BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
NationalBreaking News

दिल्ली में जहरीली धुंध की चादर: AQI 462 के साथ ‘सीवियर’ स्तर पर हवा, GRAP-4 लागू

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली रविवार सुबह घनी स्मॉग की परत में ढकी नजर आई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार सुबह 6 बजे दिल्ली का...

Dec 14
3 min read
दिल्ली में जहरीली धुंध की चादर: AQI 462 के साथ ‘सीवियर’ स्तर पर हवा, GRAP-4 लागू

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली रविवार सुबह घनी स्मॉग की परत में ढकी नजर आई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार सुबह 6 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 462 दर्ज किया गया, जो ‘सीवियर’ श्रेणी में आता है। शहर के सभी 40 एयर मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हालात बेहद खराब बने हुए हैं, जिससे जनस्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है।


शहर के हर कोने में ‘रेड अलर्ट’

CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के सभी निगरानी केंद्रों पर AQI ‘रेड जोन’ में है।

  • रोहिणी (उत्तर-पश्चिम दिल्ली): AQI 499, मुख्य प्रदूषक PM2.5

  • जहांगीरपुरी और विवेक विहार: AQI 495

  • पटपड़गंज (पूर्वी दिल्ली): AQI 488

पटपड़गंज और एनएच-24 जैसे इलाकों में दृश्यता काफी कम रही। लोगों को हेडलाइट जलाकर धीमी रफ्तार से वाहन चलाते देखा गया।


AQI क्या बताता है और ‘सीवियर’ कितना खतरनाक?

AQI हवा की गुणवत्ता और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को दर्शाने वाला पैमाना है। CPCB के अनुसार:

  • 0–50: अच्छा

  • 51–100: संतोषजनक

  • 101–200: मध्यम

  • 201–300: खराब

  • 301–400: बहुत खराब

  • 401–500: सीवियर (अत्यंत खतरनाक)

‘सीवियर’ स्तर पर हवा स्वस्थ लोगों के लिए भी नुकसानदेह मानी जाती है। डॉक्टर खुले में व्यायाम, लंबी सैर और अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह देते हैं, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और हृदय व श्वसन रोगियों को।


क्या AQI 500 से ऊपर जा सकता है?

भारत में AQI स्केल को 500 पर सीमित रखा गया है। यानी इससे ऊपर की स्थिति भी ‘सीवियर’ में ही दिखाई जाती है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (NIAS) के चेयर प्रोफेसर डॉ. गुफरान बेग के अनुसार, 400 से ऊपर AQI पहले ही बेहद खतरनाक होता है, इसलिए 900 जैसे आंकड़े दिखाने से केवल घबराहट बढ़ती है।
वहीं, पर्यावरण विशेषज्ञ सुनील दहिया का कहना है कि भले ही लंबी अवधि में असर समान माना जाए, लेकिन बहुत ऊंचे प्रदूषण स्तर पर तत्काल खतरे—जैसे अस्पताल में भर्ती होने की नौबत—काफी बढ़ जाते हैं।


प्रदूषण क्यों अचानक बढ़ा?

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के मुताबिक, दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने की मुख्य वजह कमजोर पश्चिमी विक्षोभ है, न कि केवल स्थानीय उत्सर्जन।
आयोग ने बताया कि हवा की रफ्तार कम होना, हवा की दिशा में बदलाव और निचली सतह पर नमी बढ़ने से प्रदूषक कण जमीन के पास फंस गए। सर्दियों में यही स्थितियां स्मॉग और कोहरे को जन्म देती हैं।


GRAP-4 लागू: क्या-क्या पाबंदियां लगीं

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए CAQM ने पहले GRAP-3 और फिर GRAP-4 लागू किया। इसके तहत:

  • गैर-जरूरी ट्रकों की दिल्ली में एंट्री पर रोक

  • BS-IV और उससे पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध

  • सभी निर्माण और तोड़फोड़ कार्य बंद

  • कक्षा 6 से 9 और 11 तक के छात्रों की कक्षाएं ऑनलाइन करने की सिफारिश

  • सरकारी और निजी कार्यालयों में कम से कम 50% वर्क फ्रॉम होम


क्यों अहम है यह स्थिति?

दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच जाता है। यह न केवल स्वास्थ्य संकट पैदा करता है, बल्कि ट्रैफिक, उड़ानों, स्कूलों और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान के बिना GRAP जैसे कदम केवल अस्थायी राहत दे सकते हैं।