वैज्ञानिकों ने बरमूडा रहस्य को सुलझाया, द्वीप के नीचे छिपी संरचना मिली
वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्होंने बरमूडा के सबसे बड़े भूवैज्ञानिक रहस्यों में से एक को सुलझा लिया है: द्वीप अटलांटिक महासागर तल से असामान्य...
बरमूडा रहस्य का खुलासा?
वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्होंने बरमूडा से जुड़े सबसे बड़े भूवैज्ञानिक रहस्यों में से एक को आखिरकार समझा दिया है - 3 करोड़ साल पहले ज्वालामुखी निष्क्रिय होने के बावजूद यह द्वीप अटलांटिक महासागर तल से असामान्य रूप से ऊपर क्यों है। कार्नेगी साइंस और येल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बरमूडा के नीचे एक विशाल छिपी हुई चट्टान संरचना की खोज की है, जो द्वीप के नीचे एक तैरते समर्थन प्रणाली की तरह काम करती है।
वैज्ञानिकों ने बरमूडा के नीचे पृथ्वी के आंतरिक भाग का अध्ययन करने के लिए वैश्विक भूकंपों से भूकंपीय तरंगों का उपयोग किया। उन्होंने द्वीप के नीचे 12 मील से अधिक मोटी कम घनत्व वाली चट्टान की परत की खोज की। ये निष्कर्ष जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स नामक जर्नल में प्रकाशित हुए थे।
इस खोज का महत्व
यह खोज ज्वालामुखी द्वीपों के बनने और ऊँचे रहने के पारंपरिक सिद्धांतों को चुनौती देती है। यह पृथ्वी के मेंटल (mantle) और भूमिगत भूगर्भीय गतिविधि की वैज्ञानिक समझ को नया रूप दे सकता है।
वैज्ञानिकों को क्या मिला?
अधिकांश ज्वालामुखी द्वीप हवाई जैसे बढ़ते मेंटल प्लम (mantle plumes) द्वारा बनते हैं। लेकिन बरमूडा एक दुर्लभ भूवैज्ञानिक संरचना पर स्थित है जिसे अंडरप्लेटिंग कहा जाता है। यह हल्की चट्टान की परत एक 'राफ्ट' की तरह काम करती है, जो बरमूडा को समुद्र तल से ऊपर रखने में मदद करती है।
क्या बदलता है?
वैज्ञानिक दुनिया भर के अन्य द्वीपों के नीचे भी ऐसी ही छिपी हुई संरचनाओं की तलाश शुरू कर सकते हैं। यह खोज पृथ्वी की आंतरिक गर्मी और मेंटल मूवमेंट (mantle movement) के बारे में नए सिद्धांतों को जन्म दे सकती है।
कौन प्रभावित है?
- भूगर्भशास्त्री और पृथ्वी वैज्ञानिक
- जलवायु और ग्रह अनुसंधानकर्ता
- टेक्टोनिक गतिविधि और ज्वालामुखी संरचनाओं का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक संस्थान
आगे क्या देखना है:
क्या शोधकर्ता कहीं और भी ऐसी ही भूमिगत संरचनाओं की खोज करते हैं और भविष्य के अध्ययन में पृथ्वी के भूगर्भीय विकास और महासागरीय द्वीपों पर इन निष्कर्षों का क्या प्रभाव पड़ता है।
