भोपाल कूच की चेतावनी: संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आंदोलन की रणनीति तय
किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए भोपाल में संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक संपन्न। 27 जुलाई को भोपाल के लिए कूच की घोषणा।

द क्लिफ न्यूज़ | इटारसी | 20 जुलाई 2026
किसानों की विभिन्न समस्याओं और उनके समाधान को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया है। नर्मदापुरम संभाग और आसपास के क्षेत्रों के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया, जहां आंदोलन की आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नरसिंहपुर जिला अध्यक्ष विमलेश पटेल सहित कई प्रमुख किसान नेताओं की उपस्थिति रही।
किसानों की लंबित मांगों, कृषि संबंधी ज्वलंत मुद्दों और इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों पर गहन मंथन किया गया। संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया कि वे 21 जुलाई को भोपाल स्थित कृषि आयुक्त कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्याओं से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपेंगे। इस ज्ञापन के माध्यम से शासन-प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा की गई है।
मांगों पर कार्रवाई के लिए दी गई समय सीमा
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि ज्ञापन सौंपने के बाद, वे सरकार को समस्याओं के निराकरण के लिए 23 जुलाई तक का समय देंगे। यह अवधि किसानों की प्रमुख चिंताओं को संबोधित करने और ठोस कदम उठाने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। बैठक में शामिल सभी किसान संगठनों ने इस बात पर जोर दिया कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर उनकी मांगों का संतोषजनक समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाएंगे।
आंदोलन को आगे बढ़ाने की कड़ी में, संयुक्त किसान मोर्चा ने 27 जुलाई को नर्मदापुरम से भोपाल के लिए एक बड़े विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस दिन किसान नर्मदा नदी का पूजन करेंगे और उसके बाद पैदल व संगठित रूप से भोपाल की ओर कूच करेंगे। इस मार्च का उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना और किसानों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाना है।
13 संगठनों की एकजुटता और भविष्य का संघर्ष
संयुक्त किसान मोर्चा, जिसमें कुल 13 किसान संगठन शामिल हैं, ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया है। नेताओं ने इस बात पर बल दिया कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी और जब तक उनकी जायज मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
बैठक में आगामी आंदोलन को सफल बनाने के लिए विभिन्न संगठनात्मक तैयारियों पर भी चर्चा हुई। इसमें अधिक से अधिक किसानों को आंदोलन से जोड़ना, जनसंपर्क बढ़ाना और जमीनी स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना शामिल है। किसान नेताओं का मानना है कि उनकी एकता और सामूहिक प्रयास ही उनकी मांगों को मनवाने की कुंजी है। यह बैठक किसानों की आवाज़ को शासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान खोजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
