सितंबर के पहले सप्ताह में खुलेंगे कांग्रेस संगठन के पत्ते, जिला-शहर अध्यक्षों के नाम पर मंथन तेज
मिर्जापुर समेत यूपी में बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की कांग्रेस की कवायद तेज।

लखनऊ,ब्यूरो
मिर्जापुर, 29 अगस्त। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर से मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। पार्टी हाईकमान ने लंबे समय से निष्क्रिय और पुराने जिला व शहर कांग्रेस अध्यक्षों के कामकाज की समीक्षा के बाद संगठन में व्यापक बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि मिर्जापुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में नए जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्षों के नाम सितंबर के पहले सप्ताह में घोषित किए जा सकते हैं।
राजनीतिक हलकों में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की ओर से संगठन खड़ा करने की इस कवायद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहां प्रदेश की अन्य राजनीतिक पार्टियां विधानसभा चुनाव के लिए संभावित प्रत्याशियों के चयन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हैं, वहीं कांग्रेस का मुख्य जोर फिलहाल संगठन को मजबूत करने पर है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम लगातार यह कहते रहे हैं कि पार्टी बूथ स्तर तक अपना संगठन मजबूत करने के साथ प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस संगठन तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
कांग्रेस की इस सक्रियता के बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी ने अभी तक अपनी चुनावी रणनीति और गठबंधन का स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं रखा है। समाजवादी पार्टी भी कांग्रेस की अंतिम समय में तैयार होने वाली रणनीति को लेकर असमंजस में बताई जा रही है। वहीं, मिर्जापुर जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर भाजपा की जमीनी मौजूदगी मजबूत होने के बावजूद समाजवादी पार्टी को अकेले चुनौती देने के लिए पर्याप्त ताकत का अभाव माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस के सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस का भले ही प्रदेश में कोई स्पष्ट और मजबूत वोट बैंक दिखाई न देता हो, लेकिन आम मतदाताओं के बीच पार्टी की मौजूदगी, सहानुभूति और राजनीतिक प्रभाव अब भी बना हुआ है। समाजवादी पार्टी कांग्रेस नेता राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता का चुनावी लाभ उठाने की उम्मीद कर रही है। हालांकि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी आरपी गौतम और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर बहुत उत्साहित नहीं बताए जा रहे हैं। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन अथवा सीटों पर आपसी सहमति के साथ मित्रवत मुकाबले जैसे दोनों विकल्पों पर विचार किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने बूथ से लेकर सड़क तक संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम शुरू किया है। मिर्जापुर, सोनभद्र और भदोही जिलों में केंद्रीय पर्यवेक्षक और राज्य सह-पर्यवेक्षक की ओर से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में ब्लॉक, मंडल और बूथ स्तर की समितियों के गठन का रोडमैप तैयार किया गया है। उद्देश्य निष्क्रिय पड़े संगठन को दोबारा सक्रिय करना और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पार्टी का जमीनी ढांचा खड़ा करना है।
मिर्जापुर में केंद्रीय पर्यवेक्षक एवं राजस्थान की पूर्व राज्य मंत्री संगीता बेनीवाल ने जिले की पांचों विधानसभा सीटों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत रूप से संवाद किया। उन्होंने लगातार छह दिनों तक कार्यकर्ताओं और पार्टी पदाधिकारियों से मुलाकात कर संगठन की स्थिति की जानकारी ली तथा नए जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्षों के चयन को लेकर कार्यकर्ताओं से सुझाव प्राप्त किए। इस प्रक्रिया के बाद करीब तीन-तीन नामों का पैनल तैयार कर कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव एवं सांसद केसी वेणुगोपाल को भेजा गया है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए शशि भूषण दुबे कंचनिया, राजधर दुबे और शिव शंकर चौबे के नाम चर्चा में हैं। वहीं, शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए रमेश चंद्र प्रजापति पप्पू, अधिवक्ता विधि कुमार सिंह और नरेश चंद्र चौधरी के नामों पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान को करना है।
वर्तमान जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिव कुमार सिंह पटेल वर्ष 2019 से इस पद पर हैं। संगठनात्मक स्तर पर बूथ समितियों के पर्याप्त गठन में असफल रहने को लेकर उनके कार्यकाल पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन जिले में बेहद कमजोर रहा था। विशेष रूप से छानबे और मड़िहान विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी का प्रदर्शन पिछले चुनावों की तुलना में और कमजोर रहा।
कांग्रेस के पुराने चुनावी प्रदर्शन को देखें तो वर्ष 2012 में मड़िहान विधानसभा सीट से कांग्रेस के लालितेशपति त्रिपाठी विधायक निर्वाचित हुए थे। वहीं छानबे विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस चुनाव हार गई थी, लेकिन पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत मजबूत रहा था। उस समय कांग्रेस को करीब 35 हजार मत प्राप्त हुए थे, जिससे क्षेत्र में पार्टी की मजबूत पकड़ का संकेत मिला था। इसके बाद संगठनात्मक कमजोरी और लगातार कमजोर होते चुनावी प्रदर्शन के कारण पार्टी का जनाधार प्रभावित हुआ।
अब कांग्रेस नेतृत्व का पूरा जोर पुराने संगठन को पुनर्गठित करने और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रिय टीम तैयार करने पर है। जिला और शहर अध्यक्षों के चयन को इसी व्यापक संगठनात्मक बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। सितंबर के पहले सप्ताह में होने वाली घोषणा के बाद यह स्पष्ट होगा कि पार्टी जिले में किन नए चेहरों को संगठन की जिम्मेदारी सौंपती है और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस किस राजनीतिक रणनीति के साथ मैदान में उतरती है।
