मंदसौर में 18 वर्षीय युवक की गलत गिरफ्तारी सामने आई: हाई कोर्ट की सख्ती के बाद SP ने पुलिस की गलती मानी
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की सख्त पूछताछ के बाद मंदसौर जिले की पुलिस ने स्वीकार किया है कि अगस्त 2025 में 18 वर्षीय सोहनलाल को...
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की सख्त पूछताछ के बाद मंदसौर जिले की पुलिस ने स्वीकार किया है कि अगस्त 2025 में 18 वर्षीय सोहनलाल को अफीम तस्करी के मामले में गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया था। मामला अब पुलिस जांच की विश्वसनीयता, गिरफ्तारी प्रक्रिया और NDPS एक्ट के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
क्या था मामला?
अगस्त 2025 में दर्ज एफआईआर के अनुसार, पुलिस ने दावा किया था कि 29 अगस्त को बंडा खाल चौराहे के पास स्थित श्मशान घाट के सामने सोहनलाल के बैग से 2.7 किलोग्राम अफीम बरामद हुई। इस आधार पर उसके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत गंभीर धाराएँ लगाई गईं।
लेकिन हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में परिवार ने यह दावा किया कि सोहनलाल को बस से जबरन उतारकर पुलिसकर्मियों ने उठाया, और झूठा केस बनाकर उसे फँसा दिया।
CCTV फुटेज ने बदल दिया पूरा मामला
सोहनलाल के अधिवक्ता हिमांशु ठाकुर द्वारा कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस की कथा को उलट दिया।
फुटेज में साफ दिख रहा था कि—
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युवक बस में सफर कर रहा था,
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कुछ लोग उसे बस से उतारकर ले जाते दिख रहे थे,
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जबकि एफआईआर में दावा किया गया था कि युवक को सड़क किनारे बैग समेत पकड़ा गया।
प्रारंभिक सुनवाई में मल्हारगढ़ पुलिस ने कहा कि वे फुटेज में दिख रहे लोगों को पहचान नहीं पा रहे। इससे कोर्ट और भी सख्त हो गया।
SP ने हाई कोर्ट में स्वीकार की पुलिस की गलती
हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा SP को तलब करने के बाद मंदसौर SP विनोद कुमार मीणा ने मंगलवार को अदालत में स्वीकार किया कि—
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फुटेज में दिख रहे लोग वास्तव में पुलिसकर्मी ही थे।
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मामले की जांच में गंभीर त्रुटियाँ हुईं।
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कुल 6 पुलिसकर्मी निलंबित कर दिए गए हैं।
निलंबित पुलिसकर्मियों में शामिल हैं:
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थाना प्रभारी राजेंद्र पवार
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उप निरीक्षक साजिद मंसूरी
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उप निरीक्षक संजय प्रताप सिंह
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आरक्षक नरेंद्र
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आरक्षक जितेंद्र
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आरक्षक दिलीप जाट
SP ने बताया कि सभी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
दो महीने जेल… और टूटता करियर
18 वर्षीय सोहनलाल, जिसने 12वीं प्रथम श्रेणी में पास की थी और सिविल सेवा में करियर बनाने का सपना देखता था, को इस मामले में दो महीने जेल में बिताने पड़े। बाद में हाई कोर्ट से उसे जमानत मिली।
परिवार और वकील का आरोप है कि इस गलत गिरफ्तारी ने सोहनलाल की पढ़ाई तथा करियर पर भारी मानसिक और सामाजिक प्रभाव डाला है।
कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा
हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश को सुरक्षित रख लिया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला NDPS एक्ट के मामलों में प्रक्रियात्मक निष्पक्षता, पुलिस जवाबदेही और सीसीटीवी जैसी तकनीकी साक्ष्यों के महत्व को फिर से केंद्र में ला देता है।
