LVM3-M6 की सफल उड़ान: 90 सेकंड की सावधानी भरी देरी के बाद ISRO ने ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को कक्षा में भेजा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार सुबह अपने हैवी-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल LVM3-M6 के जरिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। प्रक्षेपण से ठीक पहले...
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार सुबह अपने हैवी-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल LVM3-M6 के जरिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। प्रक्षेपण से ठीक पहले 90 सेकंड की एहतियाती देरी के बाद रॉकेट ने सुबह 8:55:30 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC), श्रीहरिकोटा से सफल उड़ान भरी।
क्यों हुई लॉन्च में देरी
ISRO के अनुसार, लॉन्च को मूल रूप से सुबह 8:54 बजे निर्धारित किया गया था, लेकिन उड़ान पथ में संभावित स्पेस डेब्रिस या अन्य उपग्रह से टकराव की आशंका के चलते समय में हल्का बदलाव किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, आज के दौर में पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में बढ़ती गतिविधियों के कारण ऐसे जोखिमों का आकलन बेहद जरूरी हो गया है।
ISRO ने सोशल मीडिया मंच X पर संशोधित समय की पुष्टि करते हुए बताया कि सभी प्रणालियों की दोबारा जांच के बाद लॉन्च को हरी झंडी दी गई।
प्रधानमंत्री ने सराहा मिशन
लॉन्च के कुछ ही देर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर प्रतिक्रिया देते हुए ISRO की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम युवाओं की शक्ति से और अधिक उन्नत व प्रभावशाली बन रहा है।
प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि LVM3 की भरोसेमंद हैवी-लिफ्ट क्षमता गगनयान जैसे मानव अंतरिक्ष मिशनों, व्यावसायिक प्रक्षेपण सेवाओं के विस्तार और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। उनके अनुसार, यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन क्या है
ISRO द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, LVM3-M6/BlueBird Block-2 एक पूर्णतः व्यावसायिक मिशन है और यह LVM3 रॉकेट की छठी परिचालन उड़ान है। यह मिशन ISRO की व्यावसायिक इकाई NewSpace India Limited (NSIL) और अमेरिका की कंपनी AST SpaceMobile के बीच हुए समझौते के तहत संचालित किया गया।
LVM3 की तकनीकी क्षमता
ISRO का LVM3 एक तीन-चरणीय प्रक्षेपण यान है, जिसमें
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दो ठोस ईंधन वाले S200 स्ट्रैप-ऑन मोटर,
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एक तरल ईंधन कोर स्टेज (L110),
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और क्रायोजेनिक अपर स्टेज (C25) शामिल हैं।
करीब 43.5 मीटर ऊंचा और 640 टन वजनी यह रॉकेट जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में लगभग 4,200 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है। इससे पहले LVM3 चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वनवेब के दो मिशनों सहित कई अहम प्रक्षेपण सफलतापूर्वक कर चुका है।
वैश्विक कनेक्टिविटी की दिशा में कदम
समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 अगली पीढ़ी के लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रह समूह का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सीधे सामान्य मोबाइल फोन तक स्पेस-आधारित 4G और 5G कनेक्टिविटी पहुंचाना है। यह उपग्रह वॉयस कॉल, वीडियो, डेटा और मैसेजिंग सेवाओं को दुनिया के बड़े हिस्सों में उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन किया गया है।
आगे क्या होगा
लॉन्च के लगभग 15 मिनट बाद उपग्रह के रॉकेट से अलग होकर पृथ्वी की निचली कक्षा में अपनी निर्धारित कक्षा में स्थापित होने की उम्मीद है। मिशन से पहले ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने तिरुमला में श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में दर्शन कर सफलता की कामना की थी।
