BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
National

‘मन की बात’ के 12 साल: स्वदेशी, जनभागीदारी और आत्मनिर्भर भारत को नई दिशा

‘मन की बात’ का पहला प्रसारण 3 अक्टूबर 2014 को विजयादशमी के अवसर पर हुआ था।

Few hours ago
7 min read
‘मन की बात’ के 12 साल: स्वदेशी, जनभागीदारी और आत्मनिर्भर भारत को नई दिशा

राजीव त्रिपाठी ✅

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ भारतीय जनसंचार, जनभागीदारी और सामाजिक जागरूकता का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। 25 अक्टूबर 2026 का प्रसारण इस दृष्टि से विशेष महत्व रखता है कि अक्टूबर 2014 में शुरू हुई इस पहल ने अपने 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवधि में कार्यक्रम के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण विकास, नवाचार, स्थानीय उद्यमिता, सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों को राष्ट्रीय विमर्श में स्थान मिला है। कार्यक्रम की विशेषता यह रही है कि इसमें सरकारी योजनाओं के साथ-साथ सामान्य नागरिकों की उपलब्धियों, सामुदायिक प्रयासों और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली पहलों को भी प्रमुखता दी जाती रही है।

 

25 अक्टूबर के संबोधन के संबंध में उपलब्ध विवरण के अनुसार, प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ की 12 वर्षों की यात्रा, त्योहारों के दौरान स्वदेशी उत्पादों के प्रति बढ़ते आकर्षण और भारतीय कृषि उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया। हालांकि इस प्रसारण के विशिष्ट उद्धरणों, उदाहरणों और एपिसोड संख्या की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। इसलिए कार्यक्रम की व्यापक उपलब्धियों और उसके आर्थिक-सामाजिक महत्व को प्रमाणित ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर समझना भी जरूरी है।

 

‘मन की बात’ का पहला प्रसारण 3 अक्टूबर 2014 को विजयादशमी के अवसर पर हुआ था। उस समय प्रधानमंत्री ने रेडियो के माध्यम से देशवासियों से सीधे संवाद की पहल की थी। डिजिटल संचार के तेजी से विस्तार के बावजूद रेडियो को माध्यम चुनने के पीछे देश के दूरदराज क्षेत्रों, ग्रामीण समुदायों और विभिन्न आयु वर्गों तक पहुंचने की संभावना महत्वपूर्ण थी। पिछले 12 वर्षों में यह कार्यक्रम रेडियो से आगे बढ़कर टेलीविजन, डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्लिकेशन और सोशल मीडिया के माध्यम से भी व्यापक श्रोताओं तक पहुंचा है।

 

कार्यक्रम की लोकप्रियता और सामाजिक प्रभाव को समझने के लिए वर्ष 2023 में भारतीय प्रबंधन संस्थान, रोहतक द्वारा प्रसार भारती के लिए किए गए अध्ययन के आंकड़े महत्वपूर्ण हैं। इस अध्ययन के अनुसार, लगभग 96 प्रतिशत भारतीय कार्यक्रम से परिचित थे, जबकि करीब 23 करोड़ लोगों ने इसे नियमित रूप से सुनने की जानकारी दी थी। अध्ययन में लगभग 100 करोड़ लोगों द्वारा कम से कम एक बार कार्यक्रम सुनने का अनुमान भी सामने आया था। ये आंकड़े 2023 के अध्ययन से संबंधित हैं, इसलिए इन्हें अक्टूबर 2026 की ताजा श्रोता संख्या नहीं माना जाना चाहिए। फिर भी ये रेडियो आधारित जनसंवाद की व्यापक पहुंच का संकेत देते हैं।

 

प्रधानमंत्री के संबोधनों में ‘वोकल फॉर लोकल’ का विचार लगातार महत्वपूर्ण रहा है। इसका मूल उद्देश्य भारतीय उपभोक्ताओं को स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तुओं के प्रति जागरूक करना और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना है। भारत जैसे विशाल देश में यह पहल केवल खरीदारी की प्राथमिकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण रोजगार, हस्तशिल्प, लघु उद्योग, कृषि प्रसंस्करण और स्थानीय व्यापार से भी जुड़ी हुई है। जब उपभोक्ता स्थानीय कारीगरों, बुनकरों, कुम्हारों, महिला स्वयं सहायता समूहों और छोटे उद्यमियों के उत्पाद खरीदते हैं, तो इसका आर्थिक लाभ सीधे स्थानीय समुदायों तक पहुंच सकता है।

 

त्योहारों के दौरान स्वदेशी उत्पादों की मांग बढ़ना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। दीपावली, धनतेरस और अन्य पर्वों पर सजावटी सामग्री, मिट्टी के दीपक, वस्त्र, खाद्य उत्पाद, उपहार और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की बड़े पैमाने पर खरीदारी होती है। ऐसे अवसरों पर स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने से छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त कारोबार प्राप्त हो सकता है। हालांकि स्थानीय उत्पादों की बिक्री में वास्तविक वृद्धि का आकलन करने के लिए क्षेत्रवार बिक्री, उत्पादन और रोजगार के तुलनात्मक आंकड़ों की आवश्यकता होती है।

 

भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र का आकार इस संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। एमएसएमई मंत्रालय की वर्ष 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, देश में लगभग 6.34 करोड़ एमएसएमई होने का अनुमान था, जिनसे करीब 11 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता था। यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था में उत्पादन, रोजगार और निर्यात का प्रमुख आधार है। स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने वाली पहलें इस विशाल उद्यमी समुदाय के लिए अवसर पैदा कर सकती हैं। विशेष रूप से छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादकों को बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता प्रमाणन, डिजिटल विपणन और परिवहन सुविधाएं मिलने से उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सकती है।

 

भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच भी आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा का महत्वपूर्ण पक्ष है। उपलब्ध संबोधन विवरण में बिहार के पूर्णिया के मखाने के ग्रीस पहुंचने और कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल के मालदीव निर्यात होने का उल्लेख किया गया है। इन विशिष्ट व्यापारिक उदाहरणों की आधिकारिक पुष्टि अलग से आवश्यक है, लेकिन ये भारतीय कृषि उत्पादों के लिए विदेशी बाजारों की संभावनाओं को रेखांकित करते हैं।

 

बिहार का मखाना उत्पादन देश की विशिष्ट कृषि पहचान का हिस्सा है। मखाना मुख्यतः बिहार के मिथिला और सीमांचल क्षेत्रों में उत्पादित होता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से जुड़े प्रकाशित अनुमानों में बिहार की देश के मखाना उत्पादन में अत्यधिक प्रमुख हिस्सेदारी बताई गई है। मखाने की बढ़ती मांग का संबंध स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, पौष्टिक खाद्य पदार्थों की लोकप्रियता और मूल्यवर्धित उत्पादों के विस्तार से भी है। यदि उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों, प्रसंस्करण तकनीक और निर्यात व्यवस्था का लाभ मिले, तो किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

 

कर्नाटक का कलबुर्गी क्षेत्र अरहर उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहां की अरहर दाल को भौगोलिक संकेतक अर्थात जीआई पहचान भी प्राप्त है। जीआई पहचान किसी उत्पाद को उसकी विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति और उससे जुड़ी गुणवत्ता या प्रतिष्ठा के आधार पर अलग पहचान प्रदान करती है। ऐसे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थापित करने के लिए केवल निर्यात समझौते पर्याप्त नहीं हैं। गुणवत्ता की निरंतरता, प्रसंस्करण, भंडारण, परीक्षण और समयबद्ध आपूर्ति भी आवश्यक है।

 

भारत के कृषि निर्यात की व्यापक स्थिति इस संभावनाशील बाजार को समझने में सहायक है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अर्थात एपीडा के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में उसके अंतर्गत आने वाले कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात लगभग 22.38 अरब अमेरिकी डॉलर रहा था। यह आंकड़ा दर्शाता है कि कृषि आधारित वस्तुएं भारतीय विदेश व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हालांकि इस राशि में सभी कृषि उत्पाद शामिल नहीं हैं और इसे भारत के कुल कृषि निर्यात के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

 

‘मन की बात’ का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू सामान्य नागरिकों के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। विभिन्न प्रसारणों में स्वच्छता अभियान चलाने वाले नागरिकों, जल संरक्षण करने वाले ग्रामीण समुदायों, पारंपरिक कलाओं को जीवित रखने वाले शिल्पकारों और नवाचार करने वाले युवाओं की उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है। इससे ऐसे प्रयासों को व्यापक सामाजिक पहचान मिल सकती है, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में राष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त प्रचार नहीं मिल पाता।

 

कार्यक्रम का सामाजिक महत्व इस बात में भी निहित है कि यह नागरिकों को केवल सरकारी नीतियों के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार के रूप में प्रस्तुत करता है। स्वच्छ भारत अभियान, जल संरक्षण, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली और स्थानीय उद्यमिता जैसे विषय नागरिकों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी से सीधे जुड़े हैं। इन क्षेत्रों में स्थायी सफलता केवल सरकारी निवेश से नहीं, बल्कि जनसहयोग, स्थानीय प्रशासन की सक्रियता और सामुदायिक निगरानी से संभव है।

 

फिर भी किसी जनसंचार कार्यक्रम की वास्तविक सफलता का मूल्यांकन केवल श्रोता संख्या या लोकप्रियता से नहीं किया जा सकता। यह देखना भी आवश्यक है कि उसके संदेशों से नागरिक व्यवहार, स्थानीय उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक भागीदारी में कितना ठोस परिवर्तन हुआ। इसके लिए स्वतंत्र अध्ययन, विश्वसनीय आर्थिक आंकड़े और दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण आवश्यक है।

 

‘मन की बात’ के 12 वर्षों की यात्रा का व्यापक संदेश यही है कि राष्ट्र का विकास केवल बड़े औद्योगिक निवेश, सरकारी योजनाओं और आधारभूत संरचनाओं से नहीं, बल्कि सामान्य नागरिकों के छोटे-छोटे प्रयासों से भी आगे बढ़ता है। स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन, किसानों को वैश्विक बाजार, युवाओं को नवाचार के अवसर और समाज में सकारात्मक कार्य करने वालों को सम्मान मिलना इस विचार के प्रमुख आधार हैं। आने वाले वर्षों में कार्यक्रम की सार्थकता इस बात से भी तय होगी कि जनसंवाद से उत्पन्न प्रेरणा कितनी प्रभावी ढंग से रोजगार, आय, सामाजिक जागरूकता और स्थायी विकास के परिणामों में परिवर्तित होती है।

 

Related News