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नरेला रक्षाबंधन महोत्सव बना विश्व का सबसे बड़ा राखी महोत्सव

इस पर्व ने जनप्रतिनिधि और जनता के बीच औपचारिक संबंधों की सीमाओं को पार कर एक परिवार जैसा आत्मीय रिश्ता निर्मित किया है।

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नरेला रक्षाबंधन महोत्सव बना विश्व का सबसे बड़ा राखी महोत्सव

विशेष लेख

जनसंपर्क संचालनालय की विशेष फीचर श्रृंखला

 

रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का वह पावन पर्व है, जिसमें एक धागा रिश्ते की परिभाषा को रक्त संबंधों से आगे ले जाकर विश्वास, कर्तव्य, सुरक्षा, सम्मान और आत्मीयता से जोड़ देता है। कलाई पर बंधने वाला रक्षासूत्र आकार में भले ही छोटा हो, लेकिन उसके भीतर निहित भावनाएं अनंत होती हैं। यही कारण है कि हजारों वर्षों की यात्रा के बाद भी रक्षाबंधन आज भारतीय जनमानस में उतनी ही श्रद्धा और आत्मीयता के साथ जीवंत है।

 

सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहां पर्व केवल उत्सव नहीं होते, बल्कि वे जीवन-दर्शन के वाहक होते हैं। प्रत्येक पर्व मनुष्य को स्वयं से, परिवार को समाज से और समाज को अपनी संस्कृति से जोड़ता है। रक्षाबंधन भी इसी महान परंपरा का पर्व है, जो हमें याद दिलाता है कि रिश्ते अधिकार से नहीं, बल्कि विश्वास और जिम्मेदारी से मजबूत होते हैं।

 

इसी सांस्कृतिक और सामाजिक भावना को केंद्र में रखकर 18 वर्ष पूर्व नरेला में रक्षाबंधन महोत्सव प्रारंभ किया था। तब मेरा केवल एक ही उद्देश्य था कि हर बहन को यह विश्वास दिलाऊं कि मैं उनका भाई हूं, उनका रक्षक हूं और उनके जीवन में खुशियां लाने के लिए सदैव समर्पित रहूंगा।

 

आज वही भावना एक बड़े सामाजिक उत्सव का रूप ले चुकी है। हर वर्ष लाखों बहनें मुझे रक्षासूत्र बांधकर अपना आशीर्वाद प्रदान करती हैं। पिछले वर्ष 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने रक्षासूत्र बांधकर अपना आशीर्वाद प्रदान किया। यह संख्या केवल एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि लाखों बहनों के विश्वास, स्नेह और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इसी अपार स्नेह ने नरेला रक्षाबंधन महोत्सव को विश्व के सबसे बड़े रक्षाबंधन महोत्सव के रूप में पहचान दिलाई है।

 

लेकिन किसी भी आयोजन की वास्तविक सफलता उसके आकार से नहीं, बल्कि समाज पर उसके प्रभाव से तय होती है। नरेला के इस महोत्सव की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि अब यह पर्व केवल नरेला परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भोपाल की अन्य विधानसभाओं की बहनें भी बड़ी संख्या में मुझे रक्षासूत्र बांधती हैं।

 

इस पर्व ने जनप्रतिनिधि और जनता के बीच औपचारिक संबंधों की सीमाओं को पार कर एक परिवार जैसा आत्मीय रिश्ता निर्मित किया है। जब कोई बहन राखी बांधती है, तो वह केवल एक धागा नहीं बांधती, बल्कि अपने भाई की कलाई पर अपना विश्वास रखती है। वह यह उम्मीद रखती है कि आवश्यकता के समय उसका भाई उसके साथ खड़ा रहेगा।

 

हर राखी यह स्मरण कराती है कि सार्वजनिक जीवन में प्राप्त पद सम्मान का विषय हो सकता है, लेकिन उससे कहीं बड़ी चीज जनता का विश्वास है। यह विश्वास जितना बड़ा होता है, जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती जाती है।

 

इस वर्ष भी विश्व का सबसे बड़ा नरेला रक्षाबंधन महोत्सव 31 अगस्त से प्रारंभ होने जा रहा है। इसमें लाखों की संख्या में बहनें मुझे रक्षासूत्र बांधकर अपना अमूल्य आशीर्वाद प्रदान करेंगी। जब बहनें मुझे राखी बांधती हैं, तो मैं केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि उनके परिवार के एक सदस्य के रूप में उपस्थित होता हूं। हर राखी मेरे कर्तव्यों की याद दिलाती है, हर मुस्कान मुझे प्रेरणा देती है और हर बहन की आंखों में दिखाई देने वाला विश्वास मुझे शक्ति देता है।

 

आज नरेला विधानसभा की पहचान केवल एक विधानसभा के रूप में नहीं, बल्कि ‘नरेला परिवार’ के रूप में है। यहां हर हिंदू पर्व केवल परंपरा नहीं, बल्कि उत्सव और उल्लास की जीवंत धारा बनकर बहता है। नरेला परिवार की हर बहन मेरी शक्ति है, मेरी प्रेरणा है और मेरी विजय का प्रतीक है।

 

बहनों, मैं यह वचन देता हूं कि जब तक मेरे जीवन में श्वास है, जब तक मेरे कर्म में शक्ति है, तब तक हर बहन की रक्षा, सम्मान, सशक्तीकरण और स्वाभिमान के लिए मैं सदैव समर्पित रहूंगा।

 

मैं इस पवित्र पर्व पर एक बार फिर समस्त बहनों को नमन करता हूं और वचन देता हूं कि जब तक आपके भाई विश्वास की कलाई धड़कती रहेगी, तब तक हर बहन की मुस्कान मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

 

बहनों के विश्वास का यह पावन पर्व मेरे जीवन की अक्षय पूंजी है। बहनों, आपका स्नेह, आशीर्वाद और अपनापन ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। आपका स्नेह और आशीर्वाद सदैव बना रहे।

 

— विश्वास कैलाश सारंग

मध्यप्रदेश के खेल एवं सहकारिता मंत्री