भोपाल में ब्राह्मण समाज का विरोध प्रदर्शन तेज, IAS अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर टकराव
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने एक बार फिर प्रदर्शन किया और एक IAS अधिकारी के खिलाफ कड़ी...
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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने एक बार फिर प्रदर्शन किया और एक IAS अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई। पिछले महीने दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान को लेकर प्रदर्शनकारियों ने अधिकारी को बर्खास्त करने और गिरफ्तार करने की मांग की, जिसके चलते शहर के मध्य इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।
रोशनपुरा चौराहे पर बढ़ा तनाव
प्रदर्शनकारी रोशनपुरा चौराहे पर एकत्र हुए और मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने का प्रयास किया। जैसे ही भीड़ आगे बढ़ी, पुलिस ने रास्ता रोक लिया। स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।
प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और कई प्रदर्शनकारियों को एहतियातन पुलिस वाहनों में बैठाकर मौके से हटाया गया।
किस बयान को लेकर विवाद?
प्रदर्शन का कारण 23 नवंबर को दिया गया एक बयान है। आरोप है कि IAS अधिकारी संतोष वर्मा ने भोपाल में आयोजित अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (AJAKS) के राज्य स्तरीय सम्मेलन के दौरान ब्राह्मण समाज को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।
इस बयान के बाद न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी इसकी आलोचना हुई।
सरकार और प्रशासन की कार्रवाई
राज्य सरकार ने पहले ही IAS अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। अधिकारियों के अनुसार, उनके जवाब से सरकार संतुष्ट नहीं हुई।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 11 दिसंबर को इस मामले का संज्ञान लिया, जिसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को IAS अधिकारी को सेवा से बर्खास्त करने का प्रस्ताव भेज दिया है।
पुलिस का पक्ष
टीटी नगर थाना पुलिस ने स्पष्ट किया कि रविवार के प्रदर्शन के संबंध में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस का कहना है कि हालात को नियंत्रण में रखने के लिए केवल भीड़ प्रबंधन के कदम उठाए गए।
सामाजिक और राजनीतिक असर
इस मामले ने प्रशासनिक जवाबदेही, अभिव्यक्ति की सीमाएं और सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जानकारों का मानना है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी के बयान से समाज के एक वर्ग में आक्रोश फैलना सरकार और नौकरशाही—दोनों के लिए गंभीर चुनौती है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
