AG-3 से सीधे ADPO पद पर पदोन्नति की प्रस्तावित DPC पर उठे सवाल
8 अक्टूबर को DPC प्रस्तावित, जबकि इसी विषय से संबंधित रिट हाईकोर्ट में लंबित।

द क्लिफ़ न्यूज़,भोपाल
मध्यप्रदेश अभियोजन विभाग में Assistant Grade-3 (AG-3) संवर्ग के कर्मचारियों को सीधे सहायक जिला लोक अभियोजक (ADPO), Class-2 अधिकारी के पद पर पदोन्नत किए जाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार इस संबंध में 8 अक्टूबर को DPC प्रस्तावित है। दूसरी ओर, इसी विषय से संबंधित एक रिट याचिका माननीय उच्च न्यायालय में लंबित है, जिसमें यह प्रश्न उठाया गया है कि क्या लिपिकीय संवर्ग से बिना किसी प्रतियोगी परीक्षा अथवा समान चयन प्रक्रिया के सीधे Class-2 के महत्वपूर्ण विधिक अधिकारी पद पर पदोन्नति दी जा सकती है।
मुद्दा किसी कर्मचारी की योग्यता का नहीं, चयन प्रक्रिया का है
ADPO का पद अभियोजन व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण पद है। ADPO को न्यायालय में राज्य की ओर से आपराधिक मामलों का संचालन करना होता है। साक्ष्यों का परीक्षण, गवाहों की परीक्षा-जिरह, आरोप निर्धारण, जमानत प्रकरण, अंतिम बहस तथा विभिन्न आपराधिक कानूनों का प्रभावी प्रयोग उसके महत्वपूर्ण दायित्वों में शामिल हैं।
ऐसे पद पर नियुक्ति में यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या अधिकारी बनने की प्रक्रिया विधिक योग्यता, क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक चयन के समान अवसर के सिद्धांतों पर आधारित है?
यह विवाद किसी AG-3 कर्मचारी की व्यक्तिगत योग्यता या कार्यक्षमता पर टिप्पणी नहीं है। प्रश्न उस पदोन्नति प्रक्रिया का है जिसके माध्यम से Class-2 के विधिक अधिकारी पद तक पहुंचने का अवसर दिया जा रहा है।
PSC से ADPO बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के समान अवसर का प्रश्न
मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में विधि स्नातक अभ्यर्थी ADPO बनने के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं। वे MPPSC की चयन प्रक्रिया से गुजरकर अधिकारी बनने की उम्मीद रखते हैं।
ऐसे में यदि एक ओर अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से ADPO बनने के लिए चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़े और दूसरी ओर किसी अन्य संवर्ग के कर्मचारियों को बिना उसी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षा के सीधे Class-2 अधिकारी पद पर पदोन्नति दी जाए, तो समान अवसर और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न — आम फरियादी का क्या?
इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष आम नागरिक और गरीब फरियादी से जुड़ा है।
अभियोजन व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य केवल विभागीय पदों को भरना नहीं, बल्कि पीड़ित और फरियादी को न्याय दिलाना तथा न्यायालय के समक्ष राज्य का प्रभावी पक्ष रखना है।
गरीब फरियादी के पास अक्सर महंगे निजी अधिवक्ता की सुविधा नहीं होती। ऐसे में सरकारी अभियोजन अधिकारी ही उसके मामले में न्याय प्राप्त करने की महत्वपूर्ण कड़ी होता है।
इसलिए यह प्रश्न भी विचारणीय है कि क्या अभियोजन के Class-2 अधिकारी पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें विधिक क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक योग्यता का पारदर्शी परीक्षण हो?
लंबित रिट के बीच प्रस्तावित DPC
जब इसी विषय से संबंधित विधिक प्रश्न माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हैं, तब 8 अक्टूबर को प्रस्तावित DPC को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सार्वजनिक हित में यह अपेक्षा की जा रही है कि विभाग लंबित न्यायिक कार्यवाही, लागू सेवा नियमों तथा पदोन्नति के वैधानिक आधार को स्पष्ट करे और यह सुनिश्चित करे कि न्यायालय की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
विभागीय अधिकारी ने क्या कहा?
इस संबंध में अभियोजन विभाग के ज्वाइन डायरेक्टर श्री राजकुमार उईके से जानकारी लेने पर उन्होंने कहा—
“मुझे इस संबंध में कोई जानकारी देने से मना किया गया है। मैं आठ तारीख के बाद सब जानकारी दे पाऊँगा।”
श्री उई के इस कथन से फिलहाल इस विषय पर विभाग की ओर से विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति सामने आती है। अब 8 अक्टूबर के बाद विभाग की ओर से इस संबंध में क्या आधिकारिक जानकारी सामने आती है, यह महत्वपूर्ण होगा।
उठते हुए प्रमुख सवाल
1. क्या AG-3 संवर्ग से सीधे ADPO जैसे Class-2 विधिक अधिकारी पद पर पदोन्नति के लिए प्रतियोगी परीक्षा आवश्यक है?
2. क्या ऐसी पदोन्नति से PSC के माध्यम से ADPO बनने की तैयारी कर रहे योग्य अभ्यर्थियों के समान अवसर का प्रश्न उत्पन्न होता है?
3. जब इसी विषय से संबंधित रिट याचिका उच्च न्यायालय में लंबित है, तब DPC आयोजित करने का विधिक आधार क्या है?
4. क्या इस पदोन्नति के लिए लागू सेवा नियमों और चयन प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाना चाहिए?
5. क्या अभियोजन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में अधिकारी पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया में विधिक योग्यता एवं क्षमता का समान रूप से परीक्षण होना चाहिए?
जनहित में अपेक्षा
यह विषय किसी कर्मचारी या कर्मचारी वर्ग के विरोध का विषय नहीं है। AG-3 संवर्ग के प्रत्येक कर्मचारी के सेवा संबंधी अधिकारों का सम्मान आवश्यक है।
लेकिन उसी प्रकार उन हजारों विधि स्नातकों के समान अवसर के अधिकार पर भी विचार होना चाहिए जो प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से ADPO बनने के लिए वर्षों तैयारी करते हैं।
सबसे बढ़कर, अभियोजन व्यवस्था का केंद्र आम फरियादी और न्याय की अपेक्षा रखने वाला नागरिक है।
इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि ADPO जैसे महत्वपूर्ण Class-2 विधिक अधिकारी पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी, विधि-सम्मत, योग्यता आधारित और न्यायिक मर्यादा के अनुरूप हो।
न्याय व्यवस्था में पद नहीं, प्रक्रिया पर विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है।
