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मप्र सरकार 2 दिसंबर को पेश करेगी ₹14,000 करोड़ का दूसरा अनुपूरक बजट, लाड़ली बहना और पीएम आवास योजनाओं को मिलेगा बड़ा आवंटन

मध्यप्रदेश सरकार आगामी 2 दिसंबर को करीब ₹14,000 करोड़ का दूसरा अनुपूरक बजट पेश करने जा रही है। इससे स्पष्ट है कि इस बार शीतकालीन...

Nov 30
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मप्र सरकार 2 दिसंबर को पेश करेगी ₹14,000 करोड़ का दूसरा अनुपूरक बजट, लाड़ली बहना और पीएम आवास योजनाओं को मिलेगा बड़ा आवंटन

मध्यप्रदेश सरकार आगामी 2 दिसंबर को करीब ₹14,000 करोड़ का दूसरा अनुपूरक बजट पेश करने जा रही है। इससे स्पष्ट है कि इस बार शीतकालीन सत्र का मुख्य केंद्र वित्तीय प्रबंधन और योजनाओं के लिए धन आवंटन होगा।
पहला अनुपूरक बजट, जो 29 जुलाई को विधानसभा में पेश हुआ था, केवल ₹2,356.80 करोड़ का था—जो पिछले कई वर्षों के औसत ₹15,000–20,000 करोड़ की तुलना में काफी कम था। अधिकारियों के अनुसार इसकी वजह थी सरकार द्वारा अपनाया गया ज़ीरो-बेस्ड बजटिंग मॉडल, जिसमें हर खर्च को नए सिरे से और शून्य आधार से उचित ठहराना आवश्यक होता है।


लाड़ली बहना योजना का खर्च बढ़ा – हर महीने ₹300 करोड़ की अतिरिक्त जरूरत

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि दूसरा अनुपूरक बजट पहले की तुलना में कहीं बड़ा होगा क्योंकि नौ महीने बीत चुके हैं और विभागों को विभिन्न योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता है

सबसे बड़ा वित्तीय दबाव लाड़ली बहना योजना पर है।

  • पहले इस योजना के तहत राज्य सरकार को हर माह करीब ₹1,540 करोड़ की आवश्यकता होती थी।

  • लेकिन जब सरकार ने मासिक सहायता ₹1,250 से बढ़ाकर ₹1,500 की, तो मासिक व्यय बढ़कर ₹1,850 करोड़ हो गया।
    यानी हर महीने ₹300 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

सरकार को अपने हिस्से का योगदान केंद्रीय योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, में भी बढ़ाना पड़ेगा। साथ ही विभिन्न सब्सिडी आधारित राज्य योजनाओं को जारी रखने के लिए भी अतिरिक्त बजट जरूरी है।


चार दिन का छोटा सत्र – विपक्ष ने जताई आपत्ति

विधानसभा का शीतकालीन सत्र 1 से 5 दिसंबर तक होगा, जिसमें सिर्फ चार बैठकें प्रस्तावित हैं। 3 दिसंबर अवकाश रहेगा।
कांग्रेस ने इस कम अवधि को लेकर पहले ही आपत्ति जताई है और कहा है कि इतने सीमित समय में राज्य के गंभीर मुद्दों पर चर्चा संभव नहीं है।

विपक्ष उन मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने की तैयारी में है, जिनमें शामिल हैं—

  • छिंदवाड़ा कफ़ सिरप हादसा, जिसमें कम से कम 24 बच्चों की मौत हुई

  • रायसेन में छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म का मामला

  • वीआईटी कैंपस में हुई हिंसा

  • एसआईआर ड्यूटी के दौरान बीएलओ कर्मचारियों की मौत


नगरीय निकाय चुनावों में चेयरपर्सन का सीधा चुनाव: बिल आएगा सदन में

कैबिनेट ने उस महत्वपूर्ण बिल को भी मंजूरी दे दी है, जिसमें नगर पालिका और नगर परिषदों में अध्यक्ष पद के सीधे चुनाव की व्यवस्था बहाल की जाएगी।
यह कानून लागू होने पर स्थानीय निकायों में नेतृत्व चयन का तरीका बदलेगा और राजनीतिक रूप से इसका व्यापक असर माना जा रहा है।


विधायकों के वेतन एवं पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव भी संभव

सूत्रों के अनुसार सत्र में विधायकों का वेतन ₹1.10 लाख से बढ़ाकर ₹1.70 लाख प्रति माह किए जाने का प्रस्ताव भी सामने आ सकता है।
पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।

हालाँकि विपक्ष संभवतः इसे समय की संवेदनशीलता को देखते हुए आलोचना के तौर पर भी उठा सकता है—क्योंकि राज्य में कई कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी सेवाओं पर पहले ही भारी वित्तीय दबाव है।


विश्लेषण: क्यों अहम है यह अनुपूरक बजट?

मध्यप्रदेश में पिछले एक वर्ष से राजनीतिक दिशा और वित्तीय प्राथमिकताएँ तेजी से बदल रही हैं।

  • ज़ीरो-बेस्ड बजटिंग के कारण सरकार ने इस वर्ष न्यूनतम प्रारंभिक खर्चों के साथ काम शुरू किया।

  • लेकिन कई सामाजिक कल्याण योजनाओं, खासकर लाड़ली बहना, और केंद्रीय व राज्य स्तरीय अवसंरचनात्मक कार्यक्रमों के लिए वित्तीय आवश्यकताएँ लगातार बढ़ती गईं।

  • दूसरा अनुपूरक बजट उन वास्तविक जरूरतों को कवर करने का प्रयास है जिन्हें साल के शुरुआती चरण में अनुमानित नहीं किया जा सका था।

वित्त विशेषज्ञों का मत है कि इतने बड़े अनुपूरक बजट से यह संकेत मिलता है कि राज्य को अपनी विकास योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा स्कीमों का संतुलन बनाए रखने के लिए भारी संसाधनों की जरूरत है और यह आने वाले वर्ष में भी जारी रह सकता है।