संसद में चर्चा से इनकार पर कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला
कांग्रेस ने शिक्षा नीति की समस्याओं और नीट यूजी पेपर लीक जैसे मुद्दों पर संसद में चर्चा न होने देने का आरोप लगाया है। प्रियंका...

कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर शिक्षा नीति से जुड़े ज्वलंत मुद्दों और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) 2024 के प्रश्नपत्र लीक जैसे गंभीर विषयों पर संसद में सार्थक चर्चा से लगातार इनकार करने का आरोप लगाते हुए तीखा प्रहार किया है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार छात्रों की आवाज को दबा रही है और चर्चा की मांग को नजरअंदाज कर रही है।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, 'हम सब (विपक्ष) चर्चा की मांग कर रहे हैं। शिक्षा नीति में कई समस्याएं और बड़े मुद्दे हैं, फिर भी आप इस पर चर्चा करने को तैयार नहीं हैं। इसके बजाय, आप छात्रों पर आंसू गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं और उनकी पिटाई कर रहे हैं। यह हमारे बच्चे हैं।' उन्होंने छात्रों के प्रति सरकार के रवैये को अत्यंत निंदनीय करार दिया और इसे उनकी आवाज को कुचलने का प्रयास बताया।
सांसदों के अधिकारों पर शशि थरूर का वक्तव्य
वहीं, कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने भी सरकार के रुख की आलोचना करते हुए संसद में चर्चा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने एक पुरानी कहावत का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष को अपनी बात कहने का अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि सरकारें अक्सर अपनी मनमानी करती हैं। थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि संसद वह सर्वोच्च मंच है जहाँ से सांसद जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचा सकते हैं और महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही सुनिश्चित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि चर्चा से इनकार करना संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जानबूझकर उन मुद्दों से बच रही है जो उसकी नीतियों की विफलता या कमजोरियों को उजागर कर सकते हैं। नीट यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के मामले ने लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को गहरी चिंता में डाल दिया है। इस परीक्षा के आयोजन में खामियों और पारदर्शिता की कमी को लेकर व्यापक सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि ऐसे गंभीर मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा न होने से छात्रों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दब रही है।
शिक्षा नीति और छात्रों का भविष्य दांव पर
पार्टी के अनुसार, नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन को लेकर भी कई राज्यों और शैक्षणिक संस्थानों से शिकायतें आ रही हैं, लेकिन सरकार इन आलोचनाओं को सुनने और उनका समाधान करने के बजाय चर्चा से कतरा रही है। कांग्रेस का मानना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील और राष्ट्र-निर्माण से जुड़े विषय पर खुली और पारदर्शी चर्चा देश के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। छात्रों पर बल प्रयोग का उल्लेख करते हुए, प्रियंका गांधी वाड्रा ने स्पष्ट किया कि विरोध कर रहे छात्र केवल अपने भविष्य और उचित प्रक्रिया के लिए आवाज उठा रहे हैं, और सरकार को उन्हें सुनने के बजाय उन पर लाठीचार्ज करवाना स्वीकार्य नहीं है।
यह मामला संसद के आगामी सत्रों में भी गरमाने की उम्मीद है, जहाँ विपक्ष सरकार पर जनता से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय करने के लिए दबाव बनाएगा। कांग्रेस ने मांग की है कि इन सभी गंभीर मुद्दों पर अविलंब संसद में चर्चा कराई जाए और सरकार अपनी नीतियों की समीक्षा करे।
