उस याचिका को खारिज करते हुए कहा था—“यह पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन है... जाओ और खुद भगवान से कहो कि कुछ करें।”
इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर विवाद भड़क गया, कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं का मजाक बताकर आलोचना की। बाद में न्यायमूर्ति गवई ने प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) से कहा कि वह “सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।”
राकेश किशोर ने ऑनलाइन पोर्टल The Print से कहा कि “उन्होंने न सिर्फ प्रार्थना अस्वीकार की, बल्कि भगवान विष्णु का उपहास भी उड़ाया।” उन्होंने यह भी कहा कि “16 सितंबर से मैं सो नहीं सका, जब ये टिप्पणी की गई थी।”
सरकार और राजनीतिक दलों की कड़ी प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि “ऐसे निंदनीय कृत्यों का हमारे समाज में कोई स्थान नहीं है।” उन्होंने न्यायमूर्ति गवई से फोन पर बात कर कहा कि यह हमला “हर भारतीय को क्रोधित करने वाला” है।
विपक्षी दलों ने भी इस घटना को न्यायपालिका की गरिमा पर हमला बताया और अदालत परिसर में सुरक्षा की समीक्षा की मांग की।
जूता फेंकना: भारत में अपमान का प्रतीक
भारत सहित कई देशों में सार्वजनिक रूप से जूता फेंकना गहरी असहमति या अपमान का प्रतीक माना जाता है। पूर्व में भी राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था में ऐसा होना अभूतपूर्व माना जा रहा है।
