दक्षिण कोरिया की जनसांख्यिकीय चुनौती पर भारत का ‘आंगनवाड़ी मॉडल’ बना समाधान: भोपाल कमिश्नर संस्कृति जैन ने सियोल सम्मेलन में रखी मजबूत दावेदारी
दक्षिण कोरिया की तेजी से बूढ़ी होती आबादी और दुनिया के सबसे कम जन्म दर वाले देश की चुनौती के बीच, भारत का आंगनवाड़ी मॉडल...

दक्षिण कोरिया की तेजी से बूढ़ी होती आबादी और दुनिया के सबसे कम जन्म दर वाले देश की चुनौती के बीच, भारत का आंगनवाड़ी मॉडल एक संभावित वैश्विक समाधान के रूप में उभर कर सामने आया है। भोपाल नगर निगम (BMC) की आयुक्त संस्कृति जैन ने सियोल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ‘केयरिंग सिटीज़’ सम्मेलन में यह मॉडल केंद्रीय भारत की ओर से प्रस्तुत किया।
भारत का सामुदायिक मॉडल बना वैश्विक चर्चा का केंद्र
सियोल में हाल ही में आयोजित इस सम्मेलन में दुनिया भर के शहरों ने अपने-अपने सामाजिक देखभाल और जनसंख्या प्रबंधन मॉडलों को साझा किया। दक्षिण कोरिया—जहां जन्म दर वर्षों से गिरावट में है और वरिष्ठ नागरिक आबादी तेजी से बढ़ रही है—ने भारत के मॉडल को विशेष रुचि से सुना।
भारत की आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के निदेशक डॉ. सुनील यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की वरिष्ठ IAS अधिकारी शर्मिला मैरी जोसेफ, और संस्कृति जैन शामिल थीं। अधिकारियों ने बच्चों, महिलाओं और वृद्धों के लिए भारत में चल रही कल्याणकारी योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतिकरण किया।
मंत्रालयों के अनुसार, प्रस्तुति में भारत के जनसंख्या संकेतकों, पोषण सुधार कार्यक्रमों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को डेटा-आधारित तरीके से समझाया गया।
आंगनवाड़ी की ताकत: सिर्फ डेकेयर नहीं, पूरी पारिवारिक सहायता प्रणाली
सम्मेलन से लौटने के बाद संस्कृति जैन ने बताया कि दक्षिण कोरिया में बच्चों के लिए डेकेयर संस्थाएँ तो हैं, लेकिन भारत का आंगनवाड़ी ढांचा उससे कहीं अधिक व्यापक और प्रभावी है।
भारत की आंगनवाड़ी इकाइयाँ, इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज (ICDS) के तहत, 0–6 वर्ष के बच्चों के लिए पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, टीकाकरण और स्वास्थ्य निगरानी जैसी सेवाएँ उपलब्ध कराती हैं।
इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों के लिए भी आंगनवाड़ी एक महत्वपूर्ण सहयोग केंद्र के रूप में काम करती हैं।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आँकड़ों के अनुसार, इन सेवाओं ने कुपोषण और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है—जिसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी सराहा है।
महिला प्रतिनिधित्व के महत्व पर ज़ोर
संस्कृति जैन ने सम्मेलन में नगर निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका कहना था कि सामाजिक देखभाल से जुड़े निर्णयों में महिलाओं की भूमिका मजबूत होने से नीतियाँ अधिक संवेदनशील और प्रभावी होती हैं।
शहरी शासन से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस दृष्टिकोण का समर्थन किया और कहा कि “जेंडर-इंक्लूसिव अर्बन गवर्नेंस” भविष्य की सबसे ज़रूरी आवश्यकताओं में से एक है।
दक्षिण कोरिया–भारत सहयोग का नया आयाम
दक्षिण कोरिया की जनसंख्या स्थिति—जहां जन्म दर 1 से नीचे जा चुकी है—दुनिया के लिए एक चेतावनी मानी जाती है। वहीं भारत का बड़ा जनसांख्यिकीय आधार, सामुदायिक स्वास्थ्य मॉडल और स्थानीय प्रशासन की मजबूत संरचना अन्य देशों के लिए सीख का माध्यम बन रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्तुति भारत–दक्षिण कोरिया के बीच सामाजिक नीति और शहरी प्रशासन के क्षेत्र में नई साझेदारी को जन्म दे सकती है।
