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कांगो में घातक इबोला का प्रकोप: WHO प्रमुख ने दी चेतावनी, वैश्विक प्रयास पड़े धीमे

डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि विद्रोही हमलों और यात्रा प्रतिबंधों के कारण कांगो में इबोला प्रकोप से निपटने के वैश्विक प्रयास सुस्त पड़े हैं।

Jun 4
4 min read
कांगो में घातक इबोला का प्रकोप: WHO प्रमुख ने दी चेतावनी, वैश्विक प्रयास पड़े धीमे

मुख्य बिंदु:

  • क्या हुआ: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में घातक इबोला प्रकोप से निपटने के चिकित्सा प्रयास वर्तमान में बेहद सुस्त चल रहे हैं।
  • यह क्यों महत्वपूर्ण है: सशस्त्र विद्रोही समूहों के हिंसक हमलों और कड़े अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रतिबंधों के कारण वायरस पर काबू पाना बेहद मुश्किल हो रहा है।
  • क्या बदलाव आवश्यक है: संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों को संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग) को 45 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत से अधिक करना होगा।
  • कौन प्रभावित है: कांगो के पूर्वी प्रांतों और पड़ोसी देश युगांडा की स्थानीय आबादी के साथ-साथ सुरक्षा खतरों का सामना कर रहे स्वास्थ्य कर्मी।

इबोला के प्रकोप से पीछे छूटे रोकथाम के प्रयास

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में फैले दुर्लभ बुंडीबुग्यो इबोला प्रकोप से निपटने में वैश्विक टीमें अभी भी पीछे चल रही हैं। जांच और प्रयोगशाला क्षमताओं में सुधार के बावजूद, क्षेत्र में सक्रिय विद्रोही हिंसा चिकित्सा अभियानों को लगातार बाधित कर रही है।

हाल ही में इस्लामिक स्टेट से जुड़े विद्रोही संगठन एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेस द्वारा बेनी क्षेत्र में किए गए हमले में 16 लोगों की मौत हो गई। इस असुरक्षा के कारण जमीन पर काम कर रही आपातकालीन चिकित्सा टीमों के लिए बीमारी पर नजर रखना बेहद मुश्किल हो गया है।

बढ़ता आंकड़ा और क्षेत्रीय प्रभाव

इस स्वास्थ्य संकट के कारण कांगो में अब तक दर्ज किए गए 344 मामलों में से 60 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस बीच, संदिग्ध संक्रमणों की संख्या 906 से घटकर 116 रह गई है।

यह महामारी अब पड़ोसी देश युगांडा में भी फैल चुकी है, जहां 15 पुष्ट मामले और एक मौत दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि प्रयोगशाला जांच में पुष्टि होने से पहले यह वायरस कई हफ्तों तक बिना पहचान में आए फैलता रहा।

कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में बड़ी कमी

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनोम घेब्रेयिसस ने जोर देकर कहा कि संक्रमण को रोकने के लिए संपर्क ट्रैकिंग में तत्काल सुधार किया जाना चाहिए। वर्तमान में, जमीनी टीमें तय मानकों को पूरा करने में विफल हो रही हैं।

"केवल लगभग 45% संपर्कों पर ही नज़र रखी जा सकी है, और इस प्रकोप पर काबू पाने के लिए हमें इस आंकड़े को 90% से ऊपर ले जाना होगा।" - टेड्रोस

अत्यधिक अस्थिर सुरक्षा स्थितियों के बीच वायरस के प्रसार को सफलतापूर्वक रोकने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को 90 प्रतिशत से अधिक की दर से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग करनी होगी। इसके अलावा, प्रतिक्रिया टीमों को वायरस को लेकर फैली स्थानीय अफवाहों और गलत जानकारियों से भी निपटना होगा।

इलाज और संसाधनों की राह में बाधाएं

प्रभावित क्षेत्र में अभी तक कोई स्वीकृत टीका या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है, जिससे त्वरित रोकथाम और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रायोगिक टीकों की आपूर्ति करना एक दीर्घकालिक चुनौती बनी हुई है।

  • टीके की कमी: स्थानीय महामारी विज्ञानियों का कहना है कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित टीके को पूरी तरह तैनात करने में कई महीने लग सकते हैं।
  • यात्रा प्रतिबंध: कई देशों द्वारा लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों के कारण चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
  • स्थानीय विरोध: कुछ आशंकित निवासियों ने स्थानीय क्लीनिकों पर हमले किए हैं और मृत रिश्तेदारों के शव सौंपने की मांग की है।

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से तत्काल उन यात्रा प्रतिबंधों को हटाने का आग्रह किया है जो महत्वपूर्ण संसाधनों को रोक रहे हैं। इसके बजाय, एजेंसी देशों को सीमा चौकियों और हवाई अड्डों पर सख्त निकास जांच (एग्जिट स्क्रीनिंग) लागू करने की सलाह देती है।

आगे किस पर रहेगी नजर

स्वास्थ्य अधिकारी 90 प्रतिशत के महत्वपूर्ण लक्ष्य को पूरा करने के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग को तेजी से बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या क्षेत्रीय सैन्य अभियान पूर्वी कांगो को इतना स्थिर कर पाते हैं कि चिकित्सा दल प्रभावित क्षेत्रों तक सुरक्षित पहुंच सकें। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय सरकारों पर आपूर्ति को बाधित करने वाले यात्रा प्रतिबंधों को हटाने और हवाई अड्डे पर सख्त जांच लागू करने का दबाव बढ़ेगा।