रीवा–सीधी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 4,000 से अधिक नशीली कफ सीरप की शीशियां जब्त, सात गिरफ्तार
मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशों के बाद रीवा और सीधी पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी मुहिम चलाते हुए 4,000 से अधिक कोडीन आधारित कफ...

मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशों के बाद रीवा और सीधी पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी मुहिम चलाते हुए 4,000 से अधिक कोडीन आधारित कफ सीरप की शीशियां जब्त कीं। पुलिस का कहना है कि यह सीरप नशे के रूप में बड़ी मात्रा में युवाओं में फैल रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
राज्यव्यापी एंटी-ड्रग अभियान की शुरुआत
हाल ही में हुई कलेक्टर–कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश माकवाना को राज्यभर में नशा विरोधी अभियान शुरू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रदेशभर की पुलिस सक्रिय हुई और कोडीन, गांजा, चरस और सिंथेटिक ड्रग्स जैसी प्रतिबंधित वस्तुओं पर निगरानी तेज कर दी गई।
DGP माकवाना ने कहा कि “नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई प्राथमिकता है। कोडीन मिश्रित कफ सीरप जैसे पदार्थ धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक निर्भरता पैदा करते हैं, जिससे समाज में अपराध और स्वास्थ्य संकट बढ़ता है।”
रीवा में दो तस्कर गिरफ्तार, करोड़ों का माल जब्त
रीवा जिले में पुलिस ने दो संदिग्ध तस्करों — राहुल सिंह और उत्कर्ष द्विवेदी (दोनों निवासी सीधी) — को गिरफ्तार किया।
उनके पास से 2,314 शीशियां ‘ऑनरेक्स’ कफ सीरप (कुल मूल्य ₹4.51 लाख), दो कारें (₹12 लाख मूल्य) और अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं जब्त की गईं।
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी नशे की खेप को पड़ोसी जिलों में खपाने की योजना बना रहे थे। इस कार्रवाई में रीवा पुलिस ने कुल ₹12.68 लाख मूल्य का माल जब्त किया।
सीधी जिले में तीन छापे, नकदी और वाहन बरामद
सीधी जिले में पुलिस ने तीन प्रमुख स्थानों पर छापे मारे। इस दौरान 1,180 बोतलें ऑनरेक्स कफ सीरप (₹2.37 लाख मूल्य), एक वाहन (₹10 लाख), एक मोबाइल फोन (₹15,000), एक SUV और ₹12.52 लाख नकद जब्त किया गया।
इन कार्रवाइयों में कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
स्वास्थ्य और समाज पर असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कोडीन मिश्रित कफ सीरप लंबे समय तक सेवन करने पर मस्तिष्क के रासायनिक संतुलन को प्रभावित करता है। इसके सेवन से नींद में बाधा, हृदय गति में अनियमितता, और श्वसन तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।
डॉ. अजय श्रीवास्तव, (नशामुक्ति विशेषज्ञ, रीवा मेडिकल कॉलेज) बताते हैं कि, “यह सीरप आमतौर पर खांसी के इलाज में दिया जाता है, लेकिन कोडीन की उपस्थिति के कारण इसका दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है। युवाओं को लत से बचाने के लिए न केवल पुलिस कार्रवाई बल्कि सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।”
भविष्य की रणनीति
राज्य पुलिस मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि सभी जिलों में फार्मेसी दुकानों की नियमित जांच की जाए और बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के कोडीन आधारित दवाओं की बिक्री पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, पुलिस साइबर प्लेटफॉर्म्स पर भी नशे से जुड़ी अवैध ऑनलाइन बिक्री पर नजर रखेगी।
