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पेंशन बढ़ोतरी और 35 किलो राशन की मांग, सोमनाथ से दिल्ली तक दिव्यांग का संघर्ष

दिव्यांगों और विधवा महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा के लिए उठाई आवाज।

Few hours ago
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पेंशन बढ़ोतरी और 35 किलो राशन की मांग, सोमनाथ से दिल्ली तक दिव्यांग का संघर्ष

सांसदों-विधायकों को ज्ञापन सौंपकर सरकार तक पहुंचा रहे मांग।

 

पेंशन में बढ़ोतरी, 35 किलो राशन और बुनियादी सुविधाओं पर जोर।

 

 

दीपक कुमार सिंह की सोमनाथ से दिल्ली तक साइकिल यात्रा।

 

द क्लिफ़ न्यूज़,भोपाल

दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं के अधिकारों, आर्थिक सुरक्षा तथा सम्मानजनक जीवन की मांग को लेकर बिहार के भोजपुर जिले के निवासी दिव्यांग साइकिल यात्री दीपक कुमार सिंह सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, गुजरात से दिल्ली तक साइकिल यात्रा कर रहे हैं। इस यात्रा के माध्यम से वह केंद्र सरकार का ध्यान दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं की समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। उनकी प्रमुख मांगों में मासिक पेंशन में सम्मानजनक बढ़ोतरी और पात्र जरूरतमंदों को प्रतिमाह 35 किलो राशन उपलब्ध कराना शामिल है।

 

दीपक कुमार सिंह का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना एक बड़ी चुनौती है। सीमित आय, बढ़ती महंगाई, स्वास्थ्य संबंधी खर्च और रोजगार के सीमित अवसरों के कारण अनेक जरूरतमंद परिवारों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पेंशन और खाद्य सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था उनके जीवन को अधिक सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

 

उनका मानना है कि दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं के लिए संचालित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब सहायता राशि और खाद्यान्न की उपलब्धता उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हो। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि इन वर्गों की आर्थिक स्थिति का आकलन करते हुए पेंशन में बढ़ोतरी और खाद्यान्न सहायता के संबंध में ठोस निर्णय लिए जाएं।

 

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों तक पहुंचा रहे आवाज

 

अपनी यात्रा के दौरान दीपक कुमार सिंह विभिन्न राज्यों में जनप्रतिनिधियों, सांसदों, विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं। वह अपनी मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपकर संबंधित विभागों और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो तथा उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

 

सोमनाथ से दिल्ली तक की यह यात्रा केवल पेंशन और राशन की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से वह दिव्यांगजनों की क्षमता, आत्मसम्मान और अधिकारों के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का संदेश भी दे रहे हैं। उनका प्रयास है कि शारीरिक चुनौतियों के बावजूद दिव्यांगजन अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा सकते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान दे सकते हैं।

 

पेंशन और राशन व्यवस्था में सुधार की मांग

 

दीपक कुमार सिंह की प्रमुख मांग है कि दिव्यांगजनों की मासिक पेंशन में ऐसी बढ़ोतरी की जाए, जिससे उन्हें जीवन की बुनियादी जरूरतें पूरी करने में मदद मिल सके। इसके साथ ही पात्र दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं को प्रतिमाह 35 किलो राशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए, ताकि आर्थिक अभाव के कारण उन्हें भोजन की कमी का सामना न करना पड़े।

 

उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांग परिवारों को खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच बेहतर बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के अवसर भी उपलब्ध कराने चाहिए।

 

सरकार से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा

 

दीपक कुमार सिंह ने केंद्र सरकार और संबंधित विभागों से अपील की है कि दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। उनके अनुसार, पेंशन में उचित वृद्धि, पर्याप्त खाद्यान्न सहायता और जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिल सकती है।

 

इस यात्रा के जरिए वह यह संदेश देना चाहते हैं कि अधिकारों के प्रति जागरूकता और निरंतर प्रयास सामाजिक बदलाव का माध्यम बन सकते हैं। सोमनाथ से दिल्ली तक उनकी साइकिल यात्रा का उद्देश्य जरूरतमंदों की आवाज को नीति-निर्माताओं तक पहुंचाना और उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने के बेहतर अवसर दिलाने की मांग करना है।

 

उनका संदेश है—“हक की आवाज, सम्मान का संघर्ष; दिव्यांगजनों को अधिकार दो, पेंशन बढ़ाओ और 35 किलो राशन दिलाओ।” अब उनकी मांगों पर सरकार और संबंधित विभागों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

 

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