ठंडक की जगह ज़हर बना कोल्ड्रिफ़: 14 बच्चों की मौत के बाद मध्यप्रदेश में दवा दुकानों पर सख़्त कार्रवाई, 800 कफ सिरप जब्त
राज्यभर में जांच अभियान तेज़ छिंदवाड़ा जिले में कथित तौर पर विषाक्त कोल्ड्रिफ़ सिरप पीने से 14 बच्चों की मौत के बाद, मध्यप्रदेश सरकार ने...

राज्यभर में जांच अभियान तेज़
छिंदवाड़ा जिले में कथित तौर पर विषाक्त कोल्ड्रिफ़ सिरप पीने से 14 बच्चों की मौत के बाद, मध्यप्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में फार्मेसियों पर निगरानी कड़ी कर दी है। स्वास्थ्य विभाग और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की टीमें अब हर जिले में मेडिकल स्टोर्स की तलाशी ले रही हैं, ताकि असुरक्षित दवाओं की बिक्री पर तुरंत रोक लगाई जा सके।
मंगलवार को ही प्रदेशभर से 800 बोतलें जब्त की गईं, जबकि 100 बोतलें भोपाल में सील की गईं। इन दवाओं के नमूने जांच के लिए राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं।
तीन कफ सिरप पर तत्काल प्रतिबंध
सरकार ने तीन ब्रांड की कफ सिरप को “Not of Standard Quality (NSQ)” घोषित कर राज्यभर में उनकी बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी है। प्रतिबंधित दवाओं में शामिल हैं:
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Coldrif Syrup – निर्माता: तमिलनाडु
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Relife Syrup (Ambroxol HCL, Guaiphenesin Sulphate, Menthol) – निर्माता: गुजरात
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Respifresh TR Syrup (Bromhexine Hydrochloride, Terbutaline Sulphate, Guaiphenesin, Menthol) – निर्माता: गुजरात
इन तीनों दवाओं के नमूने फेल होने के बाद राज्य सरकार ने इन्हें तत्काल बाजार से हटाने का आदेश दिया। स्वास्थ्य विभाग ने कंपनियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए हैं।
भोपाल में सघन निरीक्षण अभियान
राजधानी भोपाल में एफडीए की टीमों ने मंगलवार को कई मेडिकल दुकानों का निरीक्षण किया। रेडनीऑक्स कंपनी के “स्मार्ट बे” ब्रांड की सिरप की दो सैंपल बोतलें जांच के लिए ली गईं। जब्त की गई बोतलों पर ‘Not for Sale’ का टैग लगाया गया है।
एफडीए के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध दवा की बिक्री पाए जाने पर तुरंत स्टॉक फ्रीज़ करें और कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करें।
एफडीए की चेतावनी और निगरानी
इदगाह हिल्स स्थित एफडीए मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार ने “स्टैंडिंग ऑर्डर” जारी किया है, जिसके तहत सभी NSQ या संदिग्ध गुणवत्ता वाली दवाओं को तुरंत फ्रीज़ करने के निर्देश हैं।
उन्होंने बताया कि जिन कंपनियों की दवाएं मानक पर खरी नहीं उतर रहीं, उनकी उत्पादन इकाइयों की जांच की जा रही है। प्रदेशभर में 24 घंटे की निगरानी व्यवस्था शुरू की गई है ताकि कोई भी खतरनाक या मिलावटी दवा बाज़ार में दोबारा न पहुंचे।
बच्चों की मौत के बाद जागा प्रशासन
छिंदवाड़ा और बेतूल में कुल 16 बच्चों की मौत के बाद यह कार्रवाई शुरू हुई। जांच में सामने आया कि बच्चों ने जो सिरप पिया, उसमें रासायनिक स्तर पर खतरनाक तत्व मौजूद थे। विशेषज्ञों का कहना है कि ये उद्योग जगत में गुणवत्ता नियंत्रण की गंभीर विफलता का संकेत है।
स्वास्थ्य विभाग ने आश्वासन दिया है कि दोषी कंपनियों और वितरकों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
