मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अहम फैसला: अनुकंपा नियुक्ति अधिकार नहीं, तात्कालिक राहत—8 साल बाद नहीं किया जा सकता दावा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि मृत सरकारी कर्मचारी के परिजनों को अनुकंपा के...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि मृत सरकारी कर्मचारी के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलना कोई कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि केवल तात्कालिक आर्थिक संकट से उबरने के लिए दी जाने वाली राहत है। अदालत ने कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के कई साल बाद ऐसी नियुक्ति की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
क्या था मामला?
यह फैसला न्यायमूर्ति दीपक खोते की एकलपीठ ने आशीषुतोष साध की याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता ने अपने दिवंगत पिता के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति न दिए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
आशीषुतोष के पिता इटारसी के केसला ब्लॉक में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत थे और उनका निधन दिसंबर 2008 में हो गया था। उस समय याचिकाकर्ता की उम्र करीब 11 वर्ष थी। उन्होंने 2016 में हायर सेकेंडरी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।
क्यों खारिज हुआ आवेदन?
प्रशासन की ओर से याचिकाकर्ता को बताया गया कि उनके पिता जनजातीय कार्य विभाग के स्कूल में पदस्थ थे, इसलिए आवेदन संबंधित विभाग के सहायक संचालक के पास किया जाना चाहिए। बाद में तीन सदस्यीय समिति ने आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि 2014 की नीति के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति के लिए कर्मचारी की मृत्यु के एक वर्ष के भीतर आवेदन किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट की कानूनी व्याख्या
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि 2008 में लागू नीति को भी आधार बनाया जाए, तब भी याचिकाकर्ता का दावा स्वीकार नहीं हो सकता। उस समय की नीति के अनुसार, मृत कर्मचारी के आश्रित को अधिकतम सात वर्ष के भीतर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन करना होता था।
अदालत ने कहा कि:
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पिता की मृत्यु के बाद सात साल से अधिक समय बीत चुका था
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इसलिए आवेदन समय-सीमा से बाहर (टाइम-बार्ड) था
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प्रशासन द्वारा आवेदन खारिज किया जाना न तो गलत है और न ही नियमों के विरुद्ध
अनुकंपा नियुक्ति पर अदालत का स्पष्ट रुख
हाईकोर्ट ने दोहराया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को तत्काल राहत देना है, न कि वर्षों बाद रोजगार का दावा करने का माध्यम बनाना। लंबे अंतराल के बाद किया गया आवेदन इस मूल उद्देश्य को ही निष्फल कर देता है।
व्यापक असर
यह फैसला उन मामलों के लिए मिसाल माना जा रहा है, जहां अनुकंपा नियुक्ति को अधिकार के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। अदालत का यह रुख सरकारी विभागों को नीतियों के सख्त पालन और समयसीमा को लेकर स्पष्ट दिशा देता है।
