हुक्म था कुछ और, हक़ीक़त बनी कुछ और: कुरवाई में नियमों की उड़ी धज्जियाँ
पुराने आदेशों और कर्मचारियों की पात्रता को लेकर दस्तावेजों में सामने आए गंभीर सवाल।

आयुक्तीय आदेश में तय व्यवस्था के बावजूद कुरवाई में प्रभार व्यवस्था पर उठे सवाल।
लेखा, स्टोर और स्थापना शाखाओं के प्रभार को लेकर शिकायतों ने बढ़ाई प्रशासनिक मुश्किलें।
शिकायतों के बीच कार्य-विभाजन में बदलाव, अब कार्रवाई और जांच पर टिकी नजरें।
द क्लिफ़ न्यूज़,कुरवाई(विदिशा)
नगर परिषद कुरवाई में मुख्य नगर पालिका अधिकारी के प्रभार से लेकर स्थापना, लेखा और स्टोर शाखाओं के कार्य-विभाजन तक प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वार्ड क्रमांक 10 के पार्षद इलयास मोहम्मद ने नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय के आयुक्त को अलग-अलग शिकायतें देकर आरोप लगाया है कि परिषद में वरिष्ठ अधिकारियों के लिखित निर्देशों के विपरीत प्रभार सौंपे गए हैं। शिकायतों में विशेष रूप से 26 मई 2026 के आयुक्तीय आदेश, 3 जुलाई 2026 के प्रभारी सीएमओ आदेश तथा 31 जुलाई 2026 के कार्य-विभाजन आदेश के बीच कथित विसंगतियों की जांच और संबंधित आदेश निरस्त करने की मांग की गई है।
मामले का एक प्रमुख बिंदु नगर परिषद कुरवाई के मुख्य नगर पालिका अधिकारी के प्रभार को लेकर है। संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास द्वारा 26 मई 2026 को जारी आदेश क्रमांक स्था.शा.-1/2026/17684 में राज्य नगरीय प्रशासनिक सेवा के रिक्त पदों पर प्रभार देने के लिए प्रक्रिया निर्धारित की गई है। आदेश में कहा गया है कि ऐसे रिक्त पदों के संबंध में संभाग स्तर से कार्रवाई न की जाए और प्रस्ताव संचालनालय को भेजे जाएं। इसमें पहले उसी जिले में पदस्थ संबंधित राज्य सेवा के अधिकारी, उसके बाद उसी जिले के पात्र फीडर कैडर कर्मचारियों और उनके उपलब्ध न होने पर संभाग में उपलब्ध पात्र कर्मचारियों की सूची सहित प्रस्ताव भेजने की व्यवस्था बताई गई है।
इसी आदेश के अगले हिस्से में यह भी कहा गया है कि निर्धारित प्रावधानों से अलग मुख्य नगर पालिका अधिकारी, यांत्रिकी, वित्त अधिकारियों और अन्य रिक्त पदों के प्रभार से संबंधित जारी आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाते हैं। आदेश में यह चेतावनी भी दी गई है कि अधिकारिता से बाहर जारी आदेश के तहत निर्धारित पदक्रम से अलग किसी कर्मचारी द्वारा कार्य किए जाने पर वित्तीय अनियमितता और कदाचार की स्थिति बन सकती है तथा ऐसे संव्यवहार शून्यवत माने जाएंगे।
इसके बावजूद 3 जुलाई 2026 को कार्यालय संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल संभाग से एक आदेश जारी किया गया। इस आदेश में स्थानांतरण के बाद रिक्त हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी पदों पर प्रशासनिक कार्य सुविधा के आधार पर विभिन्न अधिकारियों और कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया। इसी सूची में सहायक संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल संभाग, भोपाल के पद पर पदस्थ श्रीमती गीता मांझी को नगर परिषद कुरवाई के मुख्य नगर पालिका अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
पार्षद इलयास मोहम्मद ने 25 अगस्त 2026 को आयुक्त को दी शिकायत में इसी बिंदु को प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि 26 मई के आदेश के बाद भी यदि 3 जुलाई को संभाग स्तर से प्रभार दिया गया तो इसकी अधिकारिता और उसके आधार की जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि संचालनालय से कोई पृथक अनुमति या निर्देश प्राप्त हुआ था तो उसकी प्रमाणित प्रति और संबंधित मूल पत्रावली सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध कराई जाए। शिकायत में 3 जुलाई के आदेश से पहले तैयार नोटशीट, प्रस्ताव, पत्राचार और अनुमोदनों की जांच की मांग भी की गई है।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। नगर परिषद कुरवाई से 31 जुलाई 2026 को जारी कार्य-विभाजन आदेश में विभिन्न शाखाओं के प्रभार अलग-अलग कर्मचारियों को सौंपे गए। इस आदेश में स्थापना शाखा का प्रभार हर्षित एलिया, लेखा शाखा का प्रभार सगीर खान और स्टोर शाखा का प्रभार रेहान वेग को दिए जाने का उल्लेख है। लोक निर्माण, राजस्व, योजना, जन्म-मृत्यु और अन्य शाखाओं के लिए भी कर्मचारियों की जिम्मेदारियां निर्धारित की गईं।
इस कार्य-विभाजन को लेकर पार्षद की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संवेदनशील शाखाओं में ऐसे कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई, जिनकी पात्रता अथवा वर्तमान पद को लेकर सवाल हैं। शिकायतकर्ता ने विशेष रूप से हर्षित एलिया के संबंध में कहा है कि उनकी नियुक्ति और सेवा संबंधी प्रकरण की विभागीय जांच पहले से चल रही है। हालांकि उपलब्ध दस्तावेजों में जांच लंबित होने की पुष्टि होती है, लेकिन जांच में अंतिम रूप से कोई दोष सिद्ध हुआ है, ऐसा दस्तावेजों से स्थापित नहीं होता।
हर्षित एलिया के संबंध में 6 जून 2025 को संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय से जारी पत्र में संचालनालय के 1 मई 2025 के पत्र का हवाला देते हुए शिकायत की जांच कर सात दिन में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 28 जुलाई 2025 को कलेक्टर विदिशा कार्यालय की ओर से भी उनकी नियुक्ति, स्थानांतरण, सेवा में पुनः रखे जाने और संबंधित शिकायतों से जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे। इससे इतना स्पष्ट है कि उनके सेवा प्रकरण को लेकर विभागीय स्तर पर जांच एवं अभिलेख परीक्षण की प्रक्रिया चली थी। जांच का अंतिम निष्कर्ष क्या रहा, यह उपलब्ध दस्तावेजों से स्पष्ट नहीं है।
इसी कर्मचारी से जुड़ा एक पुराना प्रशासनिक आदेश भी सामने आया है। नगर परिषद कुरवाई के 18 दिसंबर 2023 के आदेश में स्थापना शाखा का प्रभार हर्षित एलिया को दिया गया था। उससे पहले 18 जून 2023 के कार्यालयीन पत्र के माध्यम से आदिल खान को स्थापना एवं लेखा शाखा का प्रभार सौंपा गया था। बाद में कार्यसुविधा के आधार पर स्थापना शाखा का प्रभार हर्षित एलिया को सौंपा गया था। यह दस्तावेज यह संकेत देता है कि स्थापना शाखा में उनका कार्य पूर्व में भी रहा है, हालांकि वर्तमान प्रभार की वैधता अलग प्रशासनिक आदेशों और पात्रता नियमों के आधार पर निर्धारित होगी।
लेखा शाखा को लेकर भी विभागीय निर्देश महत्वपूर्ण हैं। संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास ने 6 अगस्त 2025 के आदेश में कहा था कि लेखापाल का प्रभार यथासंभव लेखा परीक्षा उत्तीर्ण, लेखा कार्य के लिए अपेक्षित योग्यता रखने वाले अथवा वरिष्ठ लिपिक को दिया जाना सुनिश्चित किया जाए। आदेश में यह भी कहा गया कि निर्देशों का पालन नहीं होने पर संबंधित मुख्य नगर पालिका अधिकारी अथवा प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
31 जुलाई के कुरवाई कार्य-विभाजन आदेश में लेखा शाखा का प्रभार सगीर खान को दिया गया था। शिकायत में उन्हें चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी बताते हुए इस प्रभार को नियम विरुद्ध बताया गया है। हालांकि बाद में उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार इस मामले में संशोधित व्यवस्था की गई। प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक विवाद सामने आने के बाद सीएमओ गीता मांझी ने लेखा शाखा का प्रभार अपने पास रख लिया और सगीर खान को सीएमओ के निर्देशन में लेखा शाखा से संबंधित लिपिकीय कार्य तथा दस्तावेजों के संधारण एवं संरक्षण का दायित्व दिया गया। इस प्रकार लेखा शाखा से संबंधित मूल प्रभार में परिवर्तन किया गया, जबकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि व्यवहार में संबंधित कर्मचारी से कार्य कराया जाना जारी है।
स्टोर शाखा को लेकर भी 14 जुलाई 2026 का संचालनालय आदेश महत्वपूर्ण है। इस आदेश में सामान्य प्रशासन विभाग की 22 मई 2026 की स्थानांतरण नीति का हवाला देते हुए कहा गया है कि क्रय, स्टोर और स्थापना शाखा में कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों को सामान्यतः तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद अन्य शाखा अथवा अन्य स्थान पर पदस्थ किया जाए। साथ ही वित्तीय अनियमितता, शासकीय धन के दुरुपयोग या गबन के मामलों में प्रथमदृष्टया दोषी पाए गए कर्मचारियों को ऐसे पदों से हटाने और दोबारा ऐसे पद पर पदस्थ न करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि रेहान वेग लगभग आठ वर्षों से स्टोर शाखा का कार्य देख रहे हैं और इसके बावजूद उन्हें 31 जुलाई के आदेश में फिर स्टोर शाखा का प्रभार दिया गया। उनका कहना है कि संबंधित कर्मचारी का मूल पद फायरमैन है और स्टोर जैसे संवेदनशील कार्य के लिए पात्र कर्मचारियों की उपलब्धता के बावजूद उन्हें यह जिम्मेदारी देना 14 जुलाई के संचालनालय आदेश की भावना के विपरीत है। दूसरी ओर प्रभारी सीएमओ गीता मांझी ने प्रकाशित प्रतिक्रिया में कहा था कि स्टोर शाखा का कार्य रेहान वेग करीब आठ वर्षों से देख रहे हैं और अनुभव के आधार पर उनका प्रभार यथावत रखा गया है।
इस पूरे मामले में प्रशासनिक अधिकारिता का प्रश्न भी महत्वपूर्ण है। 3 जुलाई के आदेश पर संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल संभाग नीलेश दुबे के हस्ताक्षर हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार उसी आदेश में विभिन्न निकायों के रिक्त सीएमओ पदों पर अतिरिक्त प्रभार दिए गए थे। वहीं 26 मई के आयुक्तीय आदेश में संभाग स्तर से ऐसे प्रभारों के संबंध में कार्रवाई न करने और प्रस्ताव संचालनालय भेजने का निर्देश दर्ज है। इसलिए दोनों आदेशों के बीच प्रशासनिक सामंजस्य अथवा बाद में जारी किसी अनुमति/निर्देश की मौजूदगी इस विवाद के समाधान के लिए महत्वपूर्ण होगी।
संयुक्त संचालक नीलेश दुबे ने प्रकाशित प्रतिक्रिया में कहा था कि स्थानीय स्तर पर व्यवस्था और आवश्यकता के अनुसार नगर परिषद सीएमओ अपने कार्य के लिए सक्षम हैं तथा यदि कोई विसंगति सामने आती है तो उसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर वैधानिक कार्रवाई होगी। प्रभारी सीएमओ गीता मांझी ने भी कार्य-विभाजन को नियमों के अनुरूप बताया था।
पार्षद इलयास मोहम्मद ने 17 अगस्त 2026 को आयुक्त संकेत भोंडवे को एक अन्य शिकायत देकर स्थापना, लेखा और स्टोर शाखाओं के प्रभार की जांच तथा संबंधित कार्रवाई की मांग की। इस शिकायत पर 19 अगस्त को नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय की आवक मुहर दर्ज है। 25 अगस्त की दूसरी शिकायत पर संचालनालय की आवक 3 सितंबर 2026 की दर्ज है।
शिकायतकर्ता ने अपनी मांगों में 31 जुलाई के कार्य-विभाजन आदेश की जांच, संबंधित कर्मचारियों की पात्रता एवं मूल पद की जांच, 14 जुलाई और 6 अगस्त 2025 के संचालनालय निर्देशों के अनुपालन का परीक्षण तथा नियम विरुद्ध पाए जाने वाले प्रभारों को निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने 3 जुलाई के सीएमओ प्रभार आदेश की भी जांच कर उसे निरस्त करने तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संचालनालय स्तर से नया आदेश जारी करने की मांग की है।
पूरे प्रकरण में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि 26 मई 2026 के आयुक्तीय आदेश के बाद 3 जुलाई को संभाग स्तर से कुरवाई के सीएमओ का अतिरिक्त प्रभार देने के लिए क्या कोई पृथक सक्षम अनुमति या बाद का आदेश जारी हुआ था। इसी तरह 31 जुलाई के कार्य-विभाजन में स्थापना, लेखा और स्टोर शाखाओं के लिए कर्मचारियों का चयन किन नियमों, पात्रता और प्रशासनिक आधार पर किया गया, यह भी अभिलेखों की जांच से स्पष्ट हो सकता है।
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह मामला केवल कर्मचारियों के कार्य-विभाजन का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि संचालनालय के स्पष्ट निर्देशों, संभागीय स्तर पर जारी आदेशों और नगर परिषद स्तर पर किए गए कार्य-विभाजन के बीच सामंजस्य तथा प्रशासनिक अधिकारिता की जांच का विषय बन गया है। अंतिम स्थिति संबंधित विभागीय जांच, मूल पत्रावली, नोटशीट और सक्षम अधिकारियों के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
