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CBSE ने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा के वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन की समय-सीमा 7 जून तक बढ़ाई

सीबीएसई ने साइबर हमलों के कारण आ रही तकनीकी दिक्कतों के बाद कक्षा 12वीं के अंकों के वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के आवेदन की समय-सीमा को...

Jun 6
4 min read
CBSE ने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा के वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन की समय-सीमा 7 जून तक बढ़ाई

मुख्य बिंदु (Top Summary)

  • क्या हुआ: सीबीएसई (CBSE) ने कक्षा 12वीं के अंकों के वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन आवेदनों की समय-सीमा को 24 घंटे के लिए बढ़ा दिया है।
  • यह क्यों महत्वपूर्ण है: यह फैसला बोर्ड के डिजिटल पोर्टल पर हुए साइबर हमलों के बाद लिया गया है, जिससे सर्वर पर लोड बढ़ गया और धुंधली या गायब कॉपियों को लेकर छात्र परेशान हो गए थे।
  • क्या बदलाव हुआ: छात्र अब 7 जून की आधी रात तक अपने आवेदन ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।
  • कौन प्रभावित है: कक्षा 12वीं के वे छात्र जो अंकों के वेरिफिकेशन या अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई कॉपियां पाना चाहते हैं।

संशोधित शेड्यूल और समय-सीमा में विस्तार

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शुक्रवार को कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए अंकों के वेरिफिकेशन और उत्तर पुस्तिकाओं के री-इवैल्यूएशन के आवेदन जमा करने की समय-सीमा एक दिन बढ़ाने की घोषणा की। यह सुविधा केवल उन उम्मीदवारों के लिए है जिन्होंने अपनी मूल्यांकित कॉपियों की स्कैन की गई प्रतियां प्राप्त करने का विकल्प चुना था।

नए शेड्यूल के अनुसार, छात्र अब 7 जून की आधी रात तक अपने आवेदन ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। इससे पहले आवेदन करने की अंतिम तिथि 6 जून की आधी रात तक तय की गई थी।

सीबीएसई के अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन प्रणाली का उपयोग करते समय छात्रों को अतिरिक्त समय और सुविधा देने के लिए यह विस्तार 'छात्रों के हित में' दिया गया है।

साइबर हमले और पोर्टल पर आई बाधाएं

तारीख बढ़ाने का यह निर्णय बोर्ड के 'पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल' को निशाना बनाकर किए गए कई समन्वित (coordinated) साइबर हमलों की पुलिस जांच के बीच आया है। यह सिस्टम देश भर के लाखों उम्मीदवारों के अनुरोधों को संभालता है।

व्यापक सुरक्षा परीक्षण के बाद 2 जून को सुबह लगभग 4:30 बजे पोर्टल को लाइव किया गया था। हालांकि, जल्द ही छात्रों ने ऑनलाइन स्टूडेंट मैनेजमेंट (OSM) सिस्टम में दिक्कतों को लेकर सोशल मीडिया पर चिंता जताई, जिसमें धुंधली उत्तर पुस्तिकाएं और पन्ने गायब होने की शिकायतें शामिल थीं।

बोर्ड ने खुलासा किया कि प्लेटफॉर्म को शुरू होते ही भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ा। लाइव होने के महज दो मिनट के भीतर ही सिस्टम पर लगभग 15 लाख एक्सेस अनुरोध दर्ज किए गए और इसी दौरान 1 लाख से अधिक अनधिकृत प्रयासों को सफलतापूर्वक ब्लॉक किया गया।

आधिकारिक बयान और सुरक्षा उपाय

बोर्ड ने स्पष्ट किया कि ट्रैफिक में अचानक आई यह तेजी एक जानबूझकर किए गए हमले की ओर इशारा करती है। एक आधिकारिक ब्रीफिंग में, बोर्ड ने इस ट्रैफिक के बारे में टिप्पणी की:

"ट्रैफिक प्रोफाइल से पता चला कि इसमें समन्वित और भारी मात्रा में रिक्वेस्ट भेजी गईं जो DDoS-टाइप पैटर्न से मेल खाती हैं। हमारी सुरक्षा प्रणाली ने इसे सफलतापूर्वक रोक दिया।"

इसके अलावा, 3 जून को पीक आवर्स के दौरान वेबसाइट पर एक दुर्भावनापूर्ण डिनायल-ऑफ-सर्विस (DoS) हमला हुआ, जिसमें लगभग 38 लाख पैकेट भेजे गए थे। भारी लोड के बावजूद, तकनीकी टीमों ने तुरंत कार्रवाई की ताकि प्लेटफॉर्म पूरी तरह सुरक्षित और चालू रहे।

इन तकनीकी बाधाओं के बावजूद, सीबीएसई के पोस्ट-रिजल्ट शिकायत निवारण पोर्टल ने 4 जून तक 70,433 आवेदनों का निपटारा किया। इसमें अंकों के वेरिफिकेशन के लिए 7,314 और री-इवैल्यूएशन के लिए 63,119 आवेदन शामिल हैं।

दिल्ली पुलिस ने शुरू की आपराधिक जांच

साइबर सुरक्षा में इस सेंधमारी के बाद, दिल्ली पुलिस ने इस जटिल डिजिटल हमले की जांच के लिए एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। यह जांच सीबीएसई द्वारा दर्ज कराई गई एक आधिकारिक शिकायत के बाद शुरू की गई है।

इस मामले को औपचारिक रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66 और 43(f) के तहत दर्ज किया गया है। वर्तमान में इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस की विशेष इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट कर रही है।

आगे क्या होगा (What to Watch Next)

  • आगे चलकर, छात्रों को यह देखने के लिए पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल पर नजर रखनी चाहिए कि उनके वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन की स्थिति अपडेट हुई है या नहीं।
  • दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट DDoS और DoS साइबर हमलों के पीछे के दोषियों की पहचान करने के लिए अपनी जांच जारी रखेगी।
  • भविष्य में सेवाओं में किसी भी तरह की रुकावट को रोकने के लिए सीबीएसई के ऑनलाइन सिस्टम की सुरक्षा को कड़ा किया जा सकता है।