खतरनाक स्तर पर पहुंचा प्रदूषण: DND फ्लाईवे पर जहरीली धुंध, GRAP-4 के तहत सख्त वाहन जांच
गुरुवार सुबह दिल्ली–नोएडा सीमा पर DND फ्लाईवे और चिल्ला बॉर्डर क्षेत्र घने जहरीले स्मॉग की चपेट में नजर आए। चिल्ला बॉर्डर पर वायु गुणवत्ता सूचकांक...

गुरुवार सुबह दिल्ली–नोएडा सीमा पर DND फ्लाईवे और चिल्ला बॉर्डर क्षेत्र घने जहरीले स्मॉग की चपेट में नजर आए। चिल्ला बॉर्डर पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) करीब 490 दर्ज किया गया, जो ‘खतरनाक’ श्रेणी में आता है। घटी हुई दृश्यता के बीच दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें GRAP के स्टेज-4 के तहत दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की सघन जांच में जुटी रहीं।
मौके पर तैनात दिल्ली परिवहन विभाग के अधिकारी दीपक ने बताया कि दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-BS6 वाणिज्यिक और निजी वाहनों की सख्ती से जांच की जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 20,000 रुपये का चालान किया जा रहा है या उन्हें यू-टर्न लेने को मजबूर किया जा रहा है। बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) वाले वाहनों पर भी जुर्माना लगाया जा रहा है। जांच के लिए दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर वाहनों की गति धीमी कर दी है।
यूपी ट्रैफिक पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पुराने और BS-6 के नीले स्टिकर के बिना दिखने वाले वाहनों को रोका जा रहा है। साथ ही 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों, खासकर BS-III या उससे नीचे के मानकों वाले वाहनों पर भी कार्रवाई के निर्देश हैं।
फरीदाबाद निवासी राकेश, जिनकी BS-3 हुंडई क्रेटा को रोका गया, ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रदूषण पर नियंत्रण सरकार नहीं कर पा रही है और जुर्माना आम लोगों से वसूला जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब निजी वाहनों की जांच हो रही है तो सरकारी बसों के उत्सर्जन की जांच क्यों नहीं की जा रही।
अधिकारियों के अनुसार, पोर्टेबल मशीनों की मदद से मौके पर ही वाहन का पंजीकरण नंबर डालकर BS मानक और PUCC की वैधता की तुरंत जांच की जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक सर्दियों में परिवहन क्षेत्र से PM2.5 प्रदूषण का 20 से 40 प्रतिशत योगदान होता है। दिल्ली-एनसीआर के 2.88 करोड़ वाहनों में से 93 प्रतिशत हल्के वाहन और दोपहिया हैं, जिनमें करीब 37 प्रतिशत BS-III या उससे पुराने हैं, जो कई गुना अधिक प्रदूषक उत्सर्जन करते हैं।
परिवहन अधिकारी दीपक ने कहा कि मीडिया के जरिए लोगों को वाहन प्रदूषण के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। वैकल्पिक रास्तों से बचने की कोशिश करने वालों पर भी नजर रखी जा रही है और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस व परिवहन विभाग की टीमें हर चेकपॉइंट पर तैनात हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनजागरूकता से ही वाहन प्रदूषण से लड़ाई संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं। वाहनों से करीब 40 प्रतिशत PM2.5 प्रदूषण होता है और मौजूदा PUC प्रणाली कणीय पदार्थ को सही ढंग से मापने में असफल है। पूर्व परिवहन आयुक्त अनिल छिक्कारा से कहा कि टेलपाइप उत्सर्जन की व्यावहारिक जांच, स्क्रैपेज नीति और एक समर्पित प्रदूषण टास्क फोर्स की सख्त जरूरत है। उन्होंने अंतरराज्यीय समन्वय की कमी और अंतिम समय पर लिए जाने वाले फैसलों को भी प्रदूषण नियंत्रण में बड़ी बाधा बताया।
