BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
International

पाकिस्तान में भूचाल: 27वें संवैधानिक संशोधन के खिलाफ विपक्ष का देशव्यापी आंदोलन, सेना प्रमुख असीम मुनीर को मिल सकता है ‘सुपर कमांडर’ का दर्जा

सेना और संविधान के बीच नई जंग पाकिस्तान की सियासत एक बार फिर उथल-पुथल में है। सरकार द्वारा प्रस्तावित 27वां संवैधानिक संशोधन देश की सैन्य...

Nov 9
3 min read
पाकिस्तान में भूचाल: 27वें संवैधानिक संशोधन के खिलाफ विपक्ष का देशव्यापी आंदोलन, सेना प्रमुख असीम मुनीर को मिल सकता है ‘सुपर कमांडर’ का दर्जा

सेना और संविधान के बीच नई जंग

पाकिस्तान की सियासत एक बार फिर उथल-पुथल में है। सरकार द्वारा प्रस्तावित 27वां संवैधानिक संशोधन देश की सैन्य संरचना और न्यायिक व्यवस्था दोनों को नया रूप देने जा रहा है।

सबसे विवादास्पद प्रस्ताव है — ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज़ (CDF)’ नामक नया पद, जो चीफ ऑफ ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) की जगह लेगा। इस पद के लिए मौजूदा सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर का नाम तय माना जा रहा है।

विश्लेषकों के मुताबिक, इस कदम से मुनीर को पाकिस्तानी थल, वायु और नौसेना — तीनों बलों पर सर्वोच्च अधिकार प्राप्त हो जाएगा।


भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद आया बदलाव

इस संशोधन की पहल ऐसे समय में हुई जब भारत ने अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। इस अभियान में भारतीय सेना ने पाकिस्तान नियंत्रित क्षेत्रों में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया।

पाकिस्तानी सरकार ने इस सैन्य असफलता के बाद अपने रक्षा ढांचे को पुनर्गठित करने का फैसला किया। जानकारों के अनुसार, CDF का पद असीम मुनीर को “सुपर कमांडर” बनाकर सेना की कमान को केंद्रीकृत करेगा।


विपक्ष सड़कों पर: “लोकतंत्र खतरे में”

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व में गठित तेहरीक-ए-तहफ़्फ़ुज़-ए-आईन-ए-पाकिस्तान (TTAP) ने रविवार से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।

TTAP के एक बयान में कहा गया, “यह संशोधन संविधान की नींव हिला देगा। लोकतांत्रिक संस्थाएँ पहले ही निष्क्रिय की जा चुकी हैं। अब यह कदम तानाशाही को वैधता देगा।”

मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन (MWM) के प्रमुख आलमा राजा नासिर अब्बास ने कहा कि “देश के लोकतांत्रिक ढांचे को जानबूझकर तोड़ा जा रहा है, अब जनता को सड़कों पर उतरना ही होगा।”

वहीं पश्तूनख़्वा मिली अवामी पार्टी (PkMAP) के नेता मह्मूद ख़ान अचकज़ई ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों का नारा होगा —
“जियो जम्हूरियत, मुर्दाबाद तानाशाही।”


न्यायपालिका में भी बड़ा फेरबदल

27वें संशोधन में सेना से जुड़े प्रावधानों के अलावा फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट (FCC) की स्थापना का प्रस्ताव भी शामिल है। इस अदालत के गठन के बाद पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट अपनी सर्वोच्च संवैधानिक भूमिका खो सकता है।

कानूनी विशेषज्ञों में इस प्रस्ताव को लेकर मतभेद हैं। कुछ का मानना है कि यह सुप्रीम कोर्ट को “कमज़ोर” कर देगा, जबकि समर्थकों का तर्क है कि FCC से संवैधानिक और अपीलीय मामलों में स्पष्टता और गति आएगी।


विशेषज्ञों की कड़ी आलोचना

पूर्व रक्षा सचिव लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) आसिफ यासीन मलिक ने डॉन अख़बार से कहा,
“अगर एक ही सैन्य अधिकारी को थलसेना, नौसेना और वायुसेना — तीनों पर अधिकार मिल जाएगा, तो यह संस्थागत असंतुलन और संभावित संकट को जन्म देगा।”

उन्होंने आगे कहा, “यह संशोधन रक्षा ढांचे को सशक्त करने के बजाय किसी एक व्यक्ति को लाभ पहुँचाने के लिए तैयार किया गया प्रतीत होता है।”


पाकिस्तान की सत्ता का बदलता समीकरण

राजनीतिक पर्यवेक्षक इस संशोधन को ‘दीप स्टेट’ के पुनर्गठन के रूप में देख रहे हैं — यानी सेना और सुरक्षा एजेंसियों का प्रत्यक्ष नियंत्रण नागरिक सरकार पर और गहरा होगा।

इससे पहले भी पाकिस्तान में संविधान संशोधन का इतिहास यह दिखाता है कि हर सैन्य पुनर्गठन के बाद नागरिक शासन और लोकतंत्र कमजोर पड़ा है।


निष्कर्ष:
27वां संवैधानिक संशोधन पाकिस्तान की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। एक तरफ सरकार इसे “संस्थागत सुधार” बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे “संविधान की हत्या” कह रहा है।
लेकिन सवाल अब यह है — क्या यह संशोधन पाकिस्तान में सत्ता के संतुलन को स्थिर करेगा, या लोकतंत्र को और अस्थिर कर देगा?