हमीदिया कॉलेज में फिर ढही पुरानी इमारत की दीवार, बड़ा हादसा टला — छात्रों में भय और आक्रोश
भोपाल के ऐतिहासिक हामिदिया कॉलेज की जर्जर इमारत का एक हिस्सा सोमवार सुबह अचानक ढह गया। सौभाग्य से उस समय कोई मौजूद नहीं था, जिससे...

भोपाल के ऐतिहासिक हामिदिया कॉलेज की जर्जर इमारत का एक हिस्सा सोमवार सुबह अचानक ढह गया। सौभाग्य से उस समय कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। यह वही इमारत है जिसकी बालकनी पिछले हफ्ते ही ध्वस्त हो गई थी, बावजूद इसके प्रशासन और पीडब्ल्यूडी ने कोई निरीक्षण नहीं किया।
पुराने भवन की दीवार गिरी, बाल-बाल बचे लोग
सोमवार सुबह करीब दस बजे ‘पूर्व प्रधानमंत्री एक्सीलेंस भवन’ का हिस्सा धराशायी हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ढहा हिस्सा उसी पुराने ढांचे से जुड़ा था जिसकी बालकनी कुछ दिन पहले ही आंशिक रूप से गिर चुकी थी। गनीमत रही कि उस समय आसपास कोई नहीं था।
कॉलेज के कर्मचारियों और छात्रों ने बताया कि पिछले कई महीनों से इमारत की दीवारों और छतों में गहरी दरारें दिखाई दे रही थीं। बार-बार चेतावनी देने के बावजूद, न तो जिला प्रशासन और न ही लोक निर्माण विभाग ने अब तक जांच की।
छात्रों में डर और नाराजगी: “हम खतरे के साए में क्लास ले रहे हैं”
कॉलेज के छात्रों और शिक्षकों में गहरा आक्रोश है। कई छात्रों ने बताया कि वे रोजाना असुरक्षित माहौल में कक्षाएं अटेंड कर रहे हैं। एक छात्र ने कहा, “क्लासरूम की छतें झुकी हुई हैं, दीवारों में दरारें हैं। हम डर के साए में पढ़ रहे हैं, लेकिन किसी को फर्क नहीं पड़ता।”
छात्र संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर जल्द निरीक्षण और मरम्मत शुरू नहीं की गई, तो वे आंदोलन तेज करेंगे।
नगर निगम ने पहले ही घोषित की थी ‘असुरक्षित इमारत’
हमीदिया कॉलेज की यह इमारत लंबे समय से जर्जर स्थिति में है। भोपाल नगर निगम (BMC) ने पहले भी इसे ‘असुरक्षित भवन’ घोषित किया था। आर्ट्स और कॉमर्स संकाय की पुरानी कक्षाओं के कई हिस्से पिछले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे गिर चुके हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।
प्रिंसिपल बोले – “चेतावनी पत्र भेजे, पर कार्रवाई नहीं हुई”
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल सेवानी ने बताया कि सोमवार को ढहाव सिर्फ दस मिनट के भीतर हुआ। उन्होंने कहा, “हमने जिला प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग को बार-बार पत्र भेजकर मरम्मत की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।”
प्राचार्य ने यह भी बताया कि जून माह में कलेक्टर और विभाग को औपचारिक चेतावनी भेजी गई थी जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा था कि इमारत कभी भी गिर सकती है। बावजूद इसके, मरम्मत कार्य टलता गया।
प्रशासनिक सुस्ती पर उठे सवाल
यह घटना न केवल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भोपाल में कई शैक्षणिक संस्थान पुराने भवनों में जोखिम लेकर संचालित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे भवनों का नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि समय रहते हादसे टाले जा सकें।
