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मोदी के जनसेवा के 25 साल, जनविश्वास की रोशनी में विकसित भारत के नए संकल्प की ओर बढ़ता सफर

गुजरात से शुरू हुआ सफर, 25 वर्षों में राष्ट्रीय नेतृत्व की मिसाल बना।

Few hours ago
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मोदी के जनसेवा के 25 साल, जनविश्वास की रोशनी में विकसित भारत के नए संकल्प की ओर बढ़ता सफर

जनादेश, जनकल्याण और सुशासन को मोदी ने अपनी यात्रा का आधार बताया।

 

गरीबी, डिजिटल क्रांति और आत्मनिर्भरता को विकास की नई धुरी बनाया।

 

25 वर्ष पूरे होने पर अब 2047 के विकसित भारत का संकल्प।

 

द क्लिफ़ न्यूज़,नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को सरकार के प्रमुख के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूरे किए। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई उनकी प्रशासनिक यात्रा 2014 में देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंची और 2026 में लगातार 25 वर्ष पूरे करने के पड़ाव पर पहुंची। इस अवसर पर अपने संबोधन में मोदी ने इस यात्रा को व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय देश की जनता के विश्वास, सहयोग और आशीर्वाद का परिणाम बताया।

 

मोदी ने कहा कि 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते समय उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि सरकार के प्रमुख के रूप में उनकी सेवा की यात्रा 25 वर्ष तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता द्वारा बार-बार सेवा का अवसर मिलना उनके लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने देशवासियों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था को नमन किया।

 

नरेंद्र मोदी ने गुजरात की जिम्मेदारी ऐसे समय संभाली थी, जब राज्य प्राकृतिक आपदाओं और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा था। वर्ष 2001 के भूकंप ने गुजरात के बड़े हिस्से को प्रभावित किया था। इसके बाद पुनर्निर्माण, बुनियादी ढांचे के विकास, बिजली, पानी, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को गति देना उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हुआ। गुजरात में उन्होंने लगातार तीन विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व किया और मई 2014 तक मुख्यमंत्री पद पर रहे।

 

गुजरात के शासनकाल में प्रशासन में तकनीक के इस्तेमाल और नागरिकों की शिकायतों के सीधे समाधान पर विशेष जोर दिया गया। शिकायत निवारण की व्यवस्था, परियोजनाओं की निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने के प्रयास किए गए। गुजरात में विकसित कुछ प्रशासनिक प्रयोग बाद में केंद्र सरकार की व्यवस्थाओं का हिस्सा बने। मोदी ने अपनी यात्रा में गुजरात को शासन और विकास के प्रयोगों की महत्वपूर्ण भूमि के रूप में याद किया।

 

वर्ष 2014 में उनकी राजनीतिक यात्रा ने राष्ट्रीय स्तर पर निर्णायक मोड़ लिया। 16वीं लोकसभा के चुनाव में भाजपा ने 282 सीटें हासिल कर अपने दम पर बहुमत प्राप्त किया। तीन दशकों के बाद पहली बार किसी राजनीतिक दल को लोकसभा में अपने दम पर पूर्ण बहुमत मिला। नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लगभग 13 वर्ष की उनकी प्रशासनिक यात्रा केंद्र सरकार के नेतृत्व में बदल गई।

 

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने प्रदर्शन को और मजबूत करते हुए 303 सीटें जीतीं। मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटें मिलीं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने बहुमत प्राप्त किया। इसके बाद नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस प्रकार 2001 से 2026 तक उनकी सरकार के प्रमुख के रूप में लगातार 25 वर्ष की यात्रा पूरी हुई।

 

इस अवधि में केंद्र सरकार ने गरीबों, महिलाओं, किसानों और युवाओं को अपनी योजनाओं के केंद्र में रखने का दावा किया। प्रधानमंत्री जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों बैंक खाते खोले गए और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से सरकारी सहायता को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत की गई। आधार, मोबाइल और बैंक खातों के संयोजन ने कल्याणकारी योजनाओं में डिजिटल भुगतान और प्रत्यक्ष हस्तांतरण की व्यवस्था को व्यापक बनाया।

 

गरीबी में कमी को मोदी सरकार अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाती रही है। सरकार के अनुसार पिछले 11 वर्षों में 25 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए। स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता, पेयजल, रसोई गैस, बैंकिंग और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को गरीब परिवारों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। हालांकि गरीबी के आंकड़ों का आकलन अलग-अलग परिभाषाओं और मापदंडों के आधार पर अलग हो सकता है, इसलिए 25 करोड़ का आंकड़ा सरकार द्वारा प्रस्तुत उपलब्धि के रूप में देखा जाना चाहिए।

 

महिलाओं के लिए वित्तीय समावेशन, स्वयं सहायता समूहों, आवास, स्वच्छता और उद्यमिता को बढ़ावा देने की योजनाओं पर जोर दिया गया। किसानों के लिए आय सहायता, सिंचाई, फसल बीमा, कृषि बाजार और तकनीक के विस्तार को प्राथमिकता दी गई। युवाओं के संदर्भ में कौशल विकास, स्टार्टअप, डिजिटल अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में कई पहल की गईं।

 

मोदी की 25 वर्ष की यात्रा में डिजिटल भारत एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में सामने आया। सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण, ऑनलाइन भुगतान, डिजिटल पहचान और मोबाइल आधारित सेवाओं ने नागरिकों तथा सरकार के बीच संपर्क का तरीका बदला। यूपीआई के विस्तार ने डिजिटल भुगतान को आम लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बना दिया। भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को अब वैश्विक स्तर पर भी भारतीय प्रशासनिक मॉडल की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

 

आत्मनिर्भर भारत भी मोदी सरकार के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल रहा है। रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल निर्माण, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों में घरेलू क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। कोरोना महामारी के बाद आत्मनिर्भरता की अवधारणा को और अधिक प्रमुखता मिली। सरकार ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन जैसी नीतियों के माध्यम से भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने का लक्ष्य सामने रखा।

 

प्रधानमंत्री ने अपनी 25 वर्ष की यात्रा में आलोचना और विरोध को भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि विरोध करने वालों ने भी उन्हें लोकतंत्र की शक्ति समझने में मदद की। उनके अनुसार कठिन परिस्थितियों ने धैर्य और संघर्ष की क्षमता बढ़ाई, जबकि जनता का विश्वास लगातार अधिक मेहनत करने की प्रेरणा देता रहा।

 

मोदी ने इस अवसर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक या प्रशासनिक यात्रा केवल एक व्यक्ति की नहीं होती। संगठन के लाखों कार्यकर्ताओं, सरकार के कर्मचारियों, सहयोगियों और सामान्य नागरिकों के योगदान से बड़े परिवर्तन संभव होते हैं। उन्होंने 25 वर्ष की यात्रा में साथ देने वाले सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

 

मोदी के लिए 25 वर्ष का यह पड़ाव केवल अतीत का मूल्यांकन नहीं बल्कि भविष्य के संकल्प का अवसर भी है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है। स्वतंत्रता की शताब्दी तक विकसित भारत का निर्माण उनकी मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि का केंद्रीय लक्ष्य है। इसके लिए आर्थिक विकास के साथ रोजगार, आधुनिक बुनियादी ढांचा, तकनीकी क्षमता, सामाजिक सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को महत्वपूर्ण आधार माना गया है।

 

25 वर्ष की इस यात्रा को तीन प्रमुख चरणों में देखा जा सकता है। पहला चरण 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में रहा, दूसरा चरण 2014 से 2024 तक केंद्र में पूर्ण बहुमत वाली सरकारों का रहा और तीसरा चरण 2024 के बाद गठबंधन सरकार के नेतृत्व का है। इन तीनों चरणों में राजनीतिक परिस्थितियां अलग रहीं, लेकिन सरकार के प्रमुख के रूप में मोदी की निरंतरता बनी रही।

 

7 अक्टूबर 2026 का दिन इस दृष्टि से भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 2001 में शुरू हुई यात्रा ने राष्ट्रीय राजनीति में 2014 के बाद नया विस्तार पाया और 2026 में 25 वर्ष पूरे किए। मोदी ने इस अवसर को सत्ता के लंबे कार्यकाल के उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि जनता के विश्वास के प्रति कृतज्ञता और आगे की जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत किया।

 

जनसेवा के 25 वर्षों का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यही है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम निर्णय जनता का होता है। मोदी ने अपने संबोधन में इसी जनविश्वास को अपनी यात्रा का आधार बताया। अब उनके सामने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य है। 25 वर्ष की सेवा पूरी होने के साथ उनके राजनीतिक जीवन का एक अध्याय पूरा हुआ है, लेकिन उनकी घोषित प्राथमिकताओं के अनुसार राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत की यात्रा को अभी लंबा रास्ता तय करना है।