रतनगढ़ की आंखें नम, लोककला का सितारा पंचतत्व में विलीन
समाजसेवी एवं तुर्रा कलंगी के उस्ताद नाथूलाल भाटी पंचतत्व में विलीन, रतनगढ़ ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई।

सेन समाज की शान और समाजसेवा के प्रतीक थे नाथूलाल भाटी, नगर ने नम आंखों से दी विदाई।
रामलीला में रावण और नरसिंह जयंती में हिरण्यकश्यप बनकर छोड़ी अमिट छाप।
आपातकाल में जेल गए जनसंघी नेता, लोककला और सामाजिक सरोकारों को समर्पित रहा जीवन।
द क्लिफ़ न्यूज़,रतनगढ़
नगर के वरिष्ठ समाजसेवी, सेन समाज के गौरव और प्रसिद्ध तुर्रा कलंगी अखाड़े के ख्यातिप्राप्त उस्ताद श्री नाथूलाल जी भाटी (सेन) के निधन से रतनगढ़ नगर में शोक की लहर व्याप्त हो गई। बुधवार को उनकी अंतिम शवयात्रा में उमड़े सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। उनके निधन को सेन समाज के साथ-साथ संपूर्ण नगर के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। वे पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे।
स्वर्गीय नाथूलाल जी भाटी का जीवन समाजसेवा, सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और जनकल्याण के लिए समर्पित रहा। अपने सरल, हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के कारण वे नगर के हर वर्ग में सम्मानित थे। सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी, लोगों के साथ आत्मीय व्यवहार और निस्वार्थ सेवाभाव ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई। सेन समाज के उत्थान और सामाजिक एकजुटता के लिए किए गए उनके प्रयासों को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
नाथूलाल जी भाटी की पहचान केवल एक वरिष्ठ समाजसेवी तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे पारंपरिक लोककला तुर्रा कलंगी के कुशल उस्ताद भी थे। इस कला के प्रति उनकी गहरी रुचि, अभिनय क्षमता और मंच पर प्रभावशाली प्रस्तुति ने उन्हें नगर में विशेष प्रतिष्ठा दिलाई। वे उन कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रतनगढ़ में पुराने समय में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक रामलीला में वे रावण का स्वांग धारण करते थे। अपने प्रभावशाली अभिनय, आकर्षक वेशभूषा और कलात्मक कौशल से वे दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। उनके अभिनय में पात्र की गंभीरता और प्रभाव को जीवंत करने की विशेष क्षमता थी। रामलीला देखने वाले लोगों के मन में उनकी प्रस्तुतियों की स्मृतियां आज भी बसी हुई हैं।
इसी तरह भगवान श्री गोवर्धन नाथ मंदिर में नरसिंह जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले उत्सव में वे हिरण्यकश्यप का स्वांग धारण करते थे। इस धार्मिक आयोजन में उनकी भूमिका विशेष आकर्षण का केंद्र रहती थी। धार्मिक प्रसंगों को लोकनाट्य और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत करने की उनकी कला ने नगर की सांस्कृतिक परंपराओं को समृद्ध किया। उनके निधन से लोककला के क्षेत्र में भी एक ऐसा रिक्त स्थान उत्पन्न हुआ है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।
स्वर्गीय भाटी जी का राजनीतिक जीवन भी उल्लेखनीय रहा। वे जनसंघ की विचारधारा से जुड़े हुए थे और अपने स्पष्ट विचारों तथा मुखर व्यक्तित्व के लिए पहचाने जाते थे। आपातकाल के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने विचारों पर दृढ़ रहने वाले नाथूलाल जी भाटी का जीवन सामाजिक प्रतिबद्धता और वैचारिक निष्ठा का उदाहरण रहा। धार्मिक आयोजनों से लेकर सामाजिक गतिविधियों और सांस्कृतिक मंचों तक उनकी सक्रियता ने उन्हें नगर के जनजीवन का अभिन्न हिस्सा बना दिया था।
बुधवार को उनके निधन के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। उनकी अंतिम शवयात्रा निज निवास से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई मुक्तिधाम श्मशान घाट पहुंची। शवयात्रा में नगरवासियों, सेन समाज के सदस्यों, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और शुभचिंतकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे लोगों ने दिवंगत नाथूलाल जी भाटी को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके साथ बिताए समय को याद किया। पूरे वातावरण में शोक और भावुकता का माहौल रहा।
मुक्तिधाम श्मशान घाट पर उनके अनुज श्यामलाल तथा पुत्रों कृष्णगोपाल, भरत कुमार और शत्रुघ्न ने अश्रुपूरित नेत्रों से उन्हें मुखाग्नि दी। इस हृदयविदारक दृश्य ने वहां उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। इसके बाद आयोजित शोकसभा में वक्ताओं ने स्वर्गीय भाटी जी के व्यक्तित्व, सामाजिक योगदान, राजनीतिक जीवन और सांस्कृतिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि उनका निधन केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि समाजसेवा और लोककला की समृद्ध परंपरा से जुड़े एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व का अवसान है।
शोकसभा में नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि कचरूमल गुर्जर, वरिष्ठ कांग्रेस नेता धीरज व्यास, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष शंभूभाई चारण, जगदीश बैरागी, ब्रजमोहन वैष्णव, वरिष्ठ पत्रकार एस.पी. व्यास, नीटू पाराशर, युवा पत्रकार राकेश सेन डिकेन, निर्मल मूंदड़ा, जगदीश सेन (डिकेन), सेन समाज के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष एवं कनावटी सरपंच सोनू सेन, तहसील अध्यक्ष मुरली सेन, युवा अध्यक्ष श्रवण सेन, समाज के जिला सचिव भरत सिसोदिया, शंकरलाल वर्मा, भेरूलाल सेन मुवादा और रामचंद्र सैनी (फौजी काका) सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
अंतिम शवयात्रा में अनिल सोडानी, सुनील बैरागी, रिंकू सरदार, गोवर्धन चारण, सत्यनारायण ईनाणी, राजेश पटवा सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों और शुभचिंतकों ने सहभागिता की। सभी ने उनके सामाजिक योगदान को याद करते हुए शोकसंतप्त परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं।
शोकसभा के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही ईश्वर से शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की गई।
नाथूलाल जी भाटी अपने पीछे सामाजिक सेवा, सांस्कृतिक साधना और आत्मीय संबंधों की ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जो रतनगढ़ के जनमानस में लंबे समय तक जीवित रहेगी। उनका जीवन इस बात का प्रमाण रहा कि समाज के प्रति समर्पण और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव किसी भी व्यक्ति को जनमानस में स्थायी स्थान दिलाता है। उनके जाने से उपजा शोक उनकी लोकप्रियता और समाज के प्रति उनके योगदान को दर्शाता है। रतनगढ़ उन्हें एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में याद रखेगा, जिन्होंने समाजसेवा के साथ अपनी लोककला से भी नगर की पहचान को समृद्ध किया।
