इंदौर ने 8,534 लोगों की मानव श्रृंखला से नशे के विरुद्ध विश्व रिकॉर्ड बनाया
इंदौर पुलिस ने 8,534 लोगों की मानव श्रृंखला बनाकर नशे के विरुद्ध विश्व रिकॉर्ड बनाया। 'नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0' अभियान के तहत यह रिकॉर्ड दोहरे विश्व रिकॉर्ड की ओर एक कदम है।

द क्लिफ न्यूज़ | इंदौर | 20 जुलाई 2026
नशामुक्ति जनजागरूकता के क्षेत्र में इंदौर ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 8,534 लोगों की मानव श्रृंखला बनाकर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया है। मध्यप्रदेश पुलिस के 'नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0' अभियान के तहत इंदौर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा आयोजित इस विशाल जन-एकजुटता कार्यक्रम ने न केवल नशे के खिलाफ समाज को एक मंच पर लाया, बल्कि 7,100 लोगों की मानव श्रृंखला का अपना ही पिछला रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में आयोजित इस महत्वाकांक्षी अभियान को विभिन्न वर्गों से अभूतपूर्व जनसमर्थन प्राप्त हुआ। पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह के कुशल निर्देशन में सम्पन्न इस आयोजन में विद्यार्थियों, सामाजिक संस्थाओं, खिलाड़ियों, नगर सुरक्षा समिति के सदस्यों, पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों और आम नागरिकों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर नशामुक्त समाज का सशक्त संदेश दिया।
एक साथ दो विश्व रिकॉर्ड की ओर कदम
यह आयोजन केवल मानव श्रृंखला के निर्माण तक ही सीमित नहीं रहा। इसी कार्यक्रम के दौरान 8,534 से अधिक व्यक्तियों को नशे के गंभीर दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक वृहद सामूहिक जनजागरूकता कार्यक्रम भी संचालित किया गया। इस सामूहिक जागरूकता के लिए भी विश्व रिकॉर्ड का दावा प्रस्तुत किया गया है, जिससे इंदौर पुलिस कमिश्नरेट ने एक ही आयोजन में दो विश्व कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है।
वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से एडिटर अपूर्वा मेनन और पलाश शुक्ला ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को प्रमाणित किया। उन्होंने पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह को रिकॉर्ड प्रमाण-पत्र प्रदान कर इंदौर की इस ऐतिहासिक सफलता को आधिकारिक मान्यता दी।
नशे के विरुद्ध एकजुटता का आह्वान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने इस बात पर बल दिया कि नशा एक ऐसी सामाजिक बुराई है जो न केवल व्यक्ति के जीवन को, बल्कि उसके संपूर्ण परिवार और समाज को अंधकारमय बना देती है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे नशे की लत से स्वयं को बचाएं और अपने आसपास के लोगों को भी इसके विनाशकारी प्रभावों के प्रति सचेत करें।
श्री सिंह ने स्पष्ट किया कि नशे के विरुद्ध यह लड़ाई केवल पुलिस महकमे की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, सरकारी प्रशासन और सबसे महत्वपूर्ण, आम नागरिकों की एक साझा और सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के समन्वित और निरंतर प्रयासों से ही एक स्वस्थ व नशामुक्त समाज का निर्माण संभव हो सकेगा।
इस अवसर पर, पुलिस आयुक्त ने उपस्थित हजारों प्रतिभागियों को नशे से दूर रहने की सामूहिक प्रतिज्ञा भी दिलाई। सभी प्रतिभागियों ने स्वयं नशामुक्त रहने, अपने परिवार और मित्रों को जागरूक करने तथा नशामुक्त इंदौर और नशामुक्त मध्यप्रदेश के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।
समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता
इस ऐतिहासिक और विशाल जन-आयोजन में पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगणों के साथ-साथ विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आर.के. सिंह, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मयंक अवस्थी, विभिन्न पुलिस उपायुक्त, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त, और थाना प्रभारियों सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल थे।
इसके अतिरिक्त, पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज, आरएपीटीसी, विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थी, शिक्षक, मेडिकल कॉलेज के प्रशिक्षु चिकित्सक, फिजिकल अकादमी के खिलाड़ी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, नगर सुरक्षा समिति के सदस्य, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, मीडिया प्रतिनिधि और हजारों आम नागरिकों ने कार्यक्रम में भाग लेकर इसे एक जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान किया। इस व्यापक भागीदारी ने नशे के खिलाफ लड़ाई में समाज की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाया।
जनभागीदारी से नशामुक्ति अभियान को मजबूती
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 15 से 30 जुलाई तक चलाए जा रहे 'नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0' अभियान के तहत पूरे प्रदेश में स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी बस्तियों में सघन जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं और आमजन को नशे के दुष्परिणामों के बारे में शिक्षित करना और समाज की सक्रिय और सहभागिता से एक नशामुक्त मध्यप्रदेश का निर्माण करना है।
इंदौर द्वारा स्थापित यह विश्व रिकॉर्ड केवल एक संख्यात्मक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब पुलिस और समाज किसी भी सामाजिक बुराई के उन्मूलन के लिए एकजुट होकर खड़े होते हैं, तो जन-जागरूकता एक शक्तिशाली जनआंदोलन का रूप धारण कर लेती है। इंदौर का यह आयोजन न केवल नशामुक्त भारत बल्कि नशामुक्त मध्यप्रदेश की दिशा में जनसहभागिता और सामूहिक संकल्प के एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में स्थापित हुआ है।
