ठंड के मौसम में आदिवासी इलाकों के सरकारी अस्पतालों की हालत खराब — नवजात वार्ड में पांच गुना तक बढ़ा दबाव, बेड और स्टाफ की भारी कमी
🏥 ट्राइबल क्षेत्रों के अस्पतालों में संसाधनों की भारी कमी राज्य के कई आदिवासी बहुल जिलों में स्थित सरकारी अस्पताल इन दिनों गंभीर संसाधन संकट...
🏥 ट्राइबल क्षेत्रों के अस्पतालों में संसाधनों की भारी कमी
राज्य के कई आदिवासी बहुल जिलों में स्थित सरकारी अस्पताल इन दिनों गंभीर संसाधन संकट का सामना कर रहे हैं।
मैनपावर, वार्मर, ऑक्सीजन बेड और उपकरणों की कमी के कारण अस्पतालों में मरीजों का दबाव संभालना मुश्किल हो रहा है — खासकर स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में, जहां ठंड के मौसम में नवजात शिशुओं की संख्या सामान्य से पांच गुना तक बढ़ गई है।
👶 सर्दी में बढ़ रहा नवजातों का खतरा
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, ठंड की लहर (Cold Wave) के दौरान नवजात बच्चों में संक्रमण, सांस की तकलीफ और हाइपोथर्मिया के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं।
ऐसे में ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों से माता-पिता अपने नवजात शिशुओं को उपचार के लिए जिला अस्पतालों में लेकर पहुंचते हैं, जिससे SNCU वार्डों में ओवरलोड की स्थिति बन जाती है।
“सुविधाएं बेड के हिसाब से स्वीकृत हैं, लेकिन मरीजों का प्रवाह उससे कई गुना ज्यादा होता है,” एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया।
🗣️ उमरिया के CMHO बोले — 10 बेड पर संभालने पड़ते हैं दर्जनों मरीज
उमरिया के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. एस. बी. चौधरी ने बताया —
“हमारे जिला अस्पताल के SNCU में सिर्फ 10 बेड हैं, जबकि सर्दी के मौसम में दूरदराज़ इलाकों से मरीजों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। हमें सीमित वार्मर और उपकरणों में ही इलाज करना पड़ता है।”
🩺 विदिशा के CMHO: विभाग स्थिति की समीक्षा कर रहा है
विदिशा CMHO डॉ. ए. के. उपाध्याय ने कहा —
“सर्दी के मौसम में आसपास के इलाकों से मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती है। हमने SNCU में अधिकतम क्षमता तक सुविधाएं सुनिश्चित की हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठा रहा है।”
🏥 शहडोल मेडिकल कॉलेज: 10 बेड पर 60 बच्चों का इलाज
शहडोल मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. नागेंद्र सिंह ने बताया —
“हमारे SNCU में सिर्फ 10 बेड हैं, लेकिन ठंड के मौसम में हमें 50–60 नवजात बच्चों को समायोजित करना पड़ता है। यह इलाका आदिवासी बेल्ट में आता है, इसलिए आसपास के दूरस्थ गांवों से भी मरीज यहां आते हैं।
सामान्य दिनों में सुविधाएं पर्याप्त रहती हैं, पर सर्दी में बेड और स्टाफ की भारी कमी से जूझना पड़ता है।”
🧑⚕️ स्वास्थ्य विभाग का जवाब: “समीक्षा जारी, निर्देश जारी किए गए”
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि सभी जिला चिकित्सा अधिकारी, सिविल सर्जन और अधीक्षक को हालात से निपटने के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थिति की समीक्षा समय-समय पर की जाती है, और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त संसाधन मुहैया कराए जाएंगे।
🩹 बड़ी चुनौती: ठंड और संसाधनों की सीमाएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दी के मौसम में शिशु मृत्यु दर (infant mortality rate) को रोकने के लिए राज्य को अस्थायी SNCU विस्तार, मोबाइल वार्मर यूनिट्स और अतिरिक्त स्टाफ डिप्लॉयमेंट जैसे कदम उठाने होंगे।
वरना आने वाले हफ्तों में हालात और बिगड़ सकते हैं।
